हिमाचल निकाय चुनाव: BJP के 80% उम्मीदवार जीते, सिकंदर कुमार बोले — 'सुक्खू सरकार को जनता ने जवाब दिया'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद सिकंदर कुमार ने हिमाचल प्रदेश के नगर निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव परिणामों को ऐतिहासिक जनादेश बताते हुए मंगलवार को कहा कि राज्य की जनता ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को करारा जवाब दिया है। BJP ने चार में से तीन नगर निगमों — मंडी, धर्मशाला और सोलन — में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस केवल पालमपुर में सफल रही।
मुख्य चुनाव परिणाम
चारों नगर निगमों के लिए 17 मई को पार्टी चिन्हों पर मतदान हुआ था, जिसमें BJP और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला था। सांसद सिकंदर कुमार के अनुसार, नगर निगम, नगर निकाय, नगर पंचायत और पंचायती राज संस्थाओं के समग्र नतीजों में BJP के 80 प्रतिशत से अधिक उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। उल्लेखनीय यह भी रहा कि मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के गृह क्षेत्रों में भी सत्तारूढ़ दल को हार का सामना करना पड़ा।
सुक्खू पर सीधा हमला
सांसद सिकंदर कुमार ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, "जब सुक्खू मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्होंने बोला था कि 97 प्रतिशत हिंदुओं को हराकर मैं मुख्यमंत्री बना हूं, लेकिन आज उन्हीं 97 प्रतिशत हिंदुओं ने उन्हें हराया है। उन्होंने मुख्यमंत्री के क्षेत्र में भी कांग्रेस को हराया है।" उन्होंने हिमाचल की जनता के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
CBSE विवाद पर प्रतिक्रिया
चुनावी नतीजों के अलावा सांसद सिकंदर कुमार ने CBSE से जुड़े विवाद पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, "जब भी आप किसी सिस्टम को देखते हैं तो कोई न कोई तकनीकी खामी रह जाती है। संसदीय समिति की बैठक में इस बात पर विचार हुआ कि तकनीकी खामियाँ आगे न रहें और इसके लिए संबंधित विभाग पूरी तैयारी के साथ व्यवस्था करे।"
दिग्विजय सिंह की मोदी-प्रशंसा पर टिप्पणी
कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा किए जाने पर सिकंदर कुमार ने कहा, "दिग्विजय सिंह ने बोलकर प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की, लेकिन इनके नेता राहुल गांधी इस तरह बोल नहीं पाते। हालांकि, वे सभी जानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी काबिल इंसान हैं और उन्होंने देश को दुनिया के चुनिंदा देशों के साथ खड़ा कर दिया है।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब हिमाचल में सत्ता-विरोधी लहर की व्याख्या को लेकर दोनों दलों के बीच वाक्-युद्ध तेज हो गया है।