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PM मोदी का 'सुभाषितम' संदेश: निरंतर प्रयास और दृढ़ संकल्प से बड़े लक्ष्य होते हैं सिद्ध

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PM मोदी का 'सुभाषितम' संदेश: निरंतर प्रयास और दृढ़ संकल्प से बड़े लक्ष्य होते हैं सिद्ध

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को एक्स पर 'सुभाषितम' श्रृंखला के तहत संस्कृत श्लोक साझा किया, जिसका संदेश था — निरंतर और क्रमबद्ध प्रयास से बड़े से बड़े लक्ष्य अवश्य सिद्ध होते हैं। एक दिन पहले उन्होंने सच्चे ज्ञान को मानवता के कल्याण का आधार बताया था।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 मई 2026 को एक्स पर 'सुभाषितम' संदेश साझा किया।
संदेश का सार: निरंतर प्रयास, धैर्य और दृढ़ संकल्प से बड़े से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
साझा श्लोक: 'यो यमर्थं प्रार्थयते तदर्थं चेह ते क्रमात्...' — लक्ष्य की ओर अडिग रहने का आह्वान।
26 मई के 'सुभाषितम' में मोदी ने सच्चे ज्ञान को देश, समाज और मानवता के कल्याण का माध्यम बताया था।
यह श्रृंखला भारतीय शास्त्रीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक राष्ट्र-निर्माण से जोड़ने का प्रयास है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 मई 2026 को बुधवार की सुबह एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपना नियमित 'सुभाषितम' संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने अटूट धैर्य, निरंतर प्रयास और दृढ़ संकल्प को बड़े लक्ष्यों की सिद्धि की आधारशिला बताया।

मुख्य संदेश और श्लोक

अपनी एक्स पोस्ट में मोदी ने लिखा, 'निरंतर प्रयास, धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ बड़े से बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। आज देशवासी इसी भावना से भारतवर्ष को नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रहे हैं।' इस संदेश के साथ उन्होंने संस्कृत का एक श्लोक भी संलग्न किया।

वह श्लोक इस प्रकार है: 'यो यमर्थं प्रार्थयते तदर्थं चेह ते क्रमात्। अवश्यं स तमाप्नोति न चेदर्थान् निवर्तते।।' इसका भाव है — जो व्यक्ति जिस लक्ष्य की कामना करता है और उसके लिए निरंतर, क्रमबद्ध प्रयास करता रहता है, वह उस लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करता है — बशर्ते वह बीच राह में हार मानकर पीछे न लौटे।

पिछले दिन का 'सुभाषितम' संदेश

इससे एक दिन पूर्व, मंगलवार 26 मई को भी मोदी ने 'सुभाषितम' श्रृंखला के तहत एक्स पर एक प्रेरणादायी संदेश साझा किया था। उस पोस्ट में उन्होंने कहा था, 'सच्चा ज्ञान देश, समाज और समस्त मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। इसलिए यह जरूरी है कि हमारा ज्ञान और हमारे कर्म पूरी मानवता के लिए प्रेरणा बनें।'

उस पोस्ट में साझा श्लोक था: 'आत्मा शुद्धः सदा नित्यः सुखरूपः स्वयम्प्रभः। अज्ञानान्मलिनो भाति ज्ञानाच्छुद्धो भवत्ययम्।।' इसका अर्थ है — आत्मा स्वभाव से सदा शुद्ध, नित्य, सुखस्वरूप और स्वयंप्रकाशमान है; किन्तु अज्ञान के कारण वह मलिन प्रतीत होती है और ज्ञान से वही पुनः अपने शुद्ध स्वरूप में प्रकट हो जाती है।

'सुभाषितम' श्रृंखला का महत्त्व

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी नियमित रूप से एक्स पर 'सुभाषितम' के नाम से संस्कृत श्लोकों और उनके हिंदी भावार्थ के साथ प्रेरक संदेश साझा करते हैं। यह श्रृंखला भारतीय दर्शन, वेदांत और नीतिशास्त्र की समृद्ध परंपरा को आधुनिक संदर्भ से जोड़ने का प्रयास है। यह ऐसे समय में आई है जब देश विभिन्न सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के बीच आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

आगे की दिशा

मोदी की यह 'सुभाषितम' पोस्ट सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की जा रही है और नागरिकों में सकारात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न कर रही है। इस श्रृंखला के माध्यम से प्रधानमंत्री भारत की शास्त्रीय ज्ञान परंपरा को समकालीन राष्ट्र-निर्माण के संकल्प से जोड़ने की कोशिश करते दिखते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

आलोचकों का मानना है कि प्रेरणादायी पोस्ट और ज़मीनी नीतिगत परिणामों के बीच की खाई पर भी उतनी ही नज़र रखना ज़रूरी है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी की 'सुभाषितम' श्रृंखला क्या है?
'सुभाषितम' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक्स पर नियमित रूप से साझा की जाने वाली श्रृंखला है, जिसमें वे संस्कृत श्लोक और उनके हिंदी भावार्थ के साथ प्रेरक संदेश देते हैं। यह भारतीय दर्शन और नीतिशास्त्र की परंपरा को आधुनिक संदर्भ से जोड़ने का प्रयास है।
27 मई के 'सुभाषितम' में मोदी ने कौन-सा श्लोक साझा किया?
मोदी ने 'यो यमर्थं प्रार्थयते तदर्थं चेह ते क्रमात्। अवश्यं स तमाप्नोति न चेदर्थान् निवर्तते।।' श्लोक साझा किया। इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति किसी लक्ष्य के लिए निरंतर और क्रमबद्ध प्रयास करता है, वह उसे अवश्य प्राप्त करता है — बशर्ते वह बीच में हार न माने।
26 मई के 'सुभाषितम' संदेश में क्या कहा गया था?
26 मई को मोदी ने सच्चे ज्ञान को देश, समाज और समस्त मानवता के कल्याण का मार्ग बताया था। उन्होंने 'आत्मा शुद्धः सदा नित्यः...' श्लोक साझा किया, जिसका अर्थ है कि आत्मा स्वभाव से शुद्ध है और ज्ञान से वह अपने मूल स्वरूप में प्रकट होती है।
मोदी के 'सुभाषितम' संदेश का व्यापक संदर्भ क्या है?
यह श्रृंखला प्रधानमंत्री की उस व्यापक संचार रणनीति का हिस्सा है जिसमें वे भारतीय शास्त्रीय ज्ञान परंपरा को राष्ट्र-निर्माण के संकल्प से जोड़ते हैं। यह आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत जैसे लक्ष्यों के लिए नागरिकों को प्रेरित करने का प्रयास माना जाता है।
मोदी एक्स पर 'सुभाषितम' कितनी बार साझा करते हैं?
प्रधानमंत्री मोदी नियमित रूप से, प्रायः प्रतिदिन, 'सुभाषितम' श्रृंखला के तहत एक्स पर संस्कृत श्लोक और उनके भावार्थ साझा करते हैं। 26 और 27 मई को लगातार दो दिन यह संदेश साझा किए गए।
राष्ट्र प्रेस
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