हिमाचल नगर निगम चुनाव: भाजपा ने 63 में से 37 वार्ड जीते, 59% जीत दर का दावा
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश के चार नगर निगमों में हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 63 वार्डों में से 37 पर जीत दर्ज करते हुए 59 प्रतिशत जीत दर हासिल करने का दावा किया है। 31 मई 2026 को नतीजों के बाद भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह ने राज्य की जनता, पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं को बधाई दी।
मुख्य घटनाक्रम
मंडी नगर निगम में भाजपा का प्रदर्शन सर्वाधिक रहा — 14 में से 12 सीटें जीतकर पार्टी ने 86 प्रतिशत सफलता दर हासिल की। धर्मशाला नगर निगम में 17 में से 11 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया, जबकि सोलन नगर निगम में 17 में से 10 सीटों पर जीत दर्ज की गई।
नगर निगमों के अतिरिक्त, भाजपा ने दावा किया कि राज्य की 3,759 पंचायतों के चुनावों में भी भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया।
भाजपा की प्रतिक्रिया
सौदान सिंह ने कहा कि ये नतीजे हिमाचल प्रदेश की जनता की आवाज़ को दर्शाते हैं और विकास, सुशासन तथा जनसेवा की राजनीति को स्पष्ट जनादेश है। उन्होंने इस जीत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं की विजय बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम चुनावों के परिणाम भाजपा की संगठनात्मक संरचना के बूथ स्तर तक मज़बूत होने के प्रमाण हैं। राज्य भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल और विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर को भी बधाई दी गई।
कांग्रेस सरकार पर आरोप
राज्य भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल ने पंचायती राज संस्थाओं के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के चुनाव संबंधी नियमों में बदलाव को लेकर राज्य की कांग्रेस सरकार पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का प्रयास करने का आरोप लगाया।
बिंदल ने कहा कि पहले इन चुनावों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर कराने का विशेष प्रावधान था, लेकिन अधिकारियों को बैठकें बुलाने का विवेकाधिकार देकर खरीद-फरोख्त की संभावना बढ़ाई गई है। कांग्रेस सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
आम जनता पर असर
नगर निगम चुनावों के नतीजे शहरी स्थानीय निकायों की नीति-निर्माण दिशा तय करेंगे, जिससे मंडी, धर्मशाला, सोलन और अन्य निगम क्षेत्रों के नागरिक सीधे प्रभावित होंगे। यह ऐसे समय में आया है जब हिमाचल प्रदेश में राज्य सरकार और स्थानीय निकायों के बीच राजनीतिक संतुलन एक अहम मुद्दा बना हुआ है।
क्या होगा आगे
भाजपा के अनुसार पार्टी राज्य के विकास के लिए निरंतर काम करती रहेगी। पंचायती राज संस्थाओं के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनावों को लेकर नियम परिवर्तन का मामला आगे और राजनीतिक विवाद का केंद्र बन सकता है।