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अमित शाह की यमुना पुनरुद्धार समीक्षा बैठक: MCD-NDDB MOU, हर 20 दिन में होगी प्रगति जाँच

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अमित शाह की यमुना पुनरुद्धार समीक्षा बैठक: MCD-NDDB MOU, हर 20 दिन में होगी प्रगति जाँच

सारांश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यमुना सफाई पर उच्चस्तरीय बैठक की — MCD-NDDB MOU, हर 20 दिन में समीक्षा और 14 जून को 'यमुना रिवरफ्रंट सफाई अभियान 2026' की शुरुआत। दशकों पुरानी समस्या पर इस बार केंद्र की सीधी निगरानी।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह ने 8 जून 2026 को यमुना पुनरुद्धार पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
MCD और NDDB के बीच एमओयू साइन होगा — डेयरी व गौशाला का गोबर सीधे गोबर गैस और खाद संयंत्र तक पहुँचेगा।
यमुना परियोजना की प्रगति की समीक्षा हर 20 दिन में होगी।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता 14 जून 2026 को 'यमुना रिवरफ्रंट सफाई अभियान 2026' की शुरुआत करेंगी।
अभियान में लगभग 500 संगठनों और हजारों स्वयंसेवकों के शामिल होने की उम्मीद।
दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों को एकीकृत कार्य योजना के तहत काम करने का निर्देश।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार, 8 जून 2026 को नई दिल्ली में यमुना नदी के पुनरुद्धार पर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में केंद्र और दिल्ली सरकार के शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी में यमुना की सफाई के लिए एकीकृत कार्य योजना पर विस्तृत चर्चा हुई। शाह ने स्पष्ट किया कि अब टुकड़ों में नहीं, बल्कि एक टीम भावना से काम होना चाहिए।

बैठक में कौन-कौन शामिल रहे

इस समीक्षा बैठक में केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, प्रवेश वर्मा और कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह बैठक इस मायने में महत्त्वपूर्ण है कि इसमें दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश — तीनों राज्यों से जुड़े हितधारकों को एक मंच पर लाने की कोशिश की गई।

अमित शाह के मुख्य निर्देश

बैठक में अमित शाह ने कहा कि साफ और स्वच्छ यमुना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का संकल्प है, और इसे जल्द-से-जल्द पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों तथा सभी संबंधित मंत्रालयों को निर्देश दिया कि वे एकीकृत कार्य योजना के तहत काम करें।

शाह ने यमुना नदी की डीसिल्टिंग (गाद हटाने) को प्राथमिकता देने और उस गाद का उपयोग विभिन्न विनिर्माण परियोजनाओं में करने पर जोर दिया, ताकि बारिश के मौसम में यह गाद दोबारा नदी में न बह जाए। साथ ही उन्होंने एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट), औद्योगिक कचरे और सभी नालों के डिस्चार्ज की कड़ी निगरानी का आदेश दिया। उनके शब्दों में — 'सिर्फ संतोषजनक काम नहीं, बल्कि सटीक परिणाम आने चाहिए।'

यमुना पुनरुद्धार परियोजना की प्रगति की समीक्षा हर 20 दिन में की जाएगी — यह निर्देश शाह ने बैठक में दिया।

MCD-NDDB MOU और डेयरी वेस्ट प्रबंधन

बैठक का एक अहम फैसला यह रहा कि दिल्ली की डेयरियों के कचरे को यमुना में जाने से रोकने के लिए एमसीडी (दिल्ली नगर निगम) और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) के बीच एक एमओयू (समझौता ज्ञापन) साइन किया जाएगा। इस समझौते के तहत डेयरियों और गौशालाओं का गोबर सीधे गैस और खाद संयंत्रों तक पहुँचेगा, जहाँ इसे गोबर गैस और जैविक खाद में तब्दील किया जाएगा।

गौरतलब है कि दिल्ली में बड़ी संख्या में डेयरियाँ और गौशालाएँ हैं, जिनका अनुपचारित कचरा यमुना प्रदूषण का एक प्रमुख कारण रहा है। एनडीडीबी मॉडल के तहत यमुना किनारे के कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन भी सुनिश्चित किया जाएगा।

दिल्ली सरकार का 'यमुना रिवरफ्रंट सफाई अभियान 2026'

