8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने हितधारकों से मांगे सुझाव, अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026
सारांश
Key Takeaways
- सुझाव की अंतिम तिथि: 30 अप्रैल 2026
- सुझाव जमा करने का तरीका: ऑनलाइन पोर्टल
- कर्मचारी संख्या: 1.1 करोड़ से अधिक
- वित्तीय प्रभाव: 2.4 से 3.2 लाख करोड़ रुपए
- संरचित फॉर्मेट: माईगव डॉट इन पर उपलब्ध
नई दिल्ली, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने सभी संबंधित पक्षों से सुझाव और प्रतिनिधित्व आमंत्रित किए हैं। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, ये सुझाव 30 अप्रैल 2026 तक स्वीकार किए जाएंगे।
आयोग ने सरकारी सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों, पेंशनरों के संगठनों, विभिन्न संघों और व्यक्तिगत कर्मचारियों एवं पेंशनरों से मेमोरेंडम/प्रतिनिधित्व प्राप्त करने के लिए अपनी वेबसाइट पर एक ऑनलाइन संरचित फॉर्मेट उपलब्ध कराया है।
वित्त मंत्रालय ने बताया है कि, "मेमोरेंडम जमा करने के लिए यह संरचित फॉर्मेट माईगव डॉट इन पोर्टल (इनोवेट इंडिया डॉट माईगव डॉट इन) पर भी उपलब्ध है।"
आयोग ने सभी हितधारकों से आग्रह किया है कि वे अपने सुझाव और प्रतिनिधित्व केवल इसी पोर्टल के माध्यम से जमा करें। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि कागज आधारित प्रतियां, ईमेल या पीडीएफ फाइलें संभवतः स्वीकार नहीं की जाएंगी।
देश में 1.1 करोड़ से अधिक केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स 8वें वेतन आयोग के जल्द लागू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2027 में वेतन और पेंशन में वृद्धि का पूरा लाभ लागू होना फिलहाल चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
आयोग को अपनी रिपोर्ट पेश करने के लिए 18 महीने की समयसीमा दी गई है। इस कारण संभावना है कि वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी वित्तीय वर्ष 2027 में लागू न हो पाए। ऐसी स्थिति में आयोग प्रमुख हितधारकों के साथ संवाद प्रक्रिया को तेज कर सकता है और मई 2027 से पहले अपनी रिपोर्ट पेश कर सकता है।
आमतौर पर किसी नए वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करते समय महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) को पहले शून्य पर रीसेट किया जाता है, फिर इन्हें क्रमशः बढ़ाया जाता है।
पिछले संशोधन के बाद डीए और डीआर 58 प्रतिशत पर पहुंच चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 7वें वेतन आयोग का वित्तीय प्रभाव लगभग 1.02 लाख करोड़ रुपए रहा था। हालांकि, डीए/डीआर के समायोजन के बाद कर्मचारियों को वास्तविक वृद्धि कुछ कम मिली थी।
हालांकि, अनुमान है कि 8वें वेतन आयोग का वित्तीय प्रभाव इससे काफी अधिक हो सकता है, जो लगभग 2.4 लाख करोड़ से 3.2 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। इसकी वजह कर्मचारियों की बड़ी संख्या और पेंशनरों की बढ़ती संख्या बताई जा रही है।