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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: 'कार्य पूर्ण होने तक योजना गुप्त रखने वाला ही पंडित'

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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: 'कार्य पूर्ण होने तक योजना गुप्त रखने वाला ही पंडित'

सारांश

PM मोदी ने मंगलवार को एक्स पर साझा किया — 'कार्य पूर्ण होने तक जिसकी योजना गुप्त रहे, वही सच्चा पंडित है।' यह उनकी हालिया सुभाषित-श्रृंखला की कड़ी है, जिसमें 27 अगस्त से अब तक चार अलग-अलग संस्कृत श्लोक साझा किए जा चुके हैं।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 1 सितंबर को एक्स पर संस्कृत श्लोक 'यस्य कृत्यं न जानन्ति…' साझा किया, जो संयम और गोपनीयता को बुद्धिमत्ता का प्रतीक बताता है।
सोमवार को साझा श्लोक में बताया गया कि मनुष्य का मन उसी दिशा में जाता है जिस विषय पर वह बार-बार विचार करता है।
28 अगस्त का सुभाषित रक्षा-सूत्र के महत्व पर केंद्रित था — जय, सुख, आरोग्य और ऐश्वर्य का प्रदाता।
27 अगस्त के श्लोक में परंपरा, श्रेष्ठ कर्म और सदाचार के पालन का संदेश था।
यह श्रृंखला प्राचीन भारतीय ज्ञान को डिजिटल माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाने के प्रयास का हिस्सा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 1 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें संयम और विवेक को सच्ची बुद्धिमत्ता की कसौटी बताया गया है। यह श्लोक उनकी हालिया परंपरा का हिस्सा है, जिसके तहत वे नियमित रूप से प्राचीन भारतीय ज्ञान को डिजिटल माध्यम से जन-जन तक पहुँचा रहे हैं।

मंगलवार का सुभाषित और उसका अर्थ

मोदी ने एक्स पर संस्कृत श्लोक — 'यस्य कृत्यं न जानन्ति मन्त्रं वा मन्त्रितं परे। कृतमेवास्य जानन्ति स वै पण्डित उच्यते॥' — साझा किया। इस श्लोक का भाव यह है कि जिस व्यक्ति की योजनाओं, गोपनीय विचारों और रणनीतियों का ज्ञान दूसरों को तब तक नहीं होता जब तक वे सफलतापूर्वक पूर्ण न हो जाएँ — ऐसे संयमी, विवेकी और गंभीर व्यक्ति को ही वास्तव में पंडित अर्थात् बुद्धिमान कहा जाता है।

सोमवार का सुभाषित: विचारों की दिशा तय करती है मन की गति

इससे एक दिन पहले सोमवार को प्रधानमंत्री ने श्लोक साझा किया था — 'यद् यदेव प्रसक्तं हि वितर्कयति मानवः। अभ्यासात् तेन तेनास्य नतिर्भवति चेतसः॥' — जिसका अर्थ है कि मनुष्य जिस विषय के बारे में बार-बार सोचता है, उसका मन धीरे-धीरे उसी दिशा में आकर्षित होने लगता है। इस श्लोक के माध्यम से शुभ और कल्याणकारी विचारों के चिंतन पर बल दिया गया।

28 अगस्त: रक्षा-पर्व पर विशेष सुभाषित

28 अगस्त को प्रधानमंत्री ने रक्षा-सूत्र के महत्व पर केंद्रित श्लोक — 'एष प्रभावो रक्षायाः कथितस्ते युधिष्ठिर। जयदः सुखदश्चैव पुत्रारोग्यधनप्रदः॥' — एक्स पर साझा किया था। इस श्लोक में रक्षा सूत्र को जय, सुख, संतति, आरोग्य एवं ऐश्वर्य का प्रदाता बताया गया है।

27 अगस्त: परंपरा और श्रेष्ठ कर्म का संदेश

27 अगस्त को साझा किए गए सुभाषित में मोदी ने लिखा था कि मनुष्य को अपनी परंपराओं और ज्ञान को आगे बढ़ाते हुए श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए। उन्होंने बुद्धि से निर्मित न्यायपूर्ण और प्रकाशमय मार्ग के अनुसरण तथा श्रेष्ठ जनों के सदाचार को जीवन में अपनाने का आह्वान किया था।

डिजिटल माध्यम से संस्कृत ज्ञान का प्रसार

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी पिछले कुछ हफ्तों से एक्स पर नियमित रूप से संस्कृत सुभाषित साझा कर रहे हैं। यह पहल प्राचीन भारतीय साहित्य और दर्शन को समकालीन डिजिटल पीढ़ी से जोड़ने के व्यापक सांस्कृतिक प्रयास का हिस्सा प्रतीत होती है। आने वाले दिनों में इस श्रृंखला के जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

'गोपनीयता' और 'श्रेष्ठ कर्म' जैसे संदेशों को अप्रत्यक्ष राजनीतिक संकेत का रूप देता है। मुख्यधारा की मीडिया इन पोस्ट को प्रायः सांस्कृतिक खबर के रूप में कवर करती है, जबकि इनका सांकेतिक राजनीतिक संदर्भ प्रायः अनदेखा रह जाता है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 1 सितंबर को कौन-सा संस्कृत श्लोक साझा किया?
मोदी ने एक्स पर 'यस्य कृत्यं न जानन्ति मन्त्रं वा मन्त्रितं परे। कृतमेवास्य जानन्ति स वै पण्डित उच्यते॥' श्लोक साझा किया। इसका अर्थ है कि जिस व्यक्ति की योजनाएँ और रणनीतियाँ सफल होने तक गुप्त रहती हैं, वही सच्चा पंडित अर्थात् बुद्धिमान कहलाता है।
सोमवार को PM मोदी ने क्या सुभाषित साझा किया था?
सोमवार को मोदी ने 'यद् यदेव प्रसक्तं हि वितर्कयति मानवः…' श्लोक साझा किया, जिसका अर्थ है कि मनुष्य जिस विषय पर बार-बार सोचता है, उसका मन उसी दिशा में आकर्षित होता है। इसलिए सदैव शुभ और कल्याणकारी विचार करने का संदेश दिया गया।
28 अगस्त को PM मोदी के सुभाषित का विषय क्या था?
28 अगस्त को साझा श्लोक रक्षा-सूत्र के महत्व पर आधारित था। इसमें बताया गया कि रक्षा सूत्र जय, सुख, संतति, आरोग्य और ऐश्वर्य प्रदान करने वाला है।
PM मोदी नियमित रूप से संस्कृत सुभाषित क्यों साझा करते हैं?
यह पहल प्राचीन भारतीय ज्ञान और संस्कृत साहित्य को डिजिटल माध्यम से समकालीन पीढ़ी तक पहुँचाने के व्यापक सांस्कृतिक प्रयास का हिस्सा प्रतीत होती है। 27 अगस्त से 1 सितंबर के बीच वे कम से कम चार अलग-अलग सुभाषित साझा कर चुके हैं।
27 अगस्त को PM मोदी के सुभाषित में क्या संदेश था?
27 अगस्त को मोदी ने परंपरा, श्रेष्ठ कर्म और सदाचार पर केंद्रित श्लोक साझा किया। इसमें मनुष्य को अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए न्यायपूर्ण मार्ग पर चलने और दिव्य गुणों से संपन्न जीवन जीने का आह्वान किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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