8 जुलाई 2026
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एनआईए की विजयवाड़ा में बड़ी छापेमारी: अल-कायदा-ISIS नेटवर्क मामले में विन्चीपेटा क्षेत्र में तलाशी

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एनआईए की विजयवाड़ा में बड़ी छापेमारी: अल-कायदा-ISIS नेटवर्क मामले में विन्चीपेटा क्षेत्र में तलाशी

सारांश

एनआईए ने विजयवाड़ा के विन्चीपेटा में छापेमारी कर अल-कायदा-ISIS नेटवर्क मामले की जांच तेज़ की। पाँच गिरफ्तार आरोपियों पर विदेशी हैंडलर अल-हकीम शुकूर के निर्देश पर भारत में आतंकी गतिविधियाँ फैलाने और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने का आरोप है। एफआईआर में आठ राज्यों के 12 आरोपी हैं।

मुख्य बातें

एनआईए ने 8 जुलाई 2026 को विजयवाड़ा के विन्चीपेटा क्षेत्र में कथित आतंकी नेटवर्क मामले से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की।
अब तक 5 आरोपी गिरफ्तार — मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ, एम.डी.
दानिश, मिर्जा सोहैल बेग, सईदा बेगम और अब्दुल सलाम ।
आरोपी विदेशी हैंडलर अल-हकीम शुकूर के निर्देश पर AQIS और ISIS की गतिविधियाँ फैलाने और युवाओं को आत्मघाती हमलों के लिए उकसाने की कोशिश कर रहे थे।
आरोपियों ने 'अल-मलिक इस्लामिक यूथ' समूह बनाया था; इंस्टाग्राम व टेलीग्राम से भर्ती की जाती थी।
एफआईआर में 12 आरोपी , जो 8 राज्यों से हैं; UAPA, BNS और IT अधिनियम के तहत मामला दर्ज।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 8 जुलाई 2026 को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा स्थित विन्चीपेटा क्षेत्र में उन ठिकानों पर छापेमारी की, जो कथित आतंकी नेटवर्क मामले के आरोपियों से जुड़े बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला हाल ही में एनआईए को सौंपा गया था और तलाशी अभियान का उद्देश्य अतिरिक्त साक्ष्य जुटाना तथा आरोपियों के अन्य संगठनों से संभावित संबंधों का पता लगाना है।

मुख्य घटनाक्रम

इस मामले में अब तक पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है — विजयवाड़ा निवासी मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ (23 वर्ष), एम.डी. दानिश (27 वर्ष) और मिर्जा सोहैल बेग (23 वर्ष); हैदराबाद की सईदा बेगम (38 वर्ष); तथा कर्नाटक के बेल्लारी निवासी अब्दुल सलाम। इन पर आरोप है कि उन्होंने भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की कथित साजिश से जुड़ी जानकारियाँ साझा कीं।

काउंटर इंटेलिजेंस सेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इनकी गतिविधियों पर नज़र रखने के बाद इन्हें गिरफ्तार किया। सईदा बेगम को पिछले महीने हैदराबाद से पकड़ा गया, जबकि अन्य आरोपी विभिन्न राज्यों से गिरफ्तार हुए।

विदेशी हैंडलर और नेटवर्क की कार्यप्रणाली

जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपी विदेशी हैंडलर अल-हकीम शुकूर के निर्देश पर भारत में अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) और ISIS की गतिविधियों का विस्तार करने का काम कर रहे थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे शुकूर से सोशल मीडिया के ज़रिए जुड़े थे और उनसे कभी व्यक्तिगत रूप से नहीं मिले।

आरोपियों ने 'अल-मलिक इस्लामिक यूथ' नामक समूह बनाया था। उन्होंने स्वीकार किया कि शुकूर के संपर्क में आने से पहले भी उनमें जिहादी विचारधारा थी, जो बाद में और प्रबल हो गई। आरोप है कि वे युवाओं को इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ज़रिए कट्टरपंथ की ओर उकसा रहे थे और आत्मघाती हमलों के लिए प्रेरित करने की कोशिश कर रहे थे।

