दिल्ली LG टीएस संधू ने भूपेंद्र यादव से की मुलाकात, वायु-जल प्रदूषण पर हुई अहम चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने मंगलवार, 26 मई को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की और राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते वायु एवं जल प्रदूषण से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। संधू ने इस बैठक की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की।
मुख्य घटनाक्रम
उपराज्यपाल संधू ने केंद्रीय मंत्री यादव के साथ हुई इस बैठक को दिल्ली की पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दिल्ली लगातार कई वर्षों से देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार रही है और केंद्र-राज्य समन्वय को लेकर चर्चाएँ तेज हैं।
हवाईअड्डों पर राइड-शेयरिंग की पहल
इससे पहले, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली के हवाईअड्डों पर राइड-शेयरिंग सेवा की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना है। गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार 'नवीन और टिकाऊ परिवहन समाधानों के माध्यम से एक स्वच्छ, हरित और स्मार्ट राजधानी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।' उन्होंने इस पहल को यातायात जाम घटाने, प्रदूषण नियंत्रण और नागरिकों को पर्यावरण-अनुकूल परिवहन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में 'एक महत्वपूर्ण कदम' बताया।
IIT कानपुर के साथ MOU पर हस्ताक्षर
दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग ने मुख्यमंत्री गुप्ता की उपस्थिति में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के ऐरावत अनुसंधान फाउंडेशन के साथ एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता अगले पाँच वर्षों तक लागू रहेगा और वायु प्रदूषण की चुनौती का वैज्ञानिक तरीके से समाधान करने पर केंद्रित है।
इस साझेदारी के तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), उन्नत डेटा विश्लेषण, स्थानीय निगरानी और वैज्ञानिक निर्णय-सहायता प्रणालियों का उपयोग कर राष्ट्रीय राजधानी की वायु गुणवत्ता प्रबंधन को मज़बूत किया जाएगा।
सरकार का दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि IIT कानपुर के साथ यह साझेदारी प्रदूषण के स्रोतों की 'अधिक सटीक पहचान, प्रदूषण हॉटस्पॉट की निगरानी, बेहतर पूर्वानुमान प्रणालियों और समय पर हस्तक्षेप सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।' गौरतलब है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए तकनीक-आधारित हस्तक्षेप की माँग लंबे समय से उठती रही है।
आगे की राह
केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच यह समन्वय पर्यावरण नीति के मोर्चे पर एक सकारात्मक संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI-आधारित वायु गुणवत्ता प्रबंधन और राइड-शेयरिंग जैसी पहलें तभी कारगर होंगी जब इन्हें दीर्घकालिक नीतिगत समर्थन और जवाबदेही तंत्र के साथ लागू किया जाए।