28 जून 2026
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जयराम ठाकुर का आरोप: हिमाचल सरकार पंचायत चुनाव नतीजों में हेरफेर को सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है

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जयराम ठाकुर का आरोप: हिमाचल सरकार पंचायत चुनाव नतीजों में हेरफेर को सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है

सारांश

हिमाचल विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर पंचायत और शहरी निकाय चुनावों के बाद चेयरमैन-वाइस चेयरमैन के चुनाव टालकर जनादेश पलटने का आरोप लगाया है। भाजपा के दावे के अनुसार उसने 70% पंचायत पद जीते, फिर भी 12 में से 9 जिला परिषदों में चुनाव अभी बाकी हैं।

मुख्य बातें

विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने 27 जून 2026 को शिमला में कांग्रेस सरकार पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
भाजपा के दावे के अनुसार उसके समर्थित उम्मीदवारों ने पंचायत प्रधान और उप-प्रधान के लगभग 70% पदों पर जीत हासिल की।
धर्मशाला नगर निगम में भाजपा ने 17 में से 11 सीटें जीतीं।
12 जिला परिषदों में से केवल 3 में चेयरमैन-वाइस चेयरमैन चुनाव पूरे हुए; 92 BDC में से केवल 47 में नेतृत्व चुनाव संपन्न।
ठाकुर ने चुनाव पूर्व सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप और सुजानपुर में कथित मतदान अनियमितताओं का भी उल्लेख किया।
भाजपा ने कथित रूप से दबाव में काम कर रहे अधिकारियों की सूची तैयार करने और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने 27 जून 2026 को शिमला में पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस के नेतृत्व वाली मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि राज्य सरकार पंचायती राज और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों को पलटने के लिए प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है, जिससे लोकतंत्र की जड़ें कमज़ोर हो रही हैं।

मुख्य आरोप: चुनाव टालने की कथित रणनीति

ठाकुर ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने शुरुआत में डिजास्टर एक्ट लागू कर, चुनाव नियमों में बदलाव कर और प्रक्रियागत अड़चनें खड़ी करके स्थानीय निकाय चुनावों को टालने की कोशिश की। उनके अनुसार, हाई कोर्ट और बाद में सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद ही न्यायालय द्वारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर चुनाव संपन्न हो सके। गौरतलब है कि चुनाव कराने में न्यायपालिका का दखल देना ही यह दर्शाता है कि विवाद किस हद तक गहरा था।

भाजपा के दावे: जनादेश उनके पक्ष में

ठाकुर ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) समर्थित उम्मीदवारों ने पंचायत प्रधान और उप-प्रधान के लगभग 70 प्रतिशत पदों पर जीत हासिल की है। शहरी मोर्चे पर उन्होंने कहा कि धर्मशाला नगर निगम में भाजपा ने 17 में से 11 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया। उन्होंने यह भी बताया कि 92 ब्लॉक विकास समितियों (BDC) में से केवल 47 में ही नेतृत्व पदों के लिए चुनाव पूरे हुए हैं, जिनमें भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने 31 और कांग्रेस ने 16 सीटें जीतीं।

जिला परिषद और चेयरमैन चुनाव पर विवाद

ठाकुर ने दावा किया कि 12 जिला परिषदों में से केवल 3 में ही चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन का चुनाव संपन्न हो सका है। उनके अनुसार इन तीनों स्थानों पर कांग्रेस कथित तौर पर अपना उम्मीदवार तक नहीं उतार पाई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जहाँ-जहाँ भाजपा के पास बहुमत है, वहाँ राज्य सरकार जानबूझकर चुनाव की तारीखें घोषित नहीं कर रही, ताकि हॉर्स-ट्रेडिंग को बढ़ावा मिल सके।

प्रशासनिक दबाव और डराने-धमकाने के आरोप

विपक्ष के नेता ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार विजिलेंस जाँच, झूठे मुकदमे, रिश्तेदारों के तबादले और प्रशासनिक दबाव के ज़रिए भाजपा समर्थित चुने हुए प्रतिनिधियों को डराने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सुजानपुर नगर परिषद में मतदान प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं का विशेष उल्लेख किया और कहा कि तय नियमों की अनदेखी की गई।

भाजपा की अगली रणनीति

ठाकुर ने घोषणा की कि भाजपा उन अधिकारियों की सूची तैयार कर रही है, जो पार्टी के अनुसार राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं — चाहे वह चुनाव में देरी के ज़रिए हो या भाजपा समर्थित प्रतिनिधियों को निशाना बनाकर। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी कार्रवाइयों को कानूनी तौर पर चुनौती दी जाएगी। उनका कहना है कि पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि मुख्यमंत्री सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार पर जनता का भरोसा काफी घट चुका है। अब देखना यह होगा कि सरकार इन आरोपों का जवाब देती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनकी असली कसौटी यह है कि क्या चेयरमैन-वाइस चेयरमैन चुनावों में देरी के पीछे कोई ठोस प्रशासनिक कारण है या यह जानबूझकर की गई रणनीति। सर्वोच्च न्यायालय को पहले ही एक बार दखल देना पड़ा — यह तथ्य अकेले ही सरकार के रवैये पर सवाल उठाता है। भाजपा के 70% जीत के दावे सत्यापन की माँग करते हैं, क्योंकि स्थानीय निकाय चुनावों में निर्दलीय और स्थानीय कारक अहम भूमिका निभाते हैं। असली लोकतांत्रिक परीक्षा तब होगी जब शेष 9 जिला परिषदों और 45 BDC में चुनाव की तारीखें घोषित होंगी — उनमें देरी या तेज़ी ही बताएगी कि आरोप में कितना दम है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयराम ठाकुर ने हिमाचल सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली हिमाचल सरकार पंचायती राज और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों में हेरफेर करने के लिए प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है। उनके अनुसार सरकार जानबूझकर चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन के चुनाव टाल रही है ताकि हॉर्स-ट्रेडिंग को बढ़ावा मिल सके।
हिमाचल प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन कैसा रहा?
भाजपा के दावे के अनुसार उसके समर्थित उम्मीदवारों ने पंचायत प्रधान और उप-प्रधान के लगभग 70% पदों पर जीत हासिल की। धर्मशाला नगर निगम में भाजपा ने 17 में से 11 सीटें जीतीं और 47 में से 31 BDC में भी उसके समर्थित उम्मीदवार विजयी रहे।
सर्वोच्च न्यायालय का इन चुनावों में क्या भूमिका रही?
ठाकुर के अनुसार राज्य सरकार ने डिजास्टर एक्ट और नियमों में बदलाव कर चुनाव टालने की कोशिश की, जिसके बाद पहले हाई कोर्ट और फिर सर्वोच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा। न्यायालय द्वारा तय समय-सीमा के भीतर ही चुनाव संपन्न हो सके।
जिला परिषद चेयरमैन चुनाव की स्थिति क्या है?
ठाकुर के अनुसार 12 जिला परिषदों में से केवल 3 में चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन का चुनाव पूरा हुआ है, और इन तीनों स्थानों पर कांग्रेस कथित तौर पर उम्मीदवार भी नहीं उतार पाई। शेष 9 जिला परिषदों में अभी तक चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं हुआ है।
भाजपा आगे क्या कदम उठाने की योजना बना रही है?
भाजपा उन अधिकारियों की सूची तैयार कर रही है जो कथित रूप से राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं। ठाकुर ने चेतावनी दी है कि इन कार्रवाइयों को कानूनी रूप से चुनौती दी जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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