18 जुलाई 2026
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हिमाचल नगर निकाय चुनाव: भाजपा ने 4 में से 3 नगर निगम जीते, जयराम ठाकुर बोले — कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनादेश

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हिमाचल नगर निकाय चुनाव: भाजपा ने 4 में से 3 नगर निगम जीते, जयराम ठाकुर बोले — कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनादेश

सारांश

हिमाचल प्रदेश में भाजपा ने चार में से तीन नगर निगम जीतकर कांग्रेस सरकार को बड़ा झटका दिया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इसे जनता का सीधा जनादेश बताया और आरोप लगाया कि सरकार ने हार के डर से सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप तक चुनाव टालने की कोशिश की।

मुख्य बातें

भाजपा ने हिमाचल प्रदेश के 4 में से 3 नगर निगमों — मंडी, धर्मशाला और सोलन — में जीत दर्ज की; कांग्रेस केवल पालमपुर में जीती।
मतदान 17 मई को पार्टी चिन्हों पर हुआ था; मंडी में कांग्रेस को मात्र एक सीट मिली।
पंचायत प्रधान चुनावों में लगभग 70 प्रतिशत प्रधान भाजपा समर्थित जीते।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार ने डिजास्टर एक्ट लगाकर चुनाव टालने की कोशिश की; सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर चुनाव हुए।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के अपने क्षेत्र में जिला परिषद की 4 में से 3 सीटें भाजपा ने जीतीं।

हिमाचल प्रदेश के नगर निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चार में से तीन नगर निगमोंमंडी, धर्मशाला और सोलन — में जीत दर्ज की है, जबकि सत्तारूढ़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) केवल पालमपुर में ही अपनी सीट बचा सकी। 17 मई को पार्टी चिन्हों पर हुए इस मतदान के नतीजों को नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार के विरुद्ध स्पष्ट जनादेश करार दिया है।

मुख्य चुनावी परिणाम

चारों नगर निगमों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला था। भाजपा ने मंडी, धर्मशाला और सोलन में प्रचंड बहुमत हासिल किया। मंडी में कांग्रेस को मात्र एक सीट मिली। इसके अतिरिक्त, पंचायत प्रधान चुनावों में भी लगभग 70 प्रतिशत प्रधान भाजपा समर्थित उम्मीदवार रहे।

जयराम ठाकुर की प्रतिक्रिया

ठाकुर ने कहा, 'ये चुनाव नवंबर में ही होने थे, लेकिन मुख्यमंत्री जानते थे कि अगर चुनाव हुए तो कांग्रेस हार जाएगी।' उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने चुनाव टालने के लिए डिजास्टर एक्ट तक लागू किया। भाजपा पहले हाईकोर्ट और फिर सर्वोच्च न्यायालय गई, जिसके आदेश के बाद ही चुनाव संपन्न हो सके।

सुक्खू के क्षेत्र में भी भाजपा का दबदबा

ठाकुर ने यह भी कहा कि जिला परिषद चुनाव में मुख्यमंत्री सुक्खू के अपने क्षेत्र की चार में से तीन सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की, और सुक्खू को केवल एक सीट मिल सकी। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस सरकार पहले से ही विभिन्न प्रशासनिक चुनौतियों का सामना कर रही है।

कांग्रेस का पक्ष और राजनीतिक विश्लेषण

मुख्यमंत्री सुक्खू की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि पंचायत चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं हुए, इसलिए उनके परिणामों की सीधी तुलना नहीं की जा सकती। हालाँकि, जयराम ठाकुर ने पलटवार करते हुए कहा कि नगर निगम के चुनाव पार्टी चिन्हों पर ही लड़े गए थे और उनमें कांग्रेस की हार हुई है। गौरतलब है कि यह परिणाम हिमाचल प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल का संकेत माने जा रहे हैं।

आगे की राह

इन नतीजों के बाद भाजपा हिमाचल में अपनी संगठनात्मक पकड़ मज़बूत करने की कोशिश करेगी, जबकि कांग्रेस सरकार पर जनता के असंतोष को दूर करने का दबाव बढ़ेगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह जनादेश राज्य सरकार के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या 2027 तक राजनीतिक खींचतान ही प्राथमिकता बनी रहेगी।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमाचल प्रदेश नगर निकाय चुनाव 2025 में किसने जीत हासिल की?
भाजपा ने चार नगर निगमों में से तीन — मंडी, धर्मशाला और सोलन — में जीत हासिल की। कांग्रेस केवल पालमपुर नगर निगम में जीत सकी। पंचायत प्रधान चुनावों में भी लगभग 70 प्रतिशत प्रधान भाजपा समर्थित रहे।
जयराम ठाकुर ने चुनाव नतीजों पर क्या कहा?
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने नतीजों को कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनादेश बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को हार का पूर्वाभास था, इसलिए डिजास्टर एक्ट लगाकर चुनाव टालने की कोशिश की गई और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद ही मतदान हो सका।
हिमाचल नगर निगम चुनाव में मतदान कब हुआ था?
चारों नगर निगमों के लिए मतदान 17 मई को पार्टी चिन्हों पर हुआ था। इसमें भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला था।
मुख्यमंत्री सुक्खू के क्षेत्र में चुनाव नतीजे कैसे रहे?
जिला परिषद चुनाव में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के अपने क्षेत्र की चार में से तीन सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। सुक्खू के क्षेत्र में कांग्रेस को केवल एक सीट मिली।
इन नतीजों का हिमाचल की राजनीति पर क्या असर होगा?
ये नतीजे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। भाजपा इसे जनता के असंतोष का प्रमाण मान रही है, जबकि कांग्रेस पर अपनी नीतियों और जनाधार को मज़बूत करने का दबाव बढ़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
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