साजिश का विस्तार और हथियार प्रशिक्षण की योजना

जांच में सामने आया कि आरोपियों की योजना भर्ती किए गए लोगों को स्नाइपर राइफल, बंदूक, ब्लैक पाउडर बम और आईईडी बनाने का प्रशिक्षण देने की थी। विदेशी हैंडलर के निर्देश पर महिलाओं के लिए एक अलग विंग बनाने की भी योजना थी, जिसकी प्रमुख सईदा बेगम को बनाया जाना था।

आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उनका घोषित उद्देश्य 'गजवा-ए-हिंद' के तहत भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाना और भारतीय तिरंगे की जगह ISIS का झंडा फहराना था।

कानूनी कार्रवाई और एफआईआर का दायरा

आरोपियों के विरुद्ध विजयवाड़ा टू टाउन पुलिस स्टेशन में गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर में कुल 12 आरोपियों के नाम हैं, जो आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सहित आठ राज्यों के निवासी हैं।

आगे की जांच

एनआईए की बुधवार की छापेमारी इस बात का संकेत है कि जांच का दायरा अभी और व्यापक हो सकता है। एजेंसी आरोपियों के अन्य संभावित सहयोगियों और संगठनों से उनके संबंधों की पड़ताल कर रही है। यह मामला इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि इसमें एक साथ कई राज्यों में फैले नेटवर्क और सोशल मीडिया के ज़रिए संचालित कट्टरपंथीकरण की प्रक्रिया उजागर हुई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनआईए ने विजयवाड़ा में छापेमारी क्यों की?
एनआईए ने कथित आतंकी नेटवर्क मामले में अतिरिक्त साक्ष्य जुटाने और आरोपियों के अन्य संगठनों से संभावित संबंधों का पता लगाने के लिए 8 जुलाई 2026 को विजयवाड़ा के विन्चीपेटा क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया। यह मामला हाल ही में एनआईए को सौंपा गया था।
इस आतंकी नेटवर्क मामले में अब तक किन्हें गिरफ्तार किया गया है?
अब तक पाँच आरोपी गिरफ्तार हुए हैं — विजयवाड़ा के मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ, एम.डी. दानिश और मिर्जा सोहैल बेग; हैदराबाद की सईदा बेगम; और कर्नाटक के बेल्लारी निवासी अब्दुल सलाम। एफआईआर में कुल 12 आरोपियों के नाम हैं।
विदेशी हैंडलर अल-हकीम शुकूर की इस मामले में क्या भूमिका बताई गई है?
जांचकर्ताओं के अनुसार, अल-हकीम शुकूर ने सोशल मीडिया के ज़रिए आरोपियों को निर्देशित किया और उन्हें भारत में AQIS व ISIS की गतिविधियाँ फैलाने के लिए प्रेरित किया। आरोपियों ने बताया कि उन्होंने शुकूर से कभी व्यक्तिगत रूप से मुलाकात नहीं की।
'अल-मलिक इस्लामिक यूथ' समूह क्या है?
यह आरोपियों द्वारा बनाया गया एक कथित समूह है, जिसके ज़रिए इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर युवाओं को कट्टरपंथ की ओर उकसाया जाता था। समूह की योजना भर्ती किए गए सदस्यों को हथियार और विस्फोटक बनाने का प्रशिक्षण देने की भी थी।
इस मामले में कौन-सी कानूनी धाराएँ लगाई गई हैं और कितने राज्य प्रभावित हैं?
विजयवाड़ा टू टाउन पुलिस स्टेशन में UAPA, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और IT अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है। एफआईआर में नामित 12 आरोपी आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल — कुल आठ राज्यों से हैं।
राष्ट्र प्रेस
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