10 अगस्त 2026
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पीएम मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: 'सत्य, शुभ और ज्ञानवर्धक वचन सुनें'

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पीएम मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: 'सत्य, शुभ और ज्ञानवर्धक वचन सुनें'

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने 10 अगस्त को एक्स पर ऋग्वेद का सुभाषित साझा कर नागरिकों से सत्य और जनहितकारी सूचनाओं के प्रसार का आह्वान किया। यह 6 और 7 अगस्त के श्लोकों की निरंतरता में है — एक ऐसी श्रृंखला जो प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक सार्वजनिक विमर्श से जोड़ती है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 अगस्त 2026 को एक्स पर ऋग्वेद का सुभाषित साझा किया।
श्लोक का संदेश: सत्य, शुभ और ज्ञानवर्धक वचन सुनें; राष्ट्र को जागरूक, सशक्त और समरस बनाएं।
7 अगस्त को परोपकार पर श्लोक और 6 अगस्त को मातृभूमि-वंदना का श्लोक साझा किया गया था।
यह श्रृंखला प्रधानमंत्री की वैदिक ज्ञान को सोशल मीडिया पर नियमित साझा करने की परंपरा का हिस्सा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें उन्होंने नागरिकों से सत्य, शुभ और ज्ञानवर्धक वचन ग्रहण करने तथा कल्याणकारी विचारों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। यह उनकी नियमित रूप से सोशल मीडिया पर प्राचीन भारतीय ज्ञान-परंपरा साझा करने की श्रृंखला का हिस्सा है।

मोदी का सोमवार का सुभाषित

प्रधानमंत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा: 'हम सत्य, शुभ और ज्ञानवर्धक वचन सुनें, कल्याणकारी विचारों को अपनाएं। स्वस्थ शरीर, उत्तम आचरण और श्रेष्ठ गुणों के साथ जीवन को लोकहित में समर्पित करें तथा सत्य, प्रामाणिक और जनहितकारी सूचनाओं का प्रसार कर राष्ट्र और समाज को जागरूक, सशक्त तथा समरस बनाएं।'

इसके साथ उन्होंने ऋग्वेद का यह श्लोक भी साझा किया: 'भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः॥ स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः॥' — जिसका आशय है कि हम अपने कानों से शुभ सुनें, नेत्रों से शुभ देखें, दृढ़ अंगों और स्वस्थ शरीर के साथ देवताओं की स्तुति करते हुए ईश्वर-प्रदत्त आयु को सार्थक बनाएं।

पिछले सुभाषितों की श्रृंखला

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने 7 अगस्त को भी एक संस्कृत श्लोक साझा किया था: 'किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभिः कुमुदावबोधनम्। स्वभाव एवोन्नतचेतसां सतां परोपकारव्यसनं हि जीवितम्॥' इस श्लोक का अर्थ है कि जिस प्रकार चंद्रमा बिना किसी प्रतिफल की अपेक्षा के अपनी किरणों से कुमुदिनी को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार महान और उदार हृदय वाले सज्जन स्वाभाविक रूप से परोपकार करते हैं।

इससे पहले 6 अगस्त को प्रधानमंत्री ने मातृभूमि-वंदना का श्लोक साझा किया था: 'विश्वस्वं मातरमोषधीनां ध्रुवां भूमिं पृथिवीं धर्मणा धृताम्। शिवां स्योनामनु चरेम विश्वहा॥' जिसका अर्थ है कि सभी श्रेष्ठ वनस्पतियों और औषधियों को धारण करने वाली, धर्म से पोषित और कल्याणकारी मातृभूमि की हम सदैव सेवा करें।

सुभाषित-परंपरा का महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं और असत्य के प्रसार को लेकर व्यापक चिंता जताई जा रही है। प्रधानमंत्री का 'सत्य और जनहितकारी सूचनाओं के प्रसार' पर जोर इस संदर्भ में विशेष रूप से प्रासंगिक माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री द्वारा प्राचीन भारतीय ग्रंथों — वेद, उपनिषद और नीतिशास्त्र — से नियमित रूप से सुभाषित साझा करने की यह परंपरा उनके सांस्कृतिक कूटनीति और 'विरासत पर गर्व' के व्यापक संदेश से जुड़ती है।

आगे की दिशा

प्रधानमंत्री की यह सुभाषित-श्रृंखला आगे भी जारी रहने की संभावना है, जो भारतीय दर्शन और वैदिक ज्ञान को आधुनिक सार्वजनिक विमर्श से जोड़ने का प्रयास करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी व्याख्या और चयन पर व्यापक सार्वजनिक बहस अभी भी अनुपस्थित है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम मोदी ने 10 अगस्त को एक्स पर कौन-सा सुभाषित साझा किया?
पीएम मोदी ने 10 अगस्त को ऋग्वेद का श्लोक 'भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा...' साझा किया, जिसका आशय है कि हम शुभ सुनें, शुभ देखें और स्वस्थ शरीर के साथ जीवन को लोकहित में समर्पित करें।
पीएम मोदी ने 7 अगस्त को कौन-सा श्लोक पोस्ट किया था?
7 अगस्त को मोदी ने परोपकार पर आधारित श्लोक 'किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया...' साझा किया था, जिसका अर्थ है कि महान व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ के दूसरों का हित करते हैं, जैसे चंद्रमा बिना अपेक्षा के कुमुदिनी को प्रकाशित करता है।
6 अगस्त को मोदी ने एक्स पर क्या लिखा था?
6 अगस्त को प्रधानमंत्री ने मातृभूमि-वंदना का श्लोक 'विश्वस्वं मातरमोषधीनां...' साझा किया था, जिसमें सभी औषधियों और वनस्पतियों को धारण करने वाली धर्मपोषित मातृभूमि की सेवा का संकल्प व्यक्त किया गया है।
पीएम मोदी नियमित रूप से संस्कृत सुभाषित क्यों साझा करते हैं?
यह प्राचीन भारतीय ज्ञान-परंपरा को आधुनिक डिजिटल मंच पर प्रस्तुत करने की उनकी सुविचारित पहल है। इसके माध्यम से वे वैदिक दर्शन, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक जनसमुदाय तक पहुँचाने का प्रयास करते हैं।
इस सुभाषित-श्रृंखला का राष्ट्रीय महत्व क्या है?
यह श्रृंखला 'सत्य और जनहितकारी सूचनाओं के प्रसार' पर जोर देती है, जो सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं की चुनौती के संदर्भ में प्रासंगिक है। यह भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति और 'विरासत पर गर्व' के व्यापक सरकारी आख्यान से भी जुड़ती है।
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