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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: 'धैर्य और विवेक से ही खुलते हैं सुख-समृद्धि के द्वार'

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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: 'धैर्य और विवेक से ही खुलते हैं सुख-समृद्धि के द्वार'

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने 16 जून को एक्स पर संस्कृत श्लोक साझा किया — 'सहसा विदधीत न क्रियाम्' — यह संदेश देते हुए कि विवेकपूर्ण निर्णय ही समृद्धि का द्वार खोलते हैं। यह उनकी नियमित सुभाषित-श्रृंखला की नई कड़ी है, जिसमें 12 और 15 जून के संदेश भी शामिल हैं।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 16 जून 2026 को एक्स पर संस्कृत सुभाषित साझा किया।
श्लोक का संदेश: बिना विचार किए काम करना विपत्ति को बुलावा है; विवेकशील व्यक्ति को समृद्धि स्वयं वरण करती है।
15 जून को नवाचार और विविधता पर, 12 जून को नारी शक्ति पर सुभाषित साझा किया गया था।
मोदी नियमित रूप से एक्स पर संस्कृत श्लोकों के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय ज्ञान को समकालीन संदर्भ में प्रस्तुत करते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 16 जून 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए धैर्य, विवेक और दूरदर्शिता को सफलता का मूल आधार बताया। उन्होंने लिखा कि सोच-समझकर उठाया गया कदम ही जीवन में सुख और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

साझा किया गया श्लोक और उसका अर्थ

मोदी ने अपनी पोस्ट में संस्कृत श्लोक 'सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम्। वृणते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वयमेव सम्पदः॥' साझा किया। इस श्लोक का भाव है कि किसी भी कार्य को बिना विचार किए नहीं करना चाहिए, क्योंकि अविवेकपूर्ण आचरण बड़ी विपत्तियों को न्योता देता है। इसके विपरीत, जो व्यक्ति सोच-विचारकर कदम उठाता है, सफलता और समृद्धि स्वयं उसका वरण करती हैं।

प्रधानमंत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'धैर्य, विवेक और दूरदर्शिता से किए गए कार्यों से ही सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं, इसलिए हर निर्णय में पूरी समझदारी जरूरी है, क्योंकि सोच-समझकर उठाया गया कदम ही सफलता का आधार बनता है।'

सुभाषित साझा करने की श्रृंखला

यह पोस्ट मोदी की हालिया सुभाषित-श्रृंखला की कड़ी है। 15 जून को उन्होंने विविधता और नवाचार पर केंद्रित एक सुभाषित साझा किया था, जिसमें लिखा था कि 'हर मिट्टी के ढेले में अलग सोच; हर जलाशय में ताजा पानी।' साथ में एक वीडियो के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि प्रत्येक व्यक्ति की सर्जनात्मक दृष्टि अलग होती है और इन्हीं भिन्न-भिन्न क्षमताओं के समन्वय से नवाचार और प्रगति संभव होती है।

इससे पूर्व 12 जून को प्रधानमंत्री ने नारी शक्ति को समर्पित एक श्लोक 'नारी त्रैलोक्यजननी नारी त्रैलोक्यरूपिणी। नारी त्रिभुवनाधारा, नारी शक्तिस्वरूपिणी॥' साझा किया था। इस श्लोक के माध्यम से उन्होंने भारत की माताओं, बहनों और बेटियों को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया था।

संदेश का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी नियमित रूप से एक्स पर संस्कृत सुभाषितों के माध्यम से नागरिकों से जुड़ते हैं। यह परंपरा भारतीय शास्त्रीय ज्ञान को समकालीन जीवन-मूल्यों से जोड़ने का प्रयास मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के संदेश सामाजिक और नैतिक चेतना को प्रोत्साहित करने का एक सांस्कृतिक माध्यम हैं।

आगे क्या

प्रधानमंत्री की यह सुभाषित-श्रृंखला सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा हो रही है और विभिन्न वर्गों में इन संदेशों की सराहना की जा रही है। आने वाले दिनों में भी इस श्रृंखला के जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आलोचक यह भी पूछते हैं कि क्या ये नीतिगत निर्णयों की जवाबदेही से ध्यान हटाने का माध्यम तो नहीं। फिर भी, यह स्वीकार करना होगा कि भारतीय शास्त्रीय ज्ञान को करोड़ों लोगों तक पहुँचाने का यह प्रयास सांस्कृतिक दृष्टि से उल्लेखनीय है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 16 जून को एक्स पर कौन-सा संस्कृत श्लोक साझा किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने 'सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम्। वृणते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वयमेव सम्पदः॥' श्लोक साझा किया। इसका अर्थ है कि बिना सोचे-समझे कार्य करना विपत्ति को जन्म देता है, जबकि विवेकशील व्यक्ति को समृद्धि स्वयं प्राप्त होती है।
मोदी के इस सुभाषित का मुख्य संदेश क्या है?
मुख्य संदेश यह है कि धैर्य, विवेक और दूरदर्शिता से किए गए कार्य ही सुख-समृद्धि का आधार बनते हैं। हर निर्णय में समझदारी आवश्यक है और सोच-समझकर उठाया गया कदम ही सफलता की गारंटी देता है।
PM मोदी ने इससे पहले कौन-से सुभाषित साझा किए थे?
15 जून को उन्होंने नवाचार और विविधता पर केंद्रित सुभाषित साझा किया था। 12 जून को नारी शक्ति को समर्पित श्लोक 'नारी त्रैलोक्यजननी...' पोस्ट किया था, जिसमें नारी को तीनों लोकों की जननी और शक्ति का स्वरूप बताया गया।
PM मोदी एक्स पर नियमित रूप से संस्कृत सुभाषित क्यों साझा करते हैं?
यह भारतीय शास्त्रीय ज्ञान को डिजिटल मंच के माध्यम से आम जनता तक पहुँचाने का प्रयास माना जाता है। इन संदेशों के जरिए प्रधानमंत्री सामाजिक, नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों को समकालीन जीवन से जोड़ते हैं।
16 जून के श्लोक का हिंदी में क्या अर्थ है?
इस श्लोक का अर्थ है कि किसी भी कार्य को बिना सोचे-समझे नहीं करना चाहिए, क्योंकि अविवेकपूर्ण आचरण बड़ी विपत्तियों का कारण बनता है। जो व्यक्ति अच्छी तरह विचार करके काम करता है, गुण और समृद्धि स्वयं उसका चुनाव करती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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