यमुना शुद्धिकरण: दिल्ली में 80 ट्रीटमेंट प्लांट्स पर काम शुरू, MCD-NDDB में CBG प्लांट्स के लिए MoU
सारांश
मुख्य बातें
गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में 15 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में दिल्ली नगर निगम (MCD) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के बीच दिल्ली में गोबर के समुचित उपयोग हेतु कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) प्लांट्स की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। शाह ने इस अवसर पर घोषणा की कि गटर के पानी और औद्योगिक कचरे के शुद्धिकरण के लिए दिल्ली में लगभग 80 ट्रीटमेंट प्लांट्स पर काम पहले से शुरू हो चुका है।
समझौते का स्वरूप और लक्ष्य
इस MoU के तहत दिल्ली में मवेशियों के गोबर को CBG उत्पादन के लिए उपयोग में लाया जाएगा। नांगली, घोघा-गोयला और गाजीपुर स्थित अपशिष्ट निस्तारण प्लांट्स से गोबर की प्रोसेसिंग का कार्य संचालित होगा। समझौते में पशुपालकों को प्रति किलो भुगतान का प्रावधान भी किया गया है, जिससे उनकी आय में सीधा इज़ाफ़ा होगा।
अमित शाह ने कहा कि यह पहल न केवल पशुपालकों की आय बढ़ाएगी, बल्कि स्वच्छता, CBG उत्पादन और जैविक खेती की दिशा में भी प्रेरणा का काम करेगी।
यमुना शुद्धिकरण से सीधा जुड़ाव
केंद्रीय गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सवा लाख मवेशियों के अपशिष्ट के निस्तारण के बिना यमुना की सफाई संभव नहीं। उन्होंने कहा, 'आने वाले समय में थोड़ा सा भी गोबर यमुना में न जा पाए, ऐसी व्यवस्था की जा रही है।' शाह ने यह भी घोषणा की कि दिसंबर 2028 तक एक भी लीटर गंदा पानी यमुना नदी में नहीं जाएगा।
गौरतलब है कि यमुना की सफाई दशकों से राजनीतिक वादों का हिस्सा रही है और यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यमुना शुद्धिकरण संकल्प की दिशा में एक ठोस प्रशासनिक कदम के रूप में प्रस्तुत किया गया।
समारोह में उपस्थित प्रमुख हस्तियाँ
इस अवसर पर केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ लल्लन सिंह, दिल्ली के उप-राज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय गृह सचिव और केंद्रीय सहकारिता सचिव सहित केंद्र व दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय मॉडल के रूप में प्रस्तुति
अमित शाह ने कहा कि यह समझौता देश के सभी बड़े शहरों को स्वच्छ बनाने के लिए एक मॉडल का काम करेगा। उनके अनुसार, यह पहल भविष्य में देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों के लिए भी गोबर प्रोसेसिंग के माध्यम से आय का स्रोत बन सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार शहरी स्वच्छता और नवीकरणीय ऊर्जा दोनों मोर्चों पर एकीकृत नीतियाँ बनाने पर ज़ोर दे रही है।