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क्या पूरे साल एक्यूआई को लेकर सतर्कता जरूरी है?

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क्या पूरे साल एक्यूआई को लेकर सतर्कता जरूरी है?

सारांश

दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एक्यूआई स्तर को नियंत्रित करने के लिए दीर्घकालिक उपायों की आवश्यकता है। इस लेख में जानिए, विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए उपायों और उनके स्वास्थ्य पर प्रभाव के बारे में।

मुख्य बातें

एक्यूआई स्तर गंभीर हो गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दीर्घकालिक उपायों की आवश्यकता बताई है।
हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए अविलंब कदम उठाने की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। वर्तमान में एक्यूआई स्तर बेहद गंभीर स्थिति में है। बिगड़ती परिस्थितियों के बीच, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि ऐसे उपाय खोजे जाएं जो सिर्फ कुछ समय तक नहीं बल्कि दीर्घकालिक प्रभावी हों, यानि कि ऐसे उपाय पूरे वर्ष गंभीरता से लागू किए जाने चाहिए।

दिल्ली की हवा की गुणवत्ता लगातार 15वें दिन भी बहुत खराब श्रेणी में बनी रही। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने शनिवार सुबह 7 बजे एक्यूआई 338 दर्ज किया।

एम्स नई दिल्ली के पल्मोनरी मेडिसिन और स्लीप डिसऑर्डर विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. अनंत मोहन ने राष्ट्र प्रेस को बताया, "हम स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति में पहुँच गए हैं। प्रदूषण को रोकने के प्रयास सिर्फ अस्थायी नहीं हो सकते; इससे तात्कालिक राहत मिल सकती है, लेकिन इस शहर को दीर्घकालिक समाधान की तुरंत आवश्यकता है।"

उन्होंने आगे कहा, "हमें इस स्थिति में बहुत जल्दी कुछ करना होगा।"

शुक्रवार को शहर का 24 घंटे का औसत एक्यूआई 369 रहा, जिससे दिल्ली में आधे महीने तक बहुत खराब हवा की गुणवत्ता बनी रही।

एयर क्वालिटी और मौसम एजेंसियों के अनुमानों से पता चलता है कि आने वाले हफ्तों में कोई खास सुधार नहीं होने की उम्मीद है।

दिल्ली के एम्स के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के डॉ. सौरभ मित्तल ने कहा, “अक्टूबर से दिसंबर के बीच हम प्रदूषण को लेकर बहुत चर्चा करते हैं, और इन तीन महीनों में हम अधिक सक्रिय रहते हैं। लेकिन यह जानना भी आवश्यक है कि गर्मियों में भी हवा की गुणवत्ता अच्छी नहीं होती।"

मित्तल ने आगे कहा, “हमें ऐसे समाधान की आवश्यकता है जो पूरे वर्ष कार्यशील रहें, न कि केवल एक निश्चित समय के लिए।” विशेषज्ञों ने कहा कि खराब हवा का स्तर दिल्ली की भूगोलिक स्थिति और मानव निर्मित कारणों के चलते है।

अशोका यूनिवर्सिटी के डीन प्रोफेसर गौतम मेनन ने कहा, “इंडो-गंगा मैदानों के वायुमंडलीय क्षेत्र में दिल्ली भी शामिल है। राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण का स्तर (दुनिया में) सबसे अधिक है। इसकी एक वजह इस क्षेत्र की अद्वितीय भूगोल है, जो सर्दियों में जब हवा धीमी होती है, तो प्रदूषण को रोक लेती है। लेकिन कई अन्य कारणों से यह बढ़ता है। वाहन संख्या में वृद्धि, बायोमास का जलाना, बिना लाइसेंस वाली फैक्ट्रियां और निरंतर निर्माण ये सभी ऐसे कारण हैं जो मानव निर्मित हैं।”

वायु प्रदूषण का स्वास्थ्य पर अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह का असर होता है। अल्पकालिक प्रभावों में खांसी, आंखों में जलन, सिरदर्द और अस्थमा अटैक शामिल हैं, जबकि दीर्घकालिक प्रभावों में सांस की बीमारियां जैसे सीओपीडी और फेफड़ों का कैंसर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और नर्वस सिस्टम को नुकसान, साथ ही बच्चों में विकास संबंधी समस्याएं शामिल हैं।

कई अध्ययन बताते हैं कि पर्यावरण से निकलने वाले प्रदूषक जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड, ओजोन, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड, स्ट्रोक का मुख्य कारण हैं।

शहर के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. (प्रो.) पी. एन. रेनजेन ने कहा, "छोटे पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5) फेफड़ों के माध्यम से हमारे रक्तप्रवाह में प्रवेश करते हैं और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे रक्तचाप बढ़ता है।"

विशेषज्ञों ने मास्क पहनने और सुबह जल्दी बाहर जाने से बचने की सलाह दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान करना होगा। यह समय है कि हम सभी मिलकर इसके खिलाफ कदम उठाएं और एक स्वस्थ वातावरण के लिए योगदान करें।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में वायु प्रदूषण के मुख्य कारण क्या हैं?
दिल्ली में वायु प्रदूषण के मुख्य कारणों में वाहन संख्या में वृद्धि, औद्योगिक उत्सर्जन और निर्माण कार्य शामिल हैं।
क्या हम प्रदूषण से बच सकते हैं?
हम मास्क पहनकर और सुबह जल्दी बाहर जाने से बचकर प्रदूषण के प्रभाव से बच सकते हैं।
क्या दीर्घकालिक उपायों की आवश्यकता है?
हाँ, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि हमें दीर्घकालिक उपायों की आवश्यकता है, ताकि प्रदूषण को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।
एक्यूआई स्तर को कैसे सुधार सकते हैं?
एक्यूआई स्तर को सुधारने के लिए हमें औद्योगिक उत्सर्जन को नियंत्रित करने और हरित ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ने की आवश्यकता है।
राष्ट्र प्रेस
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