डीग नगर परिषद चुनाव: भाजपा 16 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन 24 निर्दलीयों के हाथ में सत्ता की चाबी
सारांश
मुख्य बातें
डीग नगर परिषद के 40 वार्डों के लिए 14 सितंबर 2026 को घोषित चुनाव परिणामों में किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 16 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल का दर्जा हासिल किया, लेकिन बहुमत के लिए आवश्यक 21 के जादुई आँकड़े से 5 पार्षद दूर रह गई। उल्लेखनीय यह है कि 24 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने बाज़ी मारी, जिससे राजस्थान के इस नगर निकाय में एक बार फिर त्रिशंकु बोर्ड की स्थिति बन गई है।
मतगणना का घटनाक्रम
11 सितंबर 2026 को डीग नगर परिषद के सभी 40 वार्डों में मतदान संपन्न हुआ था। मतगणना सोमवार, 14 सितंबर को सुबह 8 बजे डीग शहर के किशन लाल जोशी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शुरू हुई और 8 राउंड में पूरी की गई। मतगणना केंद्र पर प्रत्याशियों और उनके समर्थकों में भारी उत्सुकता देखी गई। परिणाम आते ही स्पष्ट हो गया कि इस बार भी नगर परिषद में त्रिशंकु बोर्ड ही बनेगा।
निर्दलीयों का दबदबा, भाजपा का सीमित जनादेश
इस चुनाव का सबसे बड़ा उलटफेर निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रदर्शन रहा। 24 वार्डों में निर्दलीयों की जीत भाजपा की 16 सीटों से 8 अधिक है। 40 सदस्यीय नगर परिषद में बहुमत के लिए 21 पार्षदों का समर्थन ज़रूरी है, जो फिलहाल किसी के पास नहीं है।
गौरतलब है कि पिछले चुनाव में भी डीग की जनता ने किसी एक दल को खुला जनादेश नहीं दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में भाजपा की सरकार है और पार्टी स्थानीय निकायों में अपनी पकड़ मज़बूत करना चाहती है।
सत्ता की चाभी निर्दलीयों के हाथ
परिणाम घोषित होते ही निर्दलीय पार्षदों के घरों पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का आना-जाना शुरू हो गया। भाजपा को बोर्ड गठन के लिए कम से कम 5 और पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। जिस खेमे में निर्दलीयों का बड़ा गुट जाएगा, अध्यक्ष पद पर उसी का दावा सबसे मज़बूत होगा।
यदि निर्दलीय आपस में एकजुट होकर कोई स्वतंत्र रणनीति बनाते हैं तो समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। जोड़तोड़ की राजनीति तेज़ हो गई है और आगामी कुछ दिनों में होने वाली बातचीत तथा बैठकें ही यह तय करेंगी कि डीग में अगला बोर्ड किसका बनेगा।
अध्यक्ष पद की दौड़
पार्षदों के चुनाव के बाद अब सबकी नज़र अध्यक्ष पद पर है। जिस पक्ष के पास 21 का जादुई आँकड़ा होगा, अध्यक्ष पद पर उसका दावा स्वाभाविक रूप से सबसे मज़बूत माना जाएगा। भाजपा के लिए बोर्ड बनाने का रास्ता निर्दलीयों की सहमति से ही खुलेगा।
आने वाले दिनों में निर्दलीय पार्षदों के निर्णय से ही तय होगा कि डीग नगर परिषद की कमान किस दल या गठजोड़ के हाथ आएगी।