दिल्ली में जलभराव हॉटस्पॉट 194 से घटकर 34: डीडीएमए बैठक में एलजी संधू और CM रेखा गुप्ता का एक्शन मोड
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने सोमवार, 20 जुलाई 2026 को मानसून तैयारियों की व्यापक समीक्षा बैठक आयोजित की, जिसमें सामने आया कि राजधानी में जलभराव के हॉटस्पॉट 2024 के 194 से घटकर 2026 में मात्र 34 रह गए हैं। बैठक की संयुक्त अध्यक्षता उपराज्यपाल टी.एस. संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने की तथा सभी संबंधित विभागों को पूर्ण सतर्कता बनाए रखने के कड़े निर्देश दिए गए।
मुख्य घटनाक्रम
बैठक में मंत्री प्रवेश वर्मा और आशीष सूद, मुख्य सचिव, विशेष पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक), अतिरिक्त मुख्य सचिव (सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण), एमसीडी आयुक्त, डीडीए उपाध्यक्ष, मंडलायुक्त तथा पीडब्ल्यूडी, परिवहन, गृह, अग्निशमन और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में भारी बारिश से निपटने की तैयारियों, शहरी बाढ़ रोकथाम योजना और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के गठन की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री दोनों ने स्वीकार किया कि 2024 और 2025 की तुलना में इस वर्ष जलभराव की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
जलभराव हॉटस्पॉट में गिरावट के आँकड़े
बैठक में प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, राजधानी में जलभराव वाले स्थानों की संख्या 2024 में 194 थी, जो 2025 में घटकर 169 रह गई। 2026 में यह संख्या उल्लेखनीय रूप से घटकर केवल 34 रह गई है। अधिकारियों ने बताया कि 2025 से 2026 के बीच केवल आठ स्थान ऐसे रहे जहाँ जलभराव की समस्या लगातार बनी रही।
यह ऐसे समय में आया है जब मौसम विभाग ने अचानक भारी बारिश की संभावना जताई है। गौरतलब है कि दिल्ली में हर मानसून सीजन में जलभराव एक बड़ी शहरी चुनौती रही है, और यह पहली बार है जब हॉटस्पॉट की संख्या इतनी तेज़ी से घटी है।
डी-सिल्टिंग और बुनियादी ढाँचे की प्रगति
समीक्षा के दौरान बताया गया कि एमसीडी, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, एनडीएमसी और डीडीए ने नालों की डी-सिल्टिंग का लक्ष्य पूरी तरह हासिल कर लिया है। पीडब्ल्यूडी ने लगभग 95 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया है।
दिल्ली जल बोर्ड ने ट्रंक सीवर लाइनों का 85.5 प्रतिशत, पेरिफेरल सीवर लाइनों का 91.1 प्रतिशत और ब्रांच सीवर लाइनों का 90.16 प्रतिशत डी-सिल्टिंग कार्य पूरा कर लिया है। यह आँकड़े पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर क्रियान्वयन की ओर संकेत करते हैं।
एलजी और सीएम के कड़े निर्देश
उपराज्यपाल टी.एस. संधू ने स्पष्ट कहा कि जलभराव और शहरी बाढ़ जैसी समस्याओं को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि कहीं भी तैयारी में कमी पाई गई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने दीर्घकालिक समाधान के लिए ड्रेनेज मास्टर प्लान को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी ज़ोर दिया।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने निर्देश दिए कि निकाली गई गाद को तुरंत हटाया जाए और कोई भी नाला, सीवर लाइन या मैनहोल खुला न छोड़ा जाए। ऐसी लापरवाही से होने वाली दुर्घटनाओं के प्रति सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति रहेगी। तूफान के दौरान गिरने वाले खतरनाक पेड़ों की पहले से पहचान कर उन्हें हटाने पर भी ज़ोर दिया गया।
आगे की रणनीति
बैठक के समापन में दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी विभागों को मोबाइल हैवी-ड्यूटी पंप हर समय तैयार रखने, जलभराव की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करने, जमीनी स्तर पर निरंतर निगरानी रखने और पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। एसडीआरएफ को शीघ्र पूरी क्षमता के साथ सक्रिय करने पर भी विशेष बल दिया गया। अब देखना यह होगा कि मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी के बीच ये तैयारियाँ ज़मीन पर कितनी कारगर साबित होती हैं।