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एनआईए ने आंध्र प्रदेश विस्फोटक मामले में दूसरे आरोपी शेख मंसूर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की

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एनआईए ने आंध्र प्रदेश विस्फोटक मामले में दूसरे आरोपी शेख मंसूर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की

सारांश

एनआईए ने आंध्र प्रदेश विस्फोटक मामले में दूसरी चार्जशीट दाखिल की — इस बार फर्जी पहचान से रह रहे शेख मंसूर उर्फ मोहम्मद अली के खिलाफ, जो 1999 के बम विस्फोट मामले में दशकों से फरार था और अब टारगेटेड हत्या की साजिश में सहभागी पाया गया है।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 19 जून 2026 को विजयवाड़ा की स्पेशल कोर्ट में दूसरी चार्जशीट दाखिल की।
आरोपी शेख मंसूर उर्फ मोहम्मद अली उर्फ विजयकुमार को दिसंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था।
आरोपी 1999 के बम विस्फोट मामले में तमिलनाडु से फरार होकर फर्जी पहचान से अन्नामय्या जिले के रायचोटी में रह रहा था।
पहली चार्जशीट में नामित शेख अमानुल्ला ने मोहम्मद अली को कट्टरपंथी बनाया, भर्ती किया और बम बनाने की ट्रेनिंग दी — एनआईए के अनुसार।
इस मामले में अब तक कुल तीन आरोपी गिरफ्तार; जांच जारी है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शुक्रवार, 19 जून 2026 को 2025 के आंध्र प्रदेश विस्फोटक मामले में दूसरे आरोपी शेख मंसूर उर्फ मोहम्मद अली उर्फ विजयकुमार के खिलाफ विजयवाड़ा स्थित एनआईए की स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। यह मामला आतंकी गतिविधियों के लिए विस्फोटक सामग्री एकत्र करने और उसे ठिकाने तक पहुँचाने की साजिश से जुड़ा है।

मुख्य आरोप और कानूनी धाराएँ

एनआईए की चार्जशीट में शेख मंसूर उर्फ मोहम्मद अली पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम [यूए(पी) एक्ट], 1967 और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। आरोपी को दिसंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था।

गौरतलब है कि मोहम्मद अली पहली चार्जशीट में नामित आरोपी शेख अमानुल्ला उर्फ अबू बकर सिद्दीक का करीबी सहयोगी था। एनआईए ने फरवरी 2026 में शेख अमानुल्ला के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके घर से विस्फोटक और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई थी। इस मामले में अब तक कुल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

आरोपी की पृष्ठभूमि और फर्जी पहचान

जांच के अनुसार, गिरफ्तारी के समय मोहम्मद अली 1999 के बम विस्फोट मामले में तमिलनाडु से फरार होने के बाद फर्जी पहचान के साथ जीवन बिता रहा था। वह आंध्र प्रदेश के अन्नामय्या जिले के रायचोटी शहर में शेख मंसूर के नाम से रह रहा था और इसके लिए उसने धोखाधड़ी से हासिल किए गए सरकारी पहचान पत्रों का इस्तेमाल किया था।

साजिश का खुलासा

एनआईए की जांच के अनुसार, शेख अमानुल्ला ने मोहम्मद अली को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर प्रेरित किया, उसे संगठन में भर्ती किया और बम बनाने की ट्रेनिंग दी। मोहम्मद अली ने रायचोटी स्थित एक ठिकाने तक विस्फोटक पहुँचाने में अमानुल्ला की सक्रिय मदद की थी।

जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों आरोपियों ने आम नागरिकों के बीच दहशत फैलाने और एक खास समुदाय के नेताओं की टारगेटेड हत्या की साजिश रची थी। यह मामला आंध्र प्रदेश पुलिस से एनआईए को स्थानांतरित किया गया था।

आगे की जांच

एनआईए ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में जांच अभी जारी है और शेष संदिग्धों के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। यह मामला देश में आतंकी नेटवर्क के विरुद्ध एनआईए की सतत कार्रवाई की कड़ी में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि एक फरारी अपराधी इतने वर्षों तक राज्य की निगरानी से बचा कैसे रहा। टारगेटेड हत्या और विस्फोटक नेटवर्क की यह साजिश दक्षिण भारत में कट्टरपंथी संगठनों की बढ़ती सक्रियता का संकेत देती है, जिस पर व्यापक नीतिगत ध्यान देने की आवश्यकता है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनआईए ने आंध्र प्रदेश विस्फोटक मामले में किसके खिलाफ दूसरी चार्जशीट दाखिल की?
एनआईए ने शेख मंसूर उर्फ मोहम्मद अली उर्फ विजयकुमार के खिलाफ दूसरी चार्जशीट दाखिल की है। उसे दिसंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था और वह पहली चार्जशीट में नामित आरोपी शेख अमानुल्ला का करीबी सहयोगी था।
आंध्र प्रदेश विस्फोटक मामला 2025 क्या है?
यह मामला आंध्र प्रदेश में आतंकी गतिविधियों के लिए विस्फोटक सामग्री एकत्र करने और उसे ठिकाने तक पहुँचाने की साजिश से जुड़ा है। शेख अमानुल्ला के घर से विस्फोटक और आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई थी, जिसके बाद यह मामला आंध्र प्रदेश पुलिस से एनआईए को सौंपा गया।
मोहम्मद अली फर्जी पहचान से क्यों रह रहा था?
मोहम्मद अली 1999 के बम विस्फोट मामले में तमिलनाडु से फरार होने के बाद दशकों तक फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। वह आंध्र प्रदेश के अन्नामय्या जिले के रायचोटी में शेख मंसूर के नाम से धोखाधड़ी से हासिल किए गए सरकारी पहचान पत्रों के सहारे जीवन बिता रहा था।
इस मामले में अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
एनआईए के अनुसार इस मामले में अब तक कुल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पहली चार्जशीट शेख अमानुल्ला के खिलाफ फरवरी 2026 में और दूसरी चार्जशीट मोहम्मद अली के खिलाफ 19 जून 2026 को दाखिल की गई।
आरोपियों की साजिश का मकसद क्या था?
एनआईए की जांच के अनुसार, आरोपियों ने आम नागरिकों में दहशत फैलाने और एक खास समुदाय के नेताओं की टारगेटेड हत्या की साजिश रची थी। जांच एजेंसी का कहना है कि यह साजिश एक व्यापक कट्टरपंथी एजेंडे का हिस्सा थी।
राष्ट्र प्रेस
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