चंद्रशेखर पुण्यतिथि: योगी आदित्यनाथ, रेखा गुप्ता और मनोहर लाल समेत देशभर के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की पुण्यतिथि पर 8 जुलाई को देशभर के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और अन्य कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उनके सादगीपूर्ण जीवन, लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता और जनसेवा के प्रति समर्पण को नमन किया।
मुख्य श्रद्धांजलियाँ और नेताओं के उद्गार
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'जननायक, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि। सड़क से लेकर सदन तक वे उपेक्षितों, पीड़ितों और वंचितों की आवाज बने रहे। उनकी सादगी, वैचारिक दृढ़ता और समाज के अंतिम व्यक्ति के प्रति संवेदनशीलता देश के लोकतंत्र को आज भी राह दिखाती है।'
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा, 'सादगी, साहस और सिद्धांतनिष्ठ राजनीति के लिए उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। राष्ट्रहित के प्रति उनका समर्पण भावी पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।'
राज्यों के मुख्यमंत्रियों की प्रतिक्रिया
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने लिखा, 'उनका सादगीपूर्ण जीवन, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण और राष्ट्रहित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।' मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी पूर्व प्रधानमंत्री को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
केंद्रीय मंत्रियों का नमन
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने चंद्रशेखर को 'लोकप्रिय जननेता और ओजस्वी वक्ता' बताते हुए कहा, 'लोकतांत्रिक मूल्यों, शोषितों एवं वंचितों के समग्र उत्थान के लिए आपके प्रखर विचार व कृतित्व सदैव स्मरणीय रहेंगे।' केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष पंकज चौधरी ने लिखा कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए जनसेवा के लिए चंद्रशेखर का समर्पण और संघर्ष भारतीय राजनीति में सदैव स्मरणीय रहेगा।
चंद्रशेखर की विरासत
गौरतलब है कि चंद्रशेखर ने 1990-91 के दौरान भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया था। वे अपनी सादगी, जनसरोकारों से जुड़ाव और निडर राजनीतिक शैली के लिए जाने जाते थे। उनकी 'भारत यात्रा' — जिसमें उन्होंने पैदल देशभ्रमण किया — आज भी जनता से सीधे संपर्क की एक अनूठी मिसाल मानी जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में लोकतांत्रिक मूल्यों और जनप्रतिनिधित्व को लेकर राजनीतिक विमर्श तेज हो रहा है।
आगे की दिशा
चंद्रशेखर की पुण्यतिथि पर विभिन्न दलों के नेताओं का एकसाथ श्रद्धांजलि देना इस बात का संकेत है कि उनकी राजनीतिक विरासत दलीय सीमाओं से परे मानी जाती है। आने वाले दिनों में उनके गृह राज्य उत्तर प्रदेश में भी स्मृति कार्यक्रमों के आयोजन की संभावना है।