डीपफेक और एआई यौन उत्पीड़न से महिलाएं सार्वजनिक मंचों से पीछे हटीं: 119 देशों का अध्ययन
सारांश
Key Takeaways
नई दिल्ली, 30 अप्रैल 2025। वैश्विक शोधकर्ताओं की एक संयुक्त टीम ने गुरुवार को एक व्यापक रिपोर्ट जारी की, जिसमें खुलासा हुआ कि डीपफेक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)-सहायता प्राप्त यौन उत्पीड़न और संगठित ऑनलाइन हिंसा महिलाओं के सार्वजनिक जीवन में भागीदारी को गंभीर रूप से सीमित कर रही है। यूएन वीमेन, सिटी सेंट जॉर्ज (यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन) और डेटा फोरेंसिक कंपनी दनर्व द्वारा संचालित इस अध्ययन में 119 देशों की 641 महिला पत्रकारों, मीडिया कर्मियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार रक्षकों के अनुभवों का विश्लेषण किया गया।
ऑनलाइन हिंसा के आँकड़े
रिपोर्ट में पाया गया कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय महिलाओं के विरुद्ध ऑनलाइन हिंसा अब तकनीकी रूप से अधिक परिष्कृत और संगठित हो गई है। सर्वेक्षण के अनुसार, 27 प्रतिशत महिलाओं को अवांछित यौन संदेश या सामग्री का सामना करना पड़ा, 12 प्रतिशत की निजी तस्वीरें बिना अनुमति के साझा की गईं, और 6 प्रतिशत महिलाएँ डीपफेक या संपादित सामग्री का शिकार बनीं।
एआई-सहायता प्राप्त यौन उत्पीड़न की बढ़ती समस्या
रिपोर्ट की प्रमुख लेखिका जूली पोजैट्टी, जो सिटी सेंट जॉर्ज के सेंटर फॉर जर्नलिज्म एंड डेमोक्रेसी की अध्यक्ष हैं, ने कहा कि एआई-संचालित