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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: ज्ञान, विवेक और दूरदर्शिता हैं सफलता की कुंजी

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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: ज्ञान, विवेक और दूरदर्शिता हैं सफलता की कुंजी

सारांश

तीन दिन, तीन संस्कृत सुभाषित — प्रधानमंत्री मोदी ने 17 से 19 जून के बीच एक्स पर लगातार श्लोक साझा किए, जिनमें ज्ञान, सत्यनिष्ठा और सम्मान को जीवन की सफलता का आधार बताया। हर श्लोक के साथ हिंदी भावार्थ देकर उन्होंने संस्कृत ज्ञान-परंपरा को डिजिटल युग में सुलभ बनाने का प्रयास किया।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 19 जून को एक्स पर संस्कृत सुभाषित साझा कर कहा — ज्ञान, विवेक और दूरदर्शिता सफलता का आधार हैं।
19 जून के श्लोक में छह गुण — प्रामाणिक ज्ञान, विवेकशीलता, आत्मविश्वास, ओजस्वी वाणी, दूरदर्शिता और नवीन सूझबूझ — को 'कामधेनु' समान बताया गया।
18 जून के सुभाषित में धन को सत्यनिष्ठा, यश को परोपकार, विद्या को अभ्यास और बुद्धि को कर्म का अनुसरण करने वाला बताया।
17 जून के श्लोक में श्रेष्ठ पुरुषों के सम्मान को मनुष्य के आत्मविश्वास का स्रोत बताया गया।
मोदी ने प्रत्येक श्लोक के साथ हिंदी भावार्थ भी साझा किया, जिससे संस्कृत ज्ञान व्यापक पाठकों तक पहुँचा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 19 जून को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए लिखा कि 'ज्ञान, विवेक और दूरदर्शिता जैसे सद्गुण जीवन में सफलता का प्रमुख आधार हैं — इनसे समृद्ध व्यक्ति कठिन से कठिन चुनौतियों में भी विजयी होता है।' यह पोस्ट उनकी हाल की उस श्रृंखला का हिस्सा है जिसमें वे नियमित रूप से संस्कृत श्लोकों के माध्यम से जीवन-दर्शन साझा कर रहे हैं।

19 जून का सुभाषित: छह गुण जो 'कामधेनु' समान हैं

मोदी ने 19 जून को जो श्लोक साझा किया, वह इस प्रकार है — 'शास्त्रे प्रतिष्ठा सहजश्च बोधः प्रागल्भ्यमभ्यस्तगुणा च वाणी। कालानुरोधः प्रतिभानवत्त्वमेते गुणाः कामदुघाः क्रियासु॥' इस श्लोक का अर्थ है कि विषय का प्रामाणिक ज्ञान, स्वाभाविक विवेकशीलता, निर्भीक आत्मविश्वास, अभ्यास से परिष्कृत ओजस्वी वाणी, समय की मांग को पहचानने वाली दूरदर्शिता और नित्य नवीन सूझबूझ — ये छह गुण मानव के प्रत्येक पुरुषार्थ में 'कामधेनु' के समान सिद्ध होते हैं।

18 जून का सुभाषित: सत्य, यश, ज्ञान और बुद्धि का मार्ग

इससे एक दिन पहले 18 जून को मोदी ने लिखा था — 'सत्यानुसारिणी लक्ष्मीः कीर्तिस्त्यागानुसारिणी। अभ्याससारिणी विद्या बुद्धिः कर्मानुसारिणी।।' इस श्लोक का भाव है कि धन सत्यनिष्ठा का अनुसरण करता है, यश परोपकार का, ज्ञान अभ्यास का और बुद्धि कर्म का। गौरतलब है कि इस श्लोक में सफलता को किसी बाहरी संयोग से नहीं, बल्कि आंतरिक आचरण से जोड़ा गया है।

