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दिल्ली में 72 घंटे पहले मिलेगा प्रदूषण अलर्ट, IIT कानपुर संग MOU से AI-आधारित निगरानी तंत्र

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दिल्ली में 72 घंटे पहले मिलेगा प्रदूषण अलर्ट, IIT कानपुर संग MOU से AI-आधारित निगरानी तंत्र

सारांश

दिल्ली सरकार ने IIT कानपुर की AIRWAT फाउंडेशन के साथ 5 वर्षीय MOU साइन किया है। AI और सैटेलाइट डेटा से लैस यह प्रणाली 72 घंटे पहले प्रदूषण अलर्ट देगी — जो राजधानी की प्रतिक्रियात्मक नीतियों से पूर्वानुमान-आधारित शासन की ओर एक बड़ा बदलाव है।

मुख्य बातें

दिल्ली सरकार और AIRWAT रिसर्च फाउंडेशन, IIT कानपुर के बीच 22 मई 2026 को 5 वर्षीय MOU हस्ताक्षरित।
AI-आधारित डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) से 48 से 72 घंटे पहले वायु गुणवत्ता का पूर्वानुमान मिलेगा।
कम लागत वाले सेंसर, मोबाइल मॉनिटरिंग लैब और सैटेलाइट डेटा से एकीकृत निगरानी नेटवर्क बनेगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने समझौते की अध्यक्षता की।
हाइपरलोकल विश्लेषण और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स से प्रदूषण हॉटस्पॉट की सटीक पहचान होगी।

दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग और एआईआरएडब्ल्यूएटी रिसर्च फाउंडेशन, आईआईटी कानपुर के बीच 22 मई 2026 को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए, जो राजधानी की वायु गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली को पूरी तरह बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुए इस समझौते के तहत 48 से 72 घंटे पहले वायु प्रदूषण का पूर्वानुमान देने में सक्षम AI-आधारित प्रणाली विकसित की जाएगी। यह MOU अगले पाँच वर्षों तक प्रभावी रहेगा।

समझौते में क्या शामिल है

इस MOU के अंतर्गत दिल्ली में कम लागत वाले सेंसर, मोबाइल मॉनिटरिंग लैब और सैटेलाइट डेटा पर आधारित एकीकृत वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इससे प्रदूषण की रियल-टाइम निगरानी और स्थानीय स्रोतों का सटीक विश्लेषण संभव हो सकेगा। परियोजना के तहत एक AI-आधारित डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) भी विकसित होगा, जो प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान, हाइपरलोकल विश्लेषण और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स में सहायक होगा।

मुख्यमंत्री और मंत्री की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह साझेदारी वायु प्रदूषण के स्रोतों की अधिक सटीक पहचान, हॉटस्पॉट्स की निगरानी, बेहतर पूर्वानुमान प्रणाली और समयबद्ध हस्तक्षेप सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन को आधुनिक बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

पर्यावरण मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दिल्ली को वायु प्रदूषण जैसी दीर्घकालिक चुनौती से निपटने के लिए तकनीक-आधारित, पारदर्शी और परिणामोन्मुख समाधानों की आवश्यकता है। उन्होंने इस MOU को 'स्मार्ट, वैज्ञानिक एवं उत्तरदायी पर्यावरणीय शासन' की दिशा में एक अहम पहल बताया।

तकनीकी क्षमताएँ और नवाचार

यह परियोजना AI, उन्नत डेटा विश्लेषण, हाइपरलोकल मॉनिटरिंग और वैज्ञानिक निर्णय सहायता प्रणालियों के समन्वित उपयोग पर आधारित होगी। गौरतलब है कि दिल्ली की वायु गुणवत्ता वर्षों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय रही है, और यह पहल उस पृष्ठभूमि में विशेष महत्व रखती है।

आम नागरिकों पर असर

72 घंटे पहले प्रदूषण अलर्ट मिलने से दिल्लीवासी — विशेषकर बुजुर्ग, बच्चे और श्वास संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोग — समय रहते सावधानी बरत सकेंगे। यह प्रणाली सरकार को आपातकालीन उपाय जैसे ऑड-ईवन या निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाने के निर्णय पहले से लेने में भी सक्षम बनाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली हर सर्दी में गंभीर वायु प्रदूषण संकट झेलती है और प्रतिक्रियात्मक नीतियों की बजाय पूर्वानुमान-आधारित रणनीतियों की माँग बढ़ रही है।

आगे की राह

IIT कानपुर की एआईआरएडब्ल्यूएटी फाउंडेशन के साथ यह पाँच वर्षीय साझेदारी दिल्ली के वायु गुणवत्ता प्रबंधन को अनुसंधान-आधारित ढाँचे से जोड़ती है। विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीकी क्षमता के साथ-साथ ज़मीनी क्रियान्वयन और अंतर-विभागीय समन्वय इस परियोजना की सफलता की असली कुंजी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दिल्ली का असली संकट डेटा की कमी नहीं, बल्कि डेटा पर त्वरित कार्रवाई की कमी रही है। SAFAR और CPCB जैसी प्रणालियाँ पहले से अलर्ट देती हैं, फिर भी आपातकालीन उपाय अक्सर देर से लागू होते हैं। इस MOU की असली परीक्षा यह होगी कि DSS का डेटा नीतिगत निर्णयों में कितनी तेज़ी से तब्दील होता है — और क्या पाँच वर्षों में परिणाम मापने का कोई पारदर्शी ढाँचा तय किया गया है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली सरकार और IIT कानपुर के बीच हुए MOU का उद्देश्य क्या है?
यह 5 वर्षीय समझौता दिल्ली में AI, हाइपरलोकल मॉनिटरिंग और सैटेलाइट डेटा के ज़रिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन को वैज्ञानिक आधार देने के लिए किया गया है। इसके तहत 48 से 72 घंटे पहले प्रदूषण अलर्ट देने में सक्षम प्रणाली विकसित होगी।
72 घंटे का प्रदूषण अलर्ट कैसे काम करेगा?
AI-आधारित डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स, सेंसर नेटवर्क और सैटेलाइट डेटा का विश्लेषण कर 48 से 72 घंटे पहले वायु गुणवत्ता का पूर्वानुमान देगा। इससे सरकार और नागरिक दोनों समय रहते तैयारी कर सकेंगे।
इस परियोजना से दिल्ली के नागरिकों को क्या फायदा होगा?
बुजुर्गों, बच्चों और श्वास रोगियों को पहले से अलर्ट मिलने से वे सावधानी बरत सकेंगे। सरकार को ऑड-ईवन या निर्माण रोक जैसे आपातकालीन उपाय पहले से लागू करने में भी मदद मिलेगी।
यह MOU कितने समय तक प्रभावी रहेगा और इसमें कौन शामिल है?
यह समझौता अगले 5 वर्षों तक प्रभावी रहेगा। इसमें दिल्ली सरकार का पर्यावरण विभाग और IIT कानपुर की AIRWAT रिसर्च फाउंडेशन शामिल हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में 22 मई 2026 को हस्ताक्षर हुए।
दिल्ली में हाइपरलोकल वायु गुणवत्ता निगरानी क्या है?
हाइपरलोकल मॉनिटरिंग का अर्थ है किसी छोटे भौगोलिक क्षेत्र — जैसे एक मोहल्ला या चौराहा — के लिए अलग-अलग प्रदूषण डेटा एकत्र करना। इससे प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों की सटीक पहचान और हॉटस्पॉट पर केंद्रित कार्रवाई संभव होती है।
राष्ट्र प्रेस
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