क्या यमुना फिर से दिल्ली की जीवनरेखा बनेगी? एक्शन मोड में रेखा सरकार
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यमुना को पुनः स्वच्छ और प्रवाहमान बनाने के लिए ठोस एक्शन प्लान लागू करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ये आदेश मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दिए। इस बैठक में यमुना की वर्तमान स्थिति, सीवेज ट्रीटमेंट, नालों की सफाई और अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर लाइन बिछाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि यमुना केवल एक नदी नहीं है, बल्कि दिल्ली की जीवनरेखा है। सरकार वैज्ञानिक योजना, निश्चित समय-सीमा और पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर इसे पुनः साफ और जीवंत बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। बैठक में सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह सहित दिल्ली जल बोर्ड, पीडब्ल्यूडी, दिल्ली नगर निगम, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, डीडीए और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में वर्तमान में 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) मिलकर रोजाना 814 मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) गंदा पानी साफ कर रहे हैं। लेकिन भविष्य की आवश्यकताओं के मद्देनजर, सरकार ने इस क्षमता को बढ़ाकर 1500 एमजीडी करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए पुरानी मशीनों को सुधारकर दिसंबर 2027 तक 56 एमजीडी और 35 नए छोटे डिसेन्ट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (डीएसटीपी) लगाकर 170 एमजीडी अतिरिक्त क्षमता बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही, नालों के पास नए बड़े प्लांट लगाकर दिसंबर 2028 तक 460 एमजीडी क्षमता और जोड़ी जाएगी, ताकि दिल्ली के सीवेज प्रबंधन को पूरी तरह व्यवस्थित किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि इससे सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि बिना साफ किया गया गंदा पानी अब यमुना में नहीं जाएगा। जैसे-जैसे सीवेज ट्रीटमेंट की क्षमता बढ़ेगी, शहर का अधिकतर गंदा पानी पहले साफ होगा और फिर नदी में छोड़ा जाएगा। इससे यमुना का पानी धीरे-धीरे साफ होगा, बदबू और प्रदूषण कम होगा और नदी में दोबारा जीवन लौटेगा। लंबे समय में इससे पीने के पानी के स्रोत सुरक्षित होंगे, शहर की सेहत सुधरेगी और दिल्ली को भविष्य की बढ़ती जनसंख्या के लिए बेहतर और टिकाऊ सीवेज व्यवस्था मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अनधिकृत कॉलोनियों और जेजे क्लस्टर्स में सीवर लाइन बिछाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। 675 जेजे क्लस्टर्स में से 574 में कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 65 क्लस्टर्स में सीवेज इकट्ठा करने के लिए सिंगल पॉइंट कलेक्शन की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा, 1799 अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर नेटवर्क का काम दिसंबर 2026 से दिसंबर 2028 तक चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। इससे गंदा पानी बिना साफ हुए यमुना में जाने से रुकेगा। मुख्यमंत्री का मानना है कि जब तक दिल्ली के प्रत्येक घर का कनेक्शन सीवर लाइन से नहीं होगा, तब तक गंदा पानी यमुना में गिरना बंद नहीं होगा और नदी पूरी तरह साफ नहीं हो पाएगी।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि अब दिल्ली के नालों की निगरानी के लिए पहली बार एक प्रभावी सिस्टम बनाया गया है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की टीमें 47 निर्धारित स्थानों पर हर महीने पानी की जांच कर रही हैं। नजफगढ़ और शाहदरा नालों से जुड़े सभी छोटे नालों की पहचान और जांच ड्रोन सर्वे के माध्यम से जनवरी 2026 तक पूरी कर ली जाएगी, जबकि बाकी नालों का सर्वे दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) जून 2026 तक पूरा करेगा। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह जानना है कि कहां से और कितना प्रदूषण नदी में मिल रहा है ताकि उसे रोका जा सके।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यमुना को निर्मल करने के लिए पड़ोसी राज्यों से भी समन्वय बनाना होगा। बैठक में बताया गया कि नजफगढ़ ड्रेन में हरियाणा राज्य के छह नाले मिलते हैं, जो कुल दूषित पानी का 33 प्रतिशत हैं। इसके साथ ही, शाहदरा ड्रेन में उत्तर प्रदेश के चार बड़े नाले गिरते हैं, जो कुल दूषित पानी का लगभग 40 प्रतिशत हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विषय पर वह दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से समाधान पर चर्चा करेंगी।
मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि वर्ष 2028 तक यमुना पुनर्जीवन मिशन के अंतर्गत दिल्ली में सभी प्रमुख नालों और सीवर से जुड़े कार्य पूर्ण कर लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व और निगरानी में दिल्ली सरकार और एमसीडी के सभी संबंधित विभाग एकीकृत, समयबद्ध कार्ययोजना के तहत कार्य कर रहे हैं। डीडीए भूमि सहित पूरे शहर में सीवर नेटवर्क के विस्तार का कार्य पूर्ण समन्वय के साथ तेजी से प्रगति पर है।