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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: करुणा से आत्म-सम्मान, संतोष से सच्ची खुशी

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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: करुणा से आत्म-सम्मान, संतोष से सच्ची खुशी

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने 24 अगस्त को एक्स पर संस्कृत श्लोक साझा करते हुए कहा — करुणा आत्म-सम्मान देती है, संतोष सच्ची खुशी। यह उनकी नियमित सुभाषित-शृंखला की नई कड़ी है, जो प्राचीन भारतीय ज्ञान को डिजिटल युग में प्रासंगिक बनाती है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अगस्त 2026 को एक्स पर संस्कृत सुभाषित साझा किया।
श्लोक का संदेश: करुणा से आत्म-सम्मान, संतोष से तृष्णा पर विजय, पुरुषार्थ से आलस्य का नाश।
21 अगस्त को साझा श्लोक में निःस्वार्थ सेवा और नदियों के प्रवाह का संदेश था।
20 अगस्त के सुभाषित में संकट में उत्साह न खोने का ज्ञान दिया गया था।
यह शृंखला प्राचीन भारतीय ग्रंथों के जीवन-मूल्यों को डिजिटल मंच पर प्रसारित करने का प्रयास है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अगस्त 2026, सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें उन्होंने लिखा — 'करुणा से आत्म-सम्मान और संतोष से सच्ची खुशी मिलती है। इसी भाव से समाज में सहयोग और सद्भाव की डोर और सशक्त होती है।' यह उनकी हालिया सुभाषित-शृंखला की नवीनतम कड़ी है, जिसमें वे नियमित रूप से प्राचीन भारतीय ज्ञान को समकालीन जीवन-मूल्यों से जोड़ते आए हैं।

साझा किया गया संस्कृत श्लोक

प्रधानमंत्री ने जो संस्कृत श्लोक पोस्ट किया, वह इस प्रकार है — 'कारुण्येनात्मनो मानं तृष्णां च परितोषतः। उत्थानेन जयेत्तन्द्रीं वितर्कं निश्चयाज्जयेत्॥' इसका हिंदी भावार्थ है कि दूसरों के प्रति करुणा रखने से आत्म-सम्मान की प्राप्ति होती है, संतोषी स्वभाव से तृष्णा पर विजय मिलती है, पुरुषार्थ से आलस्य दूर होता है और दृढ़ निश्चय से आधारहीन आशंकाओं पर अवश्य जीत होती है।

पिछले सुभाषितों की शृंखला

गौरतलब है कि मोदी ने 21 अगस्त को भी एक सुभाषित साझा किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था — 'नदियों का अविरल प्रवाह सिखाता है कि हम किस प्रकार अपने सामर्थ्य का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की यही भावना राष्ट्र को नई दिशा देती है।' उस पोस्ट में उन्होंने संस्कृत श्लोक 'जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः। इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥' साझा किया था, जिसका आशय था कि मनुष्य को अपना जीवन सदैव दूसरों की सेवा के लिए समर्पित करना चाहिए — जिस प्रकार नदियाँ निःस्वार्थ बहकर अंततः समुद्र में विलीन हो जाती हैं।

इससे एक दिन पूर्व, 20 अगस्त को, प्रधानमंत्री ने श्लोक 'आपत्काले च कष्टेऽपि नोत्साहस्त्यज्यते बुधैः।' साझा किया था, जिसका भाव था कि बुद्धिमान व्यक्ति संकट और कठिन परिस्थितियों में भी अपना उत्साह नहीं खोते।

सांस्कृतिक एवं सामाजिक संदेश

यह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर प्रायः नकारात्मकता और विभाजनकारी विमर्श हावी रहते हैं। प्रधानमंत्री की यह सुभाषित-शृंखला प्राचीन भारतीय ग्रंथों से सकारात्मक जीवन-दर्शन को डिजिटल मंच पर प्रसारित करने का प्रयास मानी जा रही है। करुणा, संतोष और निःस्वार्थ सेवा जैसे मूल्य भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के केंद्र में रहे हैं और इन श्लोकों के माध्यम से उन्हें आधुनिक संदर्भ में प्रासंगिक बनाया जा रहा है।

आगे की दिशा

प्रधानमंत्री मोदी की यह सुभाषित-परंपरा लगातार जारी है और इसे व्यापक सामाजिक स्वीकृति मिल रही है। आने वाले दिनों में भी इस शृंखला के अंतर्गत नए श्लोकों और उनके जीवन-संदेशों के साझा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विशेषकर तब जब सोशल मीडिया पर राजनीतिक ध्रुवीकरण चरम पर हो। हालाँकि, यह भी विचारणीय है कि इन मूल्यों — करुणा, संतोष, निःस्वार्थ सेवा — की नीतिगत परिणतियाँ क्या हैं और क्या ये संदेश शासन के व्यावहारिक धरातल पर भी उतने ही मुखर हैं।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 24 अगस्त को कौन-सा सुभाषित साझा किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने 24 अगस्त 2026 को एक्स पर संस्कृत श्लोक 'कारुण्येनात्मनो मानं तृष्णां च परितोषतः।' साझा किया, जिसका भाव है कि करुणा से आत्म-सम्मान और संतोष से सच्ची खुशी मिलती है। उन्होंने यह भी लिखा कि इसी भाव से समाज में सहयोग और सद्भाव की डोर सशक्त होती है।
मोदी के सुभाषित में साझा संस्कृत श्लोक का अर्थ क्या है?
श्लोक 'कारुण्येनात्मनो मानं तृष्णां च परितोषतः। उत्थानेन जयेत्तन्द्रीं वितर्कं निश्चयाज्जयेत्॥' का अर्थ है — दूसरों के प्रति करुणा रखने से आत्म-सम्मान मिलता है, संतोष से तृष्णा पर विजय होती है, पुरुषार्थ से आलस्य दूर होता है और दृढ़ निश्चय से आधारहीन आशंकाओं पर जीत मिलती है।
PM मोदी की सुभाषित-शृंखला में पहले क्या साझा किया गया था?
21 अगस्त को मोदी ने नदियों के निःस्वार्थ प्रवाह पर आधारित श्लोक साझा किया था, जो मानव जीवन को परोपकार के लिए समर्पित करने का संदेश देता है। 20 अगस्त को उन्होंने संकट में उत्साह न खोने का संदेश देने वाला श्लोक पोस्ट किया था।
PM मोदी एक्स पर नियमित सुभाषित क्यों साझा करते हैं?
प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल प्राचीन भारतीय ग्रंथों के जीवन-मूल्यों को डिजिटल मंच के माध्यम से व्यापक जनमानस तक पहुँचाने का प्रयास है। इसमें संस्कृत श्लोक के साथ हिंदी भावार्थ भी दिया जाता है, ताकि सामान्य पाठक भी इसे समझ सकें।
मोदी के सुभाषित में करुणा और संतोष का क्या महत्व बताया गया?
प्रधानमंत्री के अनुसार, करुणा-भाव आत्म-सम्मान का स्रोत है और संतोष सच्ची खुशी का आधार है। इन दोनों गुणों को उन्होंने सामाजिक सहयोग और सद्भाव की नींव बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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