बैठक के समानांतर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि वे 14 जून 2026 को सरकार के 'यमुना रिवरफ्रंट सफाई अभियान 2026' की औपचारिक शुरुआत करेंगी। इस अभियान का उद्देश्य यमुना की खोई हुई पहचान को पुनः स्थापित करना, नदी के घाटों की सफाई करना और नागरिकों में जागरूकता फैलाना है।

इस अभियान में लगभग 500 सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और स्वयंसेवी संगठनों के साथ-साथ हजारों स्वयंसेवकों के शामिल होने की उम्मीद है। 14 जून को यमुना के प्रमुख घाटों पर एक साथ सफाई और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा, 'यमुना सिर्फ एक नदी नहीं है, बल्कि दिल्ली की सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यावरणीय विरासत का एक अहम हिस्सा है। इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं, हर नागरिक की है।'

आगे की राह

यमुना की सफाई दशकों से दिल्ली की राजनीति और पर्यावरण नीति का केंद्रीय मुद्दा रही है। अनेक योजनाओं और अदालती आदेशों के बावजूद नदी की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इस बार केंद्र सरकार की सीधी निगरानी, हर 20 दिन की समीक्षा प्रक्रिया और एमओयू जैसे संस्थागत कदम इसे पिछली कोशिशों से अलग बनाते हैं — हालाँकि जमीनी क्रियान्वयन ही असली कसौटी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नदी की स्थिति में ठोस सुधार नहीं आया। इस बार केंद्रीय गृह मंत्री की सीधी अध्यक्षता और 'हर 20 दिन में समीक्षा' का निर्देश संस्थागत जवाबदेही का संकेत देता है — पर असली परीक्षा MCD-NDDB MOU के क्रियान्वयन और एसटीपी निगरानी के ज़मीनी नतीजों से होगी। तीन राज्यों के बीच समन्वय की ऐतिहासिक विफलता को देखते हुए 'एकीकृत कार्य योजना' का आह्वान सही दिशा में है, लेकिन बिना बाध्यकारी समयसीमा और स्वतंत्र मापन ढाँचे के यह भी पिछली घोषणाओं की कतार में खड़ा हो सकता है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह की यमुना पुनरुद्धार बैठक में क्या फैसले हुए?
8 जून 2026 को हुई इस बैठक में MCD और NDDB के बीच MOU साइन करने, हर 20 दिन में परियोजना की समीक्षा करने और यमुना की डीसिल्टिंग को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया। एसटीपी, औद्योगिक कचरे और नालों के डिस्चार्ज की कड़ी निगरानी के भी निर्देश दिए गए।
MCD और NDDB के बीच MOU किस लिए साइन होगा?
यह MOU दिल्ली की डेयरियों और गौशालाओं के गोबर को यमुना में जाने से रोकने के लिए साइन होगा। NDDB मॉडल के तहत यह कचरा सीधे गोबर गैस और जैविक खाद संयंत्रों तक पहुँचाया जाएगा।
'यमुना रिवरफ्रंट सफाई अभियान 2026' क्या है और कब शुरू होगा?
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता 14 जून 2026 को इस अभियान की शुरुआत करेंगी। इसका उद्देश्य यमुना के घाटों की सफाई और नागरिक जागरूकता बढ़ाना है, जिसमें लगभग 500 संगठनों और हजारों स्वयंसेवकों के शामिल होने की उम्मीद है।
यमुना सफाई में दिल्ली के अलावा कौन-से राज्य शामिल हैं?
अमित शाह ने बैठक में दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश — तीनों राज्यों की सरकारों को एकीकृत कार्य योजना के तहत मिलकर काम करने का निर्देश दिया। यमुना इन तीनों राज्यों से होकर गुजरती है, इसलिए बहु-राज्यीय समन्वय आवश्यक है।
यमुना की सफाई के लिए प्रगति की निगरानी कैसे होगी?
गृह मंत्री अमित शाह ने निर्देश दिया है कि यमुना पुनरुद्धार परियोजना की कार्य प्रगति की समीक्षा हर 20 दिन में की जाए। साथ ही एसटीपी, औद्योगिक कचरे और नालों के डिस्चार्ज की निरंतर निगरानी का भी आदेश दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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