15 जुलाई 2026
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यमुना शुद्धिकरण: दिल्ली में 80 ट्रीटमेंट प्लांट्स पर काम शुरू, MCD-NDDB में CBG प्लांट्स के लिए MoU

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यमुना शुद्धिकरण: दिल्ली में 80 ट्रीटमेंट प्लांट्स पर काम शुरू, MCD-NDDB में CBG प्लांट्स के लिए MoU

सारांश

MCD और NDDB के बीच CBG प्लांट्स का MoU — यमुना सफाई की दिशा में यह केवल एक समझौता नहीं, बल्कि सवा लाख मवेशियों के अपशिष्ट प्रबंधन की रणनीति है। अमित शाह ने दिसंबर 2028 की डेडलाइन तय की और 80 ट्रीटमेंट प्लांट्स को ज़मीन पर उतारने का दावा किया।

मुख्य बातें

MCD और NDDB के बीच 15 जुलाई 2026 को CBG प्लांट्स की स्थापना के लिए MoU हस्ताक्षरित।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा — दिल्ली में गटर व औद्योगिक कचरे के लिए लगभग 80 ट्रीटमेंट प्लांट्स पर काम शुरू।
दिसंबर 2028 तक यमुना में एक भी लीटर गंदा पानी न जाए — शाह का लक्ष्य।
नांगली, घोघा-गोयला और गाजीपुर प्लांट्स से सवा लाख मवेशियों के गोबर की प्रोसेसिंग होगी।
पशुपालकों को प्रति किलो भुगतान का प्रावधान; आय वृद्धि और जैविक खेती को बढ़ावा।
इस मॉडल को देशभर के महानगरों और ग्रामीण क्षेत्रों में लागू करने की योजना।

गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में 15 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में दिल्ली नगर निगम (MCD) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के बीच दिल्ली में गोबर के समुचित उपयोग हेतु कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) प्लांट्स की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। शाह ने इस अवसर पर घोषणा की कि गटर के पानी और औद्योगिक कचरे के शुद्धिकरण के लिए दिल्ली में लगभग 80 ट्रीटमेंट प्लांट्स पर काम पहले से शुरू हो चुका है।

समझौते का स्वरूप और लक्ष्य

इस MoU के तहत दिल्ली में मवेशियों के गोबर को CBG उत्पादन के लिए उपयोग में लाया जाएगा। नांगली, घोघा-गोयला और गाजीपुर स्थित अपशिष्ट निस्तारण प्लांट्स से गोबर की प्रोसेसिंग का कार्य संचालित होगा। समझौते में पशुपालकों को प्रति किलो भुगतान का प्रावधान भी किया गया है, जिससे उनकी आय में सीधा इज़ाफ़ा होगा।

अमित शाह ने कहा कि यह पहल न केवल पशुपालकों की आय बढ़ाएगी, बल्कि स्वच्छता, CBG उत्पादन और जैविक खेती की दिशा में भी प्रेरणा का काम करेगी।

यमुना शुद्धिकरण से सीधा जुड़ाव

केंद्रीय गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सवा लाख मवेशियों के अपशिष्ट के निस्तारण के बिना यमुना की सफाई संभव नहीं। उन्होंने कहा, 'आने वाले समय में थोड़ा सा भी गोबर यमुना में न जा पाए, ऐसी व्यवस्था की जा रही है।' शाह ने यह भी घोषणा की कि दिसंबर 2028 तक एक भी लीटर गंदा पानी यमुना नदी में नहीं जाएगा।

गौरतलब है कि यमुना की सफाई दशकों से राजनीतिक वादों का हिस्सा रही है और यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यमुना शुद्धिकरण संकल्प की दिशा में एक ठोस प्रशासनिक कदम के रूप में प्रस्तुत किया गया।

समारोह में उपस्थित प्रमुख हस्तियाँ

इस अवसर पर केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ लल्लन सिंह, दिल्ली के उप-राज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय गृह सचिव और केंद्रीय सहकारिता सचिव सहित केंद्र व दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय मॉडल के रूप में प्रस्तुति

अमित शाह ने कहा कि यह समझौता देश के सभी बड़े शहरों को स्वच्छ बनाने के लिए एक मॉडल का काम करेगा। उनके अनुसार, यह पहल भविष्य में देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों के लिए भी गोबर प्रोसेसिंग के माध्यम से आय का स्रोत बन सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार शहरी स्वच्छता और नवीकरणीय ऊर्जा दोनों मोर्चों पर एकीकृत नीतियाँ बनाने पर ज़ोर दे रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दिल्ली की, और उससे पहले की भी। 80 ट्रीटमेंट प्लांट्स और दिसंबर 2028 की डेडलाइन महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि इन प्लांट्स की क्षमता उपयोग दर क्या होगी — दिल्ली में पहले से मौजूद कई STP अपनी पूरी क्षमता पर कभी नहीं चले। CBG मॉडल में पशुपालकों को प्रति किलो भुगतान का प्रावधान सराहनीय है, पर यह तभी टिकाऊ होगा जब गोबर संग्रह की लॉजिस्टिक्स चेन ज़मीन पर काम करे। यमुना में प्रदूषण का बड़ा हिस्सा अनुपचारित सीवेज से आता है — गोबर प्रबंधन एक ज़रूरी कड़ी है, लेकिन पूरा हल नहीं।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

MCD और NDDB के बीच हुए CBG MoU का मतलब क्या है?
दिल्ली नगर निगम (MCD) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) ने दिल्ली में मवेशियों के गोबर से कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) उत्पादन के लिए प्लांट्स स्थापित करने का समझौता किया है। इससे गोबर का वैज्ञानिक निस्तारण होगा और पशुपालकों को प्रति किलो आय भी मिलेगी।
दिल्ली में 80 ट्रीटमेंट प्लांट्स किसलिए बनाए जा रहे हैं?
ये प्लांट्स गटर के पानी और औद्योगिक कचरे के शुद्धिकरण के लिए हैं, ताकि यमुना नदी में प्रदूषित जल का प्रवाह रोका जा सके। गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार इन पर काम पहले से शुरू हो चुका है।
यमुना शुद्धिकरण की समय-सीमा क्या है?
गृह मंत्री अमित शाह ने दिसंबर 2028 की डेडलाइन तय की है, जिसके अनुसार तब तक एक भी लीटर गंदा पानी यमुना में नहीं जाएगा। इसके लिए सवा लाख मवेशियों के अपशिष्ट प्रबंधन को भी इस योजना से जोड़ा गया है।
गोबर प्रोसेसिंग के लिए कौन-से प्लांट्स काम करेंगे?
नांगली, घोघा-गोयला और गाजीपुर स्थित अपशिष्ट निस्तारण प्लांट्स से गोबर की प्रोसेसिंग की जाएगी। इन केंद्रों पर CBG उत्पादन के साथ-साथ जैविक खाद भी तैयार होगी।
इस योजना से पशुपालकों को क्या फायदा होगा?
समझौते में पशुपालकों को गोबर के बदले प्रति किलो भुगतान का प्रावधान है। अमित शाह के अनुसार यह मॉडल भविष्य में देशभर के ग्रामीण पशुपालकों की आय बढ़ाने में भी सहायक होगा।
राष्ट्र प्रेस
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