बांसवाड़ा निकाय चुनाव: बीएपी ने पहली बार 20 वार्डों में उतारे उम्मीदवार, राजस्थान में राजनीतिक सरगर्मी तेज
सारांश
मुख्य बातें
भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) ने बांसवाड़ा नगर परिषद के 60 में से 20 वार्डों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है — यह आदिवासी बहुल इस क्षेत्र के निकाय चुनावों में पार्टी की पहली औपचारिक भागीदारी है। 31 अगस्त 2026 को नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन राजस्थान भर में प्रमुख दलों ने उम्मीदवारों की सूचियाँ जारी कर राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया।
मुख्य घटनाक्रम
नामांकन की अंतिम तिथि पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों ने कई नगर परिषदों के लिए पार्षद उम्मीदवारों की पहली सूचियाँ सार्वजनिक कीं। नागौर नगर परिषद में कांग्रेस ने 60 में से 49 वार्डों के लिए नाम घोषित किए, जबकि BJP ने 46 वार्डों के लिए उम्मीदवार उतारे। दौसा नगर परिषद के लिए भी दोनों प्रमुख दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी।
नागौर में चाचा-भतीजे का सियासी टकराव
नागौर में कांग्रेस ने वार्ड नंबर 10 से नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष मांगीलाल भाटी को टिकट देने से इनकार कर दिया। उनकी जगह पार्टी ने पूर्व अध्यक्ष कृपाराम सोलंकी के बेटे और भाटी के भतीजे प्रवीण सोलंकी को प्रत्याशी बनाया है। इस निर्णय से उसी वार्ड में चाचा-भतीजे के बीच सीधे मुकाबले की स्थिति बन गई है, जो एक नया राजनीतिक विवाद बन गया है।
ब्यावर और सलूंबर में BJP की सूची
BJP ने ब्यावर नगर परिषद के 60 में से 57 वार्डों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है। वार्ड नंबर 22, 32 और 59 के लिए नाम अभी घोषित होने बाकी हैं। इसके अलावा पार्टी ने ब्यावर जिले की चार नगर पालिकाओं और सलूंबर नगर परिषद के सभी 25 वार्डों के लिए भी उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है।
टिकट न मिलने से बागी तेवर
सलूंबर में पूर्व पार्षद और विपक्ष के पूर्व नेता प्रभुलाल जैन ने वार्ड नंबर 2 से BJP का टिकट माँगा था, लेकिन पार्टी ने उदयपुर ग्रामीण जिला इकाई के सचिव करण सिंह पंवार को प्रत्याशी बनाया। इसी तरह शहर इकाई की कार्यकारी समिति के सदस्य महेश गर्ग को वार्ड नंबर 13 से टिकट नहीं मिला — उनकी जगह नरेश वैष्णव को उम्मीदवार बनाया गया। टिकट से वंचित गर्ग ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया है।
BJP ने वार्ड नंबर 19 से नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष नंदलाल सुथार की बहू चंदा सुथार को मैदान में उतारा है, जबकि उदयपुर ग्रामीण के पूर्व उपाध्यक्ष कैलाश गांधी को वार्ड नंबर 8 से प्रत्याशी बनाया गया है।
आगे क्या होगा
उम्मीदवारों की सूचियाँ सामने आने के बाद पूरे राजस्थान में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। टिकट के कई दावेदार अब यह तय करने में जुटे हैं कि वे अपनी पार्टी के साथ बने रहें या निर्दलीय चुनाव लड़ें। बीएपी की बांसवाड़ा में पहली दावेदारी यह भी संकेत देती है कि आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय निकाय राजनीति अब बहुकोणीय होती जा रही है।