17 जून का सुभाषित: सम्मान से जागता है आत्मविश्वास

बुधवार, 17 जून को प्रधानमंत्री ने लिखा था, 'स्नेहपूर्ण सम्मान और स्वीकार्यता व्यक्ति को गर्व और संतोष का अनुभव कराती है — इससे जहाँ आत्मविश्वास बढ़ता है, वहीं एक नई ऊर्जा और उत्साह का भी संचार होता है।' उन्होंने श्लोक 'त्वत्सम्भावितमात्मानं बहु मन्यामहे वयम्। प्रायः प्रत्ययमाधत्ते स्वगुणेषूत्तमादरः।' साझा किया था, जिसका अर्थ है कि श्रेष्ठ पुरुषों द्वारा प्रदान किया गया सम्मान मनुष्य के भीतर उसके अपने गुणों के प्रति आत्मविश्वास को दृढ़तापूर्वक जागृत कर देता है।

क्यों है यह श्रृंखला उल्लेखनीय

प्रधानमंत्री की यह संस्कृत सुभाषित श्रृंखला लगातार तीन दिनों — 17, 18 और 19 जून — से जारी है। यह ऐसे समय में आई है जब संस्कृत भाषा और भारतीय शास्त्रीय ज्ञान-परंपरा को डिजिटल माध्यमों से पुनर्जीवित करने की व्यापक चर्चा चल रही है। प्रत्येक श्लोक के साथ मोदी ने उसका हिंदी भावार्थ भी प्रस्तुत किया, जिससे यह सामग्री आम पाठक के लिए भी सुलभ बनी।

संपादकीय दृष्टिकोण

इन पोस्टों की व्यापक सार्वजनिक पहुँच यह भी दर्शाती है कि भारतीय जनमानस में शास्त्रीय ज्ञान-परंपरा के प्रति रुचि अभी भी जीवंत है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 19 जून को एक्स पर कौन-सा संस्कृत श्लोक साझा किया?
मोदी ने 'शास्त्रे प्रतिष्ठा सहजश्च बोधः...' श्लोक साझा किया, जिसमें ज्ञान, विवेक, आत्मविश्वास, वाणी, दूरदर्शिता और नवीन सूझबूझ — इन छह गुणों को जीवन में 'कामधेनु' समान बताया गया है।
18 जून को मोदी के सुभाषित का क्या अर्थ था?
'सत्यानुसारिणी लक्ष्मीः...' श्लोक का भाव है कि धन सत्यनिष्ठा का, यश परोपकार का, विद्या अभ्यास का और बुद्धि कर्म का अनुसरण करती है। यह श्लोक सफलता को बाहरी संयोग नहीं, आंतरिक आचरण से जोड़ता है।
17 जून के संस्कृत श्लोक में क्या संदेश था?
'त्वत्सम्भावितमात्मानं...' श्लोक यह बताता है कि श्रेष्ठ व्यक्तियों द्वारा दिया गया सम्मान मनुष्य के भीतर उसके स्वयं के गुणों के प्रति आत्मविश्वास को जागृत करता है। मोदी ने इसे स्नेहपूर्ण स्वीकार्यता और नई ऊर्जा से जोड़ा।
क्या PM मोदी नियमित रूप से संस्कृत सुभाषित साझा करते हैं?
हाँ, मोदी ने 17, 18 और 19 जून को लगातार तीन दिन एक्स पर संस्कृत श्लोक और उनके हिंदी भावार्थ साझा किए। यह उनकी सोशल मीडिया पर सांस्कृतिक ज्ञान साझा करने की एक सतत श्रृंखला का हिस्सा है।
इन सुभाषितों का आम पाठकों के लिए क्या महत्व है?
प्रत्येक श्लोक के साथ हिंदी भावार्थ देने से संस्कृत में रुचि न रखने वाले पाठक भी इन विचारों को समझ सकते हैं। ये सुभाषित जीवन-मूल्यों — ज्ञान, सत्य, परोपकार और कर्म — को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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