एनआईए की विजयवाड़ा में बड़ी छापेमारी: अल-कायदा-ISIS नेटवर्क मामले में विन्चीपेटा क्षेत्र में तलाशी
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 8 जुलाई 2026 को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा स्थित विन्चीपेटा क्षेत्र में उन ठिकानों पर छापेमारी की, जो कथित आतंकी नेटवर्क मामले के आरोपियों से जुड़े बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला हाल ही में एनआईए को सौंपा गया था और तलाशी अभियान का उद्देश्य अतिरिक्त साक्ष्य जुटाना तथा आरोपियों के अन्य संगठनों से संभावित संबंधों का पता लगाना है।
मुख्य घटनाक्रम
इस मामले में अब तक पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है — विजयवाड़ा निवासी मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ (23 वर्ष), एम.डी. दानिश (27 वर्ष) और मिर्जा सोहैल बेग (23 वर्ष); हैदराबाद की सईदा बेगम (38 वर्ष); तथा कर्नाटक के बेल्लारी निवासी अब्दुल सलाम। इन पर आरोप है कि उन्होंने भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की कथित साजिश से जुड़ी जानकारियाँ साझा कीं।
काउंटर इंटेलिजेंस सेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इनकी गतिविधियों पर नज़र रखने के बाद इन्हें गिरफ्तार किया। सईदा बेगम को पिछले महीने हैदराबाद से पकड़ा गया, जबकि अन्य आरोपी विभिन्न राज्यों से गिरफ्तार हुए।
विदेशी हैंडलर और नेटवर्क की कार्यप्रणाली
जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपी विदेशी हैंडलर अल-हकीम शुकूर के निर्देश पर भारत में अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) और ISIS की गतिविधियों का विस्तार करने का काम कर रहे थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे शुकूर से सोशल मीडिया के ज़रिए जुड़े थे और उनसे कभी व्यक्तिगत रूप से नहीं मिले।
आरोपियों ने 'अल-मलिक इस्लामिक यूथ' नामक समूह बनाया था। उन्होंने स्वीकार किया कि शुकूर के संपर्क में आने से पहले भी उनमें जिहादी विचारधारा थी, जो बाद में और प्रबल हो गई। आरोप है कि वे युवाओं को इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ज़रिए कट्टरपंथ की ओर उकसा रहे थे और आत्मघाती हमलों के लिए प्रेरित करने की कोशिश कर रहे थे।
साजिश का विस्तार और हथियार प्रशिक्षण की योजना
जांच में सामने आया कि आरोपियों की योजना भर्ती किए गए लोगों को स्नाइपर राइफल, बंदूक, ब्लैक पाउडर बम और आईईडी बनाने का प्रशिक्षण देने की थी। विदेशी हैंडलर के निर्देश पर महिलाओं के लिए एक अलग विंग बनाने की भी योजना थी, जिसकी प्रमुख सईदा बेगम को बनाया जाना था।
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उनका घोषित उद्देश्य 'गजवा-ए-हिंद' के तहत भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाना और भारतीय तिरंगे की जगह ISIS का झंडा फहराना था।
कानूनी कार्रवाई और एफआईआर का दायरा
आरोपियों के विरुद्ध विजयवाड़ा टू टाउन पुलिस स्टेशन में गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर में कुल 12 आरोपियों के नाम हैं, जो आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सहित आठ राज्यों के निवासी हैं।
आगे की जांच
एनआईए की बुधवार की छापेमारी इस बात का संकेत है कि जांच का दायरा अभी और व्यापक हो सकता है। एजेंसी आरोपियों के अन्य संभावित सहयोगियों और संगठनों से उनके संबंधों की पड़ताल कर रही है। यह मामला इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि इसमें एक साथ कई राज्यों में फैले नेटवर्क और सोशल मीडिया के ज़रिए संचालित कट्टरपंथीकरण की प्रक्रिया उजागर हुई है।