हिमाचल नगर निकाय चुनाव: भाजपा ने 4 में से 3 नगर निगम जीते, जयराम ठाकुर बोले — कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनादेश
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश के नगर निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चार में से तीन नगर निगमों — मंडी, धर्मशाला और सोलन — में जीत दर्ज की है, जबकि सत्तारूढ़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) केवल पालमपुर में ही अपनी सीट बचा सकी। 17 मई को पार्टी चिन्हों पर हुए इस मतदान के नतीजों को नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार के विरुद्ध स्पष्ट जनादेश करार दिया है।
मुख्य चुनावी परिणाम
चारों नगर निगमों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला था। भाजपा ने मंडी, धर्मशाला और सोलन में प्रचंड बहुमत हासिल किया। मंडी में कांग्रेस को मात्र एक सीट मिली। इसके अतिरिक्त, पंचायत प्रधान चुनावों में भी लगभग 70 प्रतिशत प्रधान भाजपा समर्थित उम्मीदवार रहे।
जयराम ठाकुर की प्रतिक्रिया
ठाकुर ने कहा, 'ये चुनाव नवंबर में ही होने थे, लेकिन मुख्यमंत्री जानते थे कि अगर चुनाव हुए तो कांग्रेस हार जाएगी।' उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने चुनाव टालने के लिए डिजास्टर एक्ट तक लागू किया। भाजपा पहले हाईकोर्ट और फिर सर्वोच्च न्यायालय गई, जिसके आदेश के बाद ही चुनाव संपन्न हो सके।
सुक्खू के क्षेत्र में भी भाजपा का दबदबा
ठाकुर ने यह भी कहा कि जिला परिषद चुनाव में मुख्यमंत्री सुक्खू के अपने क्षेत्र की चार में से तीन सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की, और सुक्खू को केवल एक सीट मिल सकी। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस सरकार पहले से ही विभिन्न प्रशासनिक चुनौतियों का सामना कर रही है।
कांग्रेस का पक्ष और राजनीतिक विश्लेषण
मुख्यमंत्री सुक्खू की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि पंचायत चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं हुए, इसलिए उनके परिणामों की सीधी तुलना नहीं की जा सकती। हालाँकि, जयराम ठाकुर ने पलटवार करते हुए कहा कि नगर निगम के चुनाव पार्टी चिन्हों पर ही लड़े गए थे और उनमें कांग्रेस की हार हुई है। गौरतलब है कि यह परिणाम हिमाचल प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल का संकेत माने जा रहे हैं।
आगे की राह
इन नतीजों के बाद भाजपा हिमाचल में अपनी संगठनात्मक पकड़ मज़बूत करने की कोशिश करेगी, जबकि कांग्रेस सरकार पर जनता के असंतोष को दूर करने का दबाव बढ़ेगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह जनादेश राज्य सरकार के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है।