जयराम ठाकुर का बयान: हिमाचल भवन और सदन को षड्यंत्र का अड्डा नहीं बनने दें
सारांश
Key Takeaways
- जयराम ठाकुर ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
- उन्होंने हिमाचल भवन की प्रतिष्ठा की रक्षा की आवश्यकता बताई।
- कांग्रेस की कैबिनेट ने आर्थिक मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया।
- केंद्र सरकार का सहयोग हिमाचल के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
शिमला, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने नई दिल्ली में आयोजित एआई इंपैक्ट समिट में यूथ कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेताओं का मानसिक संतुलन हार के कारण बिगड़ गया है। नरेंद्र मोदी का विरोध, भारतीय जनता पार्टी का विरोध अलग है और देश का विरोध अलग।
उन्होंने कहा कि एआई इंपैक्ट समिट पर केवल देश नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नजर थी। 20 से अधिक बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रमुख टेक कंपनियों के CEO वहाँ उपस्थित थे। वहाँ शर्टलेस प्रदर्शन कांग्रेस की वास्तविकता उजागर करता है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। हिमाचल भवन और सदन हमारी पहचान और प्रतिष्ठा के प्रतीक हैं। हम इन्हें षड्यंत्र का अड्डा नहीं बनने देंगे।
जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल के आर्थिक हालात को लेकर पूरी कैबिनेट, मुख्यमंत्री समेत, दिल्ली गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि ना तो कोई प्रधानमंत्री से मिला और न ही वित्त मंत्री से। कांग्रेस की पूरी कैबिनेट अपने नेताओं से मिलने में व्यस्त रही।
उन्होंने कहा कि हिमाचल को मदद केवल केंद्र सरकार से मिलेगी, लेकिन उनसे मिलने की कोशिश किसी ने नहीं की। सुक्खू सरकार का रवैया दर्शाता है कि सभी केवल राजनीति करना चाहते हैं, न कि हिमाचल के हितों की चिंता।
इससे पहले, जयराम ठाकुर ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उन्होंने हिमाचल प्रदेश की वर्तमान आर्थिक स्थिति पर विस्तृत चर्चा की और विभिन्न वित्तीय मुद्दों को प्रस्तुत किया। जयराम ठाकुर ने केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश को दिए जा रहे सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले हिमाचल प्रदेश के संतुलित और सतत विकास के लिए केंद्र का सहयोग बहुत महत्वपूर्ण है। बैठक में उन्होंने प्रदेश की वित्तीय मजबूती, आधारभूत संरचना के विकास, आपदा राहत और विकासात्मक परियोजनाओं के लिए अधिकतम वित्तीय सहायता की मांग की।