2 जुलाई 2026
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PM मोदी ने एक्स पर शेयर किया संस्कृत सुभाषितम्: 'निरंतर प्रयास ही सफलता की असली कुंजी'

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PM मोदी ने एक्स पर शेयर किया संस्कृत सुभाषितम्: 'निरंतर प्रयास ही सफलता की असली कुंजी'

सारांश

PM मोदी ने एक्स पर संस्कृत सुभाषितम् साझा कर कहा — निरंतर प्रयत्नशील व्यक्ति ही समृद्धि पाता है। यह उनकी प्रतिदिन की उस पहल का हिस्सा है जिसके ज़रिये वे लाखों अनुयायियों तक भारत की शास्त्रीय ज्ञान परंपरा पहुँचाते हैं।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 2 जुलाई को एक्स पर संस्कृत सुभाषितम् साझा किया।
संदेश का सार: निरंतर प्रयास करने वाले को समृद्धि मिलती है; निष्क्रिय व्यक्ति प्रगति से वंचित रहता है।
साझा किया गया श्लोक: 'नानाश्रान्ताय श्रीरस्तीति...
चरैवेति' — कर्म और गतिशीलता का आह्वान।
इससे पहले डिजिटल इंडिया के 11 वर्ष पर भी मोदी ने विज्ञान-सारथी वाला संस्कृत श्लोक साझा किया था।
PM मोदी प्रतिदिन एक संस्कृत सुभाषितम् एक्स पर पोस्ट करते हैं — यह उनकी नियमित सोशल मीडिया परंपरा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए कहा कि धैर्य, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने वाला व्यक्ति ही अपने लक्ष्य तक पहुँचता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में लिखा कि निरंतर प्रयास ही सफलता की असली कुंजी है।

मोदी का संदेश और सुभाषितम्

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'निरंतर प्रयास ही सफलता की असली कुंजी है। जीवन में वही व्यक्ति अपने लक्ष्य तक पहुँचता है, जो धैर्य, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता रहता है।' इसके साथ उन्होंने यह संस्कृत श्लोक साझा किया: 'नानाश्रान्ताय श्रीरस्तीति रोहित शुश्रुम। पापो नृषद्वरो जन इन्द्र इच्चरतः सखा चरैवेति।'

इस सुभाषितम् का भाव यह है कि जो मनुष्य निरंतर प्रयत्नशील रहता है, उसे समृद्धि प्राप्त होती है, जबकि निष्क्रिय बैठा व्यक्ति प्रगति से वंचित रह जाता है। निरंतर कर्म करने वाले का भाग्य भी उसका साथ देता है — इसीलिए 'चरैवेति' अर्थात 'आगे बढ़ते रहो' का आह्वान किया गया है।

डिजिटल इंडिया के 11 वर्ष: पहले भी शेयर किया था सुभाषितम्

इससे पूर्व, डिजिटल इंडिया पहल के 11 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भी प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया था: 'विज्ञानसारथिर्यस्तु मनःप्रग्रहवन्नरः। सोऽध्वनः परमाप्नोति तद्विश्नोः परमं पदम्॥'

इस श्लोक का अर्थ है कि जिस व्यक्ति की बुद्धि एक सतर्क और वैज्ञानिक सारथी की भाँति कार्य करती है और जिसका मन अनुशासित होता है, वह जीवन की जटिलताओं को पार कर अंतिम लक्ष्य तक पहुँचता है। उन्होंने उस अवसर पर कहा था, 'डिजिटल इंडिया के 11 वर्षों की सफलता से भारतवर्ष को एक नई पहचान मिली है। इससे नवाचार और प्रौद्योगिकी को अपनाकर देश को नई ऊँचाई पर ले जाने की देशवासियों की संकल्पशक्ति दिखती है।'

प्रतिदिन की परंपरा: संस्कृत के माध्यम से संस्कृति से जुड़ाव

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी प्रतिदिन एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हैं, जो भारतीय संस्कृति, समाज और राष्ट्रीय जीवन के विविध पहलुओं पर आधारित होते हैं। यह पहल उनके सोशल मीडिया उपस्थिति का एक नियमित और विशिष्ट हिस्सा बन चुकी है।

यह ऐसे समय में आया है जब संस्कृत भाषा के पुनरुद्धार और शास्त्रीय ज्ञान को डिजिटल माध्यमों से आम जन तक पहुँचाने की चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर तेज़ हुई है। प्रधानमंत्री की यह दैनिक पहल लाखों अनुयायियों तक प्राचीन भारतीय दर्शन को सरल भाषा में पहुँचाती है।

आम जनता पर असर

प्रधानमंत्री के इस नियमित अभियान को सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया मिलती है। संस्कृत विद्वानों और शिक्षाविदों का कहना है कि इस तरह की पहल युवा पीढ़ी को भारत की शास्त्रीय भाषा और उसकी ज्ञान परंपरा से जोड़ने में सहायक है। आगे भी प्रधानमंत्री की ओर से इस परंपरा को जारी रखे जाने की संभावना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 2 जुलाई को कौन-सा संस्कृत सुभाषितम् शेयर किया?
PM मोदी ने 'नानाश्रान्ताय श्रीरस्तीति रोहित शुश्रुम। पापो नृषद्वरो जन इन्द्र इच्चरतः सखा चरैवेति।' श्लोक साझा किया। इसका अर्थ है कि निरंतर प्रयत्नशील व्यक्ति समृद्धि पाता है और निष्क्रिय व्यक्ति प्रगति से वंचित रहता है।
PM मोदी के संस्कृत सुभाषितम् पोस्ट का क्या संदेश था?
मोदी ने कहा कि निरंतर प्रयास ही सफलता की असली कुंजी है। जो व्यक्ति धैर्य, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता रहता है, वही अपने लक्ष्य तक पहुँचता है।
PM मोदी कितनी बार संस्कृत सुभाषितम् शेयर करते हैं?
प्रधानमंत्री मोदी प्रतिदिन एक संस्कृत सुभाषितम् एक्स पर साझा करते हैं। ये श्लोक भारतीय संस्कृति, समाज और राष्ट्रीय जीवन के विविध विषयों पर आधारित होते हैं।
डिजिटल इंडिया के 11 वर्ष पर मोदी ने कौन-सा श्लोक शेयर किया था?
डिजिटल इंडिया की 11वीं वर्षगाँठ पर मोदी ने 'विज्ञानसारथिर्यस्तु मनःप्रग्रहवन्नरः। सोऽध्वनः परमाप्नोति तद्विश्नोः परमं पदम्॥' शेयर किया था। इसका अर्थ है कि विवेकशील और अनुशासित मन वाला व्यक्ति जीवन की जटिलताओं को पार कर अंतिम लक्ष्य प्राप्त करता है।
मोदी की संस्कृत सुभाषितम् पहल का क्या महत्व है?
यह पहल प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को डिजिटल माध्यम से करोड़ों लोगों तक पहुँचाने का प्रयास है। संस्कृत विद्वानों के अनुसार, इससे युवा पीढ़ी को शास्त्रीय भाषा और भारतीय दर्शन से जोड़ने में सहायता मिलती है।
राष्ट्र प्रेस
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