PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: ज्ञान, विवेक और दूरदर्शिता हैं सफलता की कुंजी
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 19 जून को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए लिखा कि 'ज्ञान, विवेक और दूरदर्शिता जैसे सद्गुण जीवन में सफलता का प्रमुख आधार हैं — इनसे समृद्ध व्यक्ति कठिन से कठिन चुनौतियों में भी विजयी होता है।' यह पोस्ट उनकी हाल की उस श्रृंखला का हिस्सा है जिसमें वे नियमित रूप से संस्कृत श्लोकों के माध्यम से जीवन-दर्शन साझा कर रहे हैं।
19 जून का सुभाषित: छह गुण जो 'कामधेनु' समान हैं
मोदी ने 19 जून को जो श्लोक साझा किया, वह इस प्रकार है — 'शास्त्रे प्रतिष्ठा सहजश्च बोधः प्रागल्भ्यमभ्यस्तगुणा च वाणी। कालानुरोधः प्रतिभानवत्त्वमेते गुणाः कामदुघाः क्रियासु॥' इस श्लोक का अर्थ है कि विषय का प्रामाणिक ज्ञान, स्वाभाविक विवेकशीलता, निर्भीक आत्मविश्वास, अभ्यास से परिष्कृत ओजस्वी वाणी, समय की मांग को पहचानने वाली दूरदर्शिता और नित्य नवीन सूझबूझ — ये छह गुण मानव के प्रत्येक पुरुषार्थ में 'कामधेनु' के समान सिद्ध होते हैं।
18 जून का सुभाषित: सत्य, यश, ज्ञान और बुद्धि का मार्ग
इससे एक दिन पहले 18 जून को मोदी ने लिखा था — 'सत्यानुसारिणी लक्ष्मीः कीर्तिस्त्यागानुसारिणी। अभ्याससारिणी विद्या बुद्धिः कर्मानुसारिणी।।' इस श्लोक का भाव है कि धन सत्यनिष्ठा का अनुसरण करता है, यश परोपकार का, ज्ञान अभ्यास का और बुद्धि कर्म का। गौरतलब है कि इस श्लोक में सफलता को किसी बाहरी संयोग से नहीं, बल्कि आंतरिक आचरण से जोड़ा गया है।
17 जून का सुभाषित: सम्मान से जागता है आत्मविश्वास
बुधवार, 17 जून को प्रधानमंत्री ने लिखा था, 'स्नेहपूर्ण सम्मान और स्वीकार्यता व्यक्ति को गर्व और संतोष का अनुभव कराती है — इससे जहाँ आत्मविश्वास बढ़ता है, वहीं एक नई ऊर्जा और उत्साह का भी संचार होता है।' उन्होंने श्लोक 'त्वत्सम्भावितमात्मानं बहु मन्यामहे वयम्। प्रायः प्रत्ययमाधत्ते स्वगुणेषूत्तमादरः।' साझा किया था, जिसका अर्थ है कि श्रेष्ठ पुरुषों द्वारा प्रदान किया गया सम्मान मनुष्य के भीतर उसके अपने गुणों के प्रति आत्मविश्वास को दृढ़तापूर्वक जागृत कर देता है।
क्यों है यह श्रृंखला उल्लेखनीय
प्रधानमंत्री की यह संस्कृत सुभाषित श्रृंखला लगातार तीन दिनों — 17, 18 और 19 जून — से जारी है। यह ऐसे समय में आई है जब संस्कृत भाषा और भारतीय शास्त्रीय ज्ञान-परंपरा को डिजिटल माध्यमों से पुनर्जीवित करने की व्यापक चर्चा चल रही है। प्रत्येक श्लोक के साथ मोदी ने उसका हिंदी भावार्थ भी प्रस्तुत किया, जिससे यह सामग्री आम पाठक के लिए भी सुलभ बनी।