डीपफेक और एआई यौन उत्पीड़न से महिलाएं सार्वजनिक मंचों से पीछे हटीं: 119 देशों का अध्ययन

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डीपफेक और एआई यौन उत्पीड़न से महिलाएं सार्वजनिक मंचों से पीछे हटीं: 119 देशों का अध्ययन

सारांश

डीपफेक और एआई-संचालित यौन सामग्री महिलाओं के सार्वजनिक जीवन को सीमित कर रही है। 119 देशों के एक व्यापक अध्ययन में पता चला कि 27% महिलाओं को अवांछित यौन संदेश मिले, 6% डीपफेक का शिकार बनीं, और 41% ने सोशल मीडिया से खुद को दूर कर लिया।

Key Takeaways

119 देशों की 641 महिला पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार रक्षकों का विश्लेषण किया गया। 27 प्रतिशत महिलाओं को अवांछित यौन संदेश मिले, 12 प्रतिशत की निजी तस्वीरें साझा की गईं, 6 प्रतिशत डीपफेक का शिकार। 24 प्रतिशत ने चिंता या अवसाद, 13 प्रतिशत को PTSD का अनुभव किया। 41 प्रतिशत महिलाओं ने सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता सीमित कर दी। यूएन वीमेन, सिटी सेंट जॉर्ज और दनर्व की संयुक्त रिपोर्ट, 2025 के अंत में सर्वेक्षण।

नई दिल्ली, 30 अप्रैल 2025। वैश्विक शोधकर्ताओं की एक संयुक्त टीम ने गुरुवार को एक व्यापक रिपोर्ट जारी की, जिसमें खुलासा हुआ कि डीपफेक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)-सहायता प्राप्त यौन उत्पीड़न और संगठित ऑनलाइन हिंसा महिलाओं के सार्वजनिक जीवन में भागीदारी को गंभीर रूप से सीमित कर रही है। यूएन वीमेन, सिटी सेंट जॉर्ज (यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन) और डेटा फोरेंसिक कंपनी दनर्व द्वारा संचालित इस अध्ययन में 119 देशों की 641 महिला पत्रकारों, मीडिया कर्मियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार रक्षकों के अनुभवों का विश्लेषण किया गया।

ऑनलाइन हिंसा के आँकड़े

रिपोर्ट में पाया गया कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय महिलाओं के विरुद्ध ऑनलाइन हिंसा अब तकनीकी रूप से अधिक परिष्कृत और संगठित हो गई है। सर्वेक्षण के अनुसार, 27 प्रतिशत महिलाओं को अवांछित यौन संदेश या सामग्री का सामना करना पड़ा, 12 प्रतिशत की निजी तस्वीरें बिना अनुमति के साझा की गईं, और 6 प्रतिशत महिलाएँ डीपफेक या संपादित सामग्री का शिकार बनीं।

एआई-सहायता प्राप्त यौन उत्पीड़न की बढ़ती समस्या

रिपोर्ट की प्रमुख लेखिका जूली पोजैट्टी, जो सिटी सेंट जॉर्ज के सेंटर फॉर जर्नलिज्म एंड डेमोक्रेसी की अध्यक्ष हैं, ने कहा कि एआई-संचालित

Point of View

बल्कि लोकतांत्रिक भागीदारी में एक संरचनात्मक बाधा है। जब महिलाएँ सार्वजनिक मंचों से पीछे हटती हैं, तो राजनीति, पत्रकारिता और सामाजिक परिवर्तन से आधी आबादी की आवाजें गायब हो जाती हैं। यह समस्या विकसित देशों तक सीमित नहीं है — 119 देशों का यह डेटा दिखाता है कि यह एक वैश्विक संकट है। भारत जैसे देशों में, जहाँ महिला पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को पहले से ही सांप्रदायिक हिंसा और राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ता है, डीपफेक एक नई परत जोड़ता है जो दमन को तकनीकी रूप से सक्षम बनाता है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

डीपफेक और एआई-संचालित यौन सामग्री क्या है?
डीपफेक कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके बनाई गई नकली वीडियो या छवियाँ हैं, जिनमें किसी को ऐसा करते हुए दिखाया जाता है जो उन्होंने वास्तव में नहीं किया। एआई-संचालित यौन सामग्री में किसी की तस्वीर या वीडियो को यौन संदर्भ में हेराफेरी करना शामिल है। ये उपकरण आसानी से उपलब्ध हो गए हैं, जिससे दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
इस अध्ययन में कितनी महिलाओं का सर्वेक्षण किया गया?
रिपोर्ट में 119 देशों की 641 महिला पत्रकारों, मीडिया कर्मियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार रक्षकों के अनुभवों का विश्लेषण किया गया। सर्वेक्षण 2025 के अंत में संचालित किया गया था।
महिलाओं पर डीपफेक और ऑनलाइन हिंसा का क्या मानसिक प्रभाव है?
अध्ययन में पाया गया कि 24 प्रतिशत महिलाओं ने चिंता या अवसाद का अनुभव किया, 13 प्रतिशत को पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) का सामना करना पड़ा, और 41 प्रतिशत ने सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता स्वेच्छा से सीमित कर दी।
यह अध्ययन किन संगठनों ने किया?
यह संयुक्त रिपोर्ट यूएन वीमेन, सिटी सेंट जॉर्ज (यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन) और डेटा फोरेंसिक कंपनी दनर्व द्वारा तैयार की गई थी। रिपोर्ट की प्रमुख लेखिका जूली पोजैट्टी हैं।
क्या भारत में यह समस्या विशेष रूप से गंभीर है?
रिपोर्ट में 119 देशों को शामिल किया गया है, लेकिन भारत जैसे देशों में, जहाँ महिला पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को पहले से ही सांप्रदायिक हिंसा और राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ता है, डीपफेक एक अतिरिक्त खतरा बन गया है जो दमन को तकनीकी रूप से सक्षम बनाता है।
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