हिमाचल स्थानीय निकाय चुनाव: भाजपा की जीत कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनादेश — जयराम ठाकुर
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने 18 मई 2026 को स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के विरुद्ध जनता का स्पष्ट जनादेश बताया। शिमला स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ जीत का जश्न मनाते हुए ठाकुर ने कहा कि राज्य की जनता ने कथित भ्रष्टाचार, अराजकता और माफिया संरक्षण की राजनीति को पूरी तरह नकार दिया है।
मुख्य चुनावी परिणाम
रविवार को हिमाचल प्रदेश के 12 में से 10 जिलों में 51 शहरी स्थानीय निकायों (ULB) — जिनमें चार नगर निगम शामिल हैं — के लिए मतदान हुआ। समग्र मतदान प्रतिशत 69.16% रहा। हमीरपुर जिले में सर्वाधिक लगभग 78% और सोलन जिले में न्यूनतम 64% मतदान दर्ज किया गया।
25 नगर परिषदों और 22 नगर पंचायतों के परिणाम घोषित हुए, जो पार्टी चिह्नों पर नहीं लड़े गए थे। भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने 20 नगर निकायों में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार 17 में विजयी रहे और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 5 सीटें जीतीं। 5 सीटों पर स्थिति अभी अनिश्चित बनी हुई है।
कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस ने भाजपा के दावों को खारिज करते हुए अपना अलग आँकड़ा पेश किया। कांग्रेस संगठन सचिव विनोद जिंटा ने दावा किया कि पार्टी समर्थित उम्मीदवारों ने 47 नगर परिषदों और नगर पंचायतों में से 31 में जीत हासिल की है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा और चंबा जिलों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया, और शिमला व सिरमौर जिलों में भी भाजपा से अधिक सीटें जीती हैं।
ठाकुर का सुक्खू पर हमला
ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुक्खू पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्हें संभावित चुनाव परिणामों की पूर्व जानकारी थी, इसीलिए वे मतदान प्रक्रिया से दूर रहे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के अपने मंत्री भी उन पर भरोसा नहीं करते और परिणामों से विचलित होकर वे अब अन्य नेताओं की शैली में बयानबाज़ी कर रहे हैं। ठाकुर ने कहा, 'जनता ने मुख्यमंत्री की झूठ, छल और दुष्प्रचार की राजनीति को पूरी तरह खारिज कर दिया है।'
आगे क्या होगा
चार प्रमुख नगर निगमों — धर्मशाला, पालमपुर, मंडी और सोलन — के चुनाव परिणाम 31 मई को घोषित किए जाएंगे। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका निर्णायक हो सकती है, जिससे दोनों प्रमुख दलों की रणनीति पर असर पड़ेगा। यह ऐसे समय में आया है जब हिमाचल प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में शुरू हो चुकी हैं।