उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने DDA के साथ यमुना रिवरफ्रंट व जलभराव तैयारियों की समीक्षा की
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने 12 जून 2026 को यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में यमुना रिवरफ्रंट विकास, जल निकायों के पुनरुद्धार, मानसून-पूर्व जलभराव प्रबंधन और राजधानी के प्रमुख सामाजिक-आर्थिक बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं पर 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' की विस्तृत समीक्षा की गई।
यमुना रिवरफ्रंट और घाट पुनरुद्धार
बैठक में यमुना बाज़ार और उससे सटे घाटों के व्यापक सौंदर्यीकरण एवं पुनरुद्धार की योजना पर विशेष ध्यान दिया गया। उपराज्यपाल संधू ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक टिकाऊ और विश्वस्तरीय राजधानी के विज़न के अनुरूप है। रिवरफ्रंट विकास को सार्वजनिक उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक पहचान — तीनों आयामों से तैयार किया जा रहा है।
101 जल निकायों का जीर्णोद्धार
समीक्षा बैठक में फेज-1 के अंतर्गत 101 जल निकायों के निर्धारित समयसीमा में पुनरुद्धार की प्रगति का जायजा लिया गया। इनमें द्वारका और रोहिणी के प्रमुख जलाशय शामिल हैं। इसके साथ ही अस्पताल, स्वास्थ्य सेवा, लक्जरी रिटेल और लॉजिस्टिक्स हब जैसे बड़े बुनियादी ढाँचा प्रोजेक्ट्स की प्रगति की भी बारीकी से समीक्षा की गई।
मानसून-पूर्व जलभराव प्रबंधन
मानसून से पहले तैयारी सुनिश्चित करने के लिए 'डीसिल्टिंग एक्शन प्लान 2026' की स्थिति की सघन निगरानी की गई। अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली के संवेदनशील जलभराव क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जा रहा है। 15 जून की समयसीमा से पहले केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष की तैयारियों का भी मूल्यांकन किया गया।
रेनवाटर हार्वेस्टिंग का निरीक्षण
बैठक से पूर्व उपराज्यपाल संधू ने यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में स्थापित ऑन-साइट रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली दिल्ली के नागरिक बुनियादी ढाँचे में टिकाऊ भूजल पुनर्भरण के लिए एक प्रतिकृति-योग्य मॉडल के रूप में उभरी है। उनके अनुसार, पर्यावरण की दृष्टि से सशक्त राजधानी बनाने के लिए ऐसे जल-संरक्षण उपायों का विस्तार अनिवार्य है।
आगे की राह
उपराज्यपाल ने सभी परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर बल दिया और DDA अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मानसून से पहले जलभराव-रोधी उपाय पूरे किए जाएँ। विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना रिवरफ्रंट और जल निकाय पुनरुद्धार परियोजनाओं की सफलता दिल्ली की दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता के लिए निर्णायक होगी।