यमुना पुनर्जीवन को गति: दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने ₹1,000 करोड़ की जल परियोजनाओं को दी मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 24 मई 2026 को यमुना नदी के पुनर्जीवन, नजफगढ़ ड्रेन की सफाई और राजधानी की जलापूर्ति व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए ₹1,000 करोड़ से अधिक की कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को मंजूरी दी। इन परियोजनाओं से 7 लाख से अधिक दिल्लीवासियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।
नजफगढ़ में 12 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
सबसे बड़ा निर्णय नजफगढ़ क्षेत्र में 12 डिसेंट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (डीएसटीपी) स्थापित करने का है। इन प्लांटों की कुल लागत करीब ₹860 करोड़ होगी और इनकी सम्मिलित क्षमता 46.5 एमजीडी होगी। इन्हें केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत विकसित किया जाएगा।
इनमें मित्राऊं में 17 एमजीडी क्षमता का सबसे बड़ा डीएसटीपी बनाया जाएगा। इसके अलावा कैर, कांगनहेड़ी, ककरोला और दिचाऊं कलां में 4, गालिबपुर, सारंगपुर और शिकारपुर में 3, तथा हसनपुर, जाफरपुर, काजीपुर और खेड़ा डाबर में 4 डीएसटीपी स्थापित होंगे। इन प्लांटों से 121 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियों और 35 गांवों का अनुपचारित सीवेज नजफगढ़ ड्रेन में जाने से रुकेगा — जो यमुना प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत माना जाता है।
केशोपुर एसटीपी का उन्नयन और क्षमता विस्तार
केशोपुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के पहले चरण का अपग्रेडेशन भी इस पैकेज में शामिल है। करीब ₹122 करोड़ की इस परियोजना के तहत प्लांट की क्षमता 12 एमजीडी से बढ़ाकर 18 एमजीडी की जाएगी। उपचारित जल को नवीनतम गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बनाया जाएगा और परियोजना में 11 वर्षों तक संचालन व रखरखाव (ओएंडएम) की व्यवस्था भी शामिल होगी। इससे रिसाइकल्ड पानी के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
बुनियादी ढांचे की मरम्मत और जलापूर्ति सुदृढ़ीकरण
त्रिलोकपुरी विधानसभा क्षेत्र में अमीचंद चौक से पुराना कल्याणपुरी सीवेज पंपिंग स्टेशन तक की ट्रंक सीवर लाइन का पुनर्वास किया जाएगा। 40 वर्ष से अधिक पुरानी इस लाइन में पिछले कुछ वर्षों में कई बार धंसाव और तकनीकी खामियाँ सामने आ चुकी हैं। इस परियोजना पर करीब ₹57 करोड़ खर्च होंगे।
वहीं शाहदरा विधानसभा क्षेत्र के रोहतास नगर में 0.72 एमजीडी क्षमता का नया अंडरग्राउंड रिजर्वायर (यूजीआर) और बूस्टर पंपिंग स्टेशन स्थापित किया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत ₹27 करोड़ है।
वर्षा जल संचयन और भूजल संरक्षण
भूजल स्तर में गिरावट को देखते हुए सरकार ने दिल्ली जल बोर्ड को विभिन्न विभागों की ओर से नए वर्षा जल संचयन ढांचों के निर्माण और पुराने ढांचों के पुनर्स्थापन का कार्य सौंपा है। इस पहल को लागू करने के लिए 4 ग्राउंड वाटर एक्सपर्ट्स और 10 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सोशल मोबिलाइजर्स की नियुक्ति भी की जाएगी।
मुख्यमंत्री का बयान और आगे की राह
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता दिल्ली को एक स्वच्छ, हरित और जल-सुरक्षित राजधानी बनाना है। उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों, अभियंताओं और फील्ड स्टाफ को इन परियोजनाओं के लिए बधाई दी। गौरतलब है कि यमुना को प्रदूषण-मुक्त करना दिल्ली की राजनीति में वर्षों से एक केंद्रीय मुद्दा रहा है और यह ऐसे समय में आया है जब राजधानी में गर्मियों के दौरान जल संकट की स्थिति गंभीर बनी रहती है। इन परियोजनाओं के पूरा होने की समयसीमा और क्रियान्वयन की प्रगति आने वाले महीनों में सरकार की असली परीक्षा होगी।