एनआईए ने आंध्र प्रदेश विस्फोटक मामले में दूसरे आरोपी शेख मंसूर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शुक्रवार, 19 जून 2026 को 2025 के आंध्र प्रदेश विस्फोटक मामले में दूसरे आरोपी शेख मंसूर उर्फ मोहम्मद अली उर्फ विजयकुमार के खिलाफ विजयवाड़ा स्थित एनआईए की स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। यह मामला आतंकी गतिविधियों के लिए विस्फोटक सामग्री एकत्र करने और उसे ठिकाने तक पहुँचाने की साजिश से जुड़ा है।
मुख्य आरोप और कानूनी धाराएँ
एनआईए की चार्जशीट में शेख मंसूर उर्फ मोहम्मद अली पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम [यूए(पी) एक्ट], 1967 और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। आरोपी को दिसंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था।
गौरतलब है कि मोहम्मद अली पहली चार्जशीट में नामित आरोपी शेख अमानुल्ला उर्फ अबू बकर सिद्दीक का करीबी सहयोगी था। एनआईए ने फरवरी 2026 में शेख अमानुल्ला के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके घर से विस्फोटक और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई थी। इस मामले में अब तक कुल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
आरोपी की पृष्ठभूमि और फर्जी पहचान
जांच के अनुसार, गिरफ्तारी के समय मोहम्मद अली 1999 के बम विस्फोट मामले में तमिलनाडु से फरार होने के बाद फर्जी पहचान के साथ जीवन बिता रहा था। वह आंध्र प्रदेश के अन्नामय्या जिले के रायचोटी शहर में शेख मंसूर के नाम से रह रहा था और इसके लिए उसने धोखाधड़ी से हासिल किए गए सरकारी पहचान पत्रों का इस्तेमाल किया था।
साजिश का खुलासा
एनआईए की जांच के अनुसार, शेख अमानुल्ला ने मोहम्मद अली को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर प्रेरित किया, उसे संगठन में भर्ती किया और बम बनाने की ट्रेनिंग दी। मोहम्मद अली ने रायचोटी स्थित एक ठिकाने तक विस्फोटक पहुँचाने में अमानुल्ला की सक्रिय मदद की थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों आरोपियों ने आम नागरिकों के बीच दहशत फैलाने और एक खास समुदाय के नेताओं की टारगेटेड हत्या की साजिश रची थी। यह मामला आंध्र प्रदेश पुलिस से एनआईए को स्थानांतरित किया गया था।
आगे की जांच
एनआईए ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में जांच अभी जारी है और शेष संदिग्धों के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। यह मामला देश में आतंकी नेटवर्क के विरुद्ध एनआईए की सतत कार्रवाई की कड़ी में एक और महत्वपूर्ण कदम है।