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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत श्लोक: 'धैर्य किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है'

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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत श्लोक: 'धैर्य किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है'

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी की संस्कृत सुभाषित-श्रृंखला जारी है — 8 जुलाई को उन्होंने एक्स पर लिखा कि 'धैर्य किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है।' पिछले तीन दिनों में विनम्रता, परोपकार और बलिदान पर भी श्लोक साझा किए गए, जो राष्ट्रीय एकजुटता और आत्मनिर्भरता के व्यापक विमर्श से जुड़ते हैं।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 8 जुलाई 2026 को एक्स पर लिखा — 'धैर्य किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है।' उन्होंने संस्कृत श्लोक 'चलन्ति गिरयः कामं...' साझा किया, जो विपत्ति में मन की अचलता का संदेश देता है।
मंगलवार को विनम्रता और परोपकार पर सुभाषित, तथा 6 जुलाई को डॉ.
श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान को समर्पित श्लोक पोस्ट किया गया।
यह सुभाषित-श्रृंखला संस्कृत के दार्शनिक संदेशों को व्यापक जनसमूह तक पहुँचाने का नियमित प्रयास है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए लिखा कि 'धैर्य किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है।' उन्होंने इसके साथ एक श्लोक भी पोस्ट किया जो कठिन परिस्थितियों में स्थिरचित्त रहने की प्रेरणा देता है। यह क्रम पिछले कई दिनों से जारी है, जिसमें मोदी नियमित रूप से संस्कृत सुभाषितों के माध्यम से जनमानस को संदेश दे रहे हैं।

बुधवार का सुभाषित और श्लोक

प्रधानमंत्री ने 8 जुलाई को एक्स पर लिखा, 'धैर्य किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। इससे कठिन चुनौतियों के बीच भी देश को एकजुट रहने के साथ ही प्रगति, समृद्धि और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।' इसके साथ उन्होंने श्लोक — 'चलन्ति गिरयः कामं युगान्तपवनाहताः। कृच्छ्रेऽपि न चलत्येव धीराणां निश्चलं मनः।।' — भी साझा किया। इस श्लोक का भाव है कि प्रलयकालीन प्रचंड वायु के थपेड़ों से पर्वत भी विचलित हो जाते हैं, परंतु विपत्तियों में भी धैर्यवान पुरुष का मन अडिग और अविचल बना रहता है।

मंगलवार का सुभाषित: विनम्रता और परोपकार

इससे एक दिन पहले मंगलवार को मोदी ने एक्स पर लिखा था, 'समृद्धि की शोभा विनम्रता और परोपकार में निहित है। सफलता वही सार्थक है, जिसमें लोककल्याण की भावना सर्वोपरि हो।' उन्होंने श्लोक 'भवन्ति नम्रास्तरवः फलोद्गमैर्नवाम्बुभिर्दूरविलम्बिनो घनाः। अनुद्धताः सत्पुरुषाः समृद्धिभिः स्वभाव एवैष परोपकारिणाम्॥' भी साझा किया था। इसका भाव है कि जिस प्रकार फल लगने पर वृक्ष और जल से भरे बादल धरती की ओर झुकते हैं, उसी प्रकार परोपकारी महात्मा समृद्धि पाकर भी अहंकार नहीं करते और अपना जीवन समाज की उन्नति में समर्पित कर देते हैं।

6 जुलाई: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि

6 जुलाई को प्रधानमंत्री ने सुभाषित के साथ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को स्मरण करते हुए पोस्ट में लिखा कि भारतवर्ष की एकता, अखंडता और स्वाभिमान के लिए उनका बलिदान हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने श्लोक 'जयन्ति ते सुकृतिनो रससिद्धाः कवीश्वराः। नास्ति येषां यशःकाये जरामरणजं भयम्॥' भी साझा किया था। इस श्लोक का भाव है कि जिन महापुरुषों ने समाज के लिए उत्कृष्ट कार्य किए या बलिदान दिया, वे यश रूपी शरीर से अमर हो जाते हैं — उनके कीर्ति-शरीर को बुढ़ापे या मृत्यु का कोई भय नहीं होता।

क्यों मायने रखती है यह श्रृंखला

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री की ओर से संस्कृत सुभाषितों की यह नियमित श्रृंखला सांस्कृतिक और दार्शनिक संदेशों को व्यापक जनसमूह तक पहुँचाने का एक सुचिंतित प्रयास प्रतीत होती है। यह ऐसे समय में आई है जब देश विभिन्न आंतरिक और बाह्य चुनौतियों के बीच राष्ट्रीय एकजुटता और आत्मनिर्भरता के विमर्श पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। आने वाले दिनों में भी इस सुभाषित-श्रृंखला के जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विनम्रता और बलिदान जैसे विषय ऐसे समय में चुने गए हैं जब देश विभिन्न चुनौतियों से गुज़र रहा है। हालाँकि, मुख्यधारा की कवरेज इन पोस्टों को अक्सर सतही रूप से रिपोर्ट करती है — यह नहीं पूछती कि इन दार्शनिक संदेशों और ठोस नीतिगत कार्रवाइयों के बीच की खाई को कैसे पाटा जाएगा।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 8 जुलाई को एक्स पर क्या साझा किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने 8 जुलाई 2026 को एक्स पर लिखा कि 'धैर्य किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है' और साथ में संस्कृत श्लोक 'चलन्ति गिरयः कामं युगान्तपवनाहताः...' साझा किया। इस श्लोक का भाव है कि विपत्ति में भी धैर्यवान का मन अडिग रहता है।
मोदी की सुभाषित-श्रृंखला में हाल ही में कौन-से विषय रहे हैं?
हाल के दिनों में प्रधानमंत्री ने धैर्य (8 जुलाई), विनम्रता व परोपकार (मंगलवार) और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान (6 जुलाई) पर संस्कृत श्लोक साझा किए हैं। यह श्रृंखला राष्ट्रीय एकजुटता और नैतिक मूल्यों के इर्द-गिर्द केंद्रित है।
6 जुलाई को मोदी ने किसे श्रद्धांजलि दी?
6 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि भारत की एकता, अखंडता और स्वाभिमान के लिए उनका बलिदान हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा। इसके साथ उन्होंने 'जयन्ति ते सुकृतिनो...' श्लोक भी साझा किया।
'चलन्ति गिरयः' श्लोक का क्या अर्थ है?
इस श्लोक का भाव है कि प्रलयकालीन प्रचंड वायु के थपेड़ों से पर्वत भी विचलित हो जाते हैं, परंतु विपत्तियों के बीच भी धैर्यवान पुरुष का मन अचल और अविचल बना रहता है। यह श्लोक मानसिक दृढ़ता और स्थिरता का संदेश देता है।
PM मोदी नियमित रूप से सुभाषित क्यों साझा करते हैं?
प्रधानमंत्री की यह पहल संस्कृत के दार्शनिक और नैतिक संदेशों को डिजिटल माध्यम से व्यापक जनसमूह तक पहुँचाने का प्रयास है। यह सांस्कृतिक विरासत को समकालीन राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ने की एक नियमित संवाद-रणनीति के रूप में देखी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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