31 अगस्त 2026
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PM मोदी ने एक्स पर शेयर किया संस्कृत सुभाषित: 'शुभ विचारों का चिंतन करें'

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PM मोदी ने एक्स पर शेयर किया संस्कृत सुभाषित: 'शुभ विचारों का चिंतन करें'

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने 31 अगस्त को एक्स पर संस्कृत श्लोक साझा कर संदेश दिया कि मन जिस दिशा में बार-बार सोचता है, उसी ओर झुकता है — इसलिए सदा शुभ विचार करें। यह इस सप्ताह उनकी सुभाषित-श्रृंखला का चौथा पोस्ट है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त को एक्स पर संस्कृत श्लोक 'यद् यदेव प्रसक्तं हि वितर्कयति मानवः…' साझा किया।
श्लोक का संदेश: मनुष्य जिस विषय पर बार-बार चिंतन करता है, मन उसी ओर आकर्षित होता है — इसलिए शुभ और कल्याणकारी विचार करें।
28 अगस्त को रक्षा सूत्र पर श्लोक, 27 अगस्त को श्रेष्ठ कर्म पर, और 26 अगस्त को परस्पर सम्मान पर सुभाषित साझा किया गया था।
यह श्रृंखला भारतीय शास्त्रीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक सोशल मीडिया से जोड़ने का प्रयास है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें मनुष्य के विचारों और मन की दिशा के बीच के गहरे संबंध को रेखांकित किया गया है। उन्होंने श्लोक 'यद् यदेव प्रसक्तं हि वितर्कयति मानवः। अभ्यासात् तेन तेनास्य नतिर्भवति चेतसः॥' पोस्ट किया।

श्लोक का अर्थ और संदेश

इस संस्कृत श्लोक का भाव यह है कि मनुष्य जिस विषय या वस्तु के बारे में बार-बार चिंतन करता है, उसका मन धीरे-धीरे उसी दिशा में झुकने लगता है। इसीलिए प्रधानमंत्री ने संदेश दिया कि हमें सदैव अच्छे, शुभ और कल्याणकारी विचारों का ही मनन करना चाहिए। यह श्लोक मानसिक अनुशासन और सकारात्मक चिंतन की भारतीय दार्शनिक परंपरा को प्रतिबिंबित करता है।

पिछले सुभाषितों की श्रृंखला

गौरतलब है कि मोदी इस सप्ताह लगातार संस्कृत सुभाषित साझा करते रहे हैं। 28 अगस्त को उन्होंने 'एष प्रभावो रक्षायाः कथितस्ते युधिष्ठिर। जयदः सुखदश्चैव पुत्रारोग्यधनप्रदः॥' श्लोक पोस्ट किया था, जो रक्षा सूत्र के महत्व को दर्शाता है — इसे जय, सुख, संतति, आरोग्य और ऐश्वर्य का प्रदाता बताया गया है।

27 अगस्त को साझा किए गए सुभाषित में मोदी ने लिखा कि मनुष्य को अपनी परंपराओं और ज्ञान को आगे बढ़ाते हुए श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए, बुद्धि से निर्मित न्यायपूर्ण और प्रकाशमय मार्ग का अनुसरण करना चाहिए तथा दिव्य गुणों से संपन्न जनों का निर्माण करना चाहिए।

26 अगस्त को उन्होंने 'ज्ञानवृद्धाः प्रशंसन्ति शुश्रूषन्तः परस्परम्। विनिवृत्ताभिसन्धानाः सुखमेधन्ति सर्वशः॥' श्लोक साझा किया था, जिसका संदेश था कि ज्ञानी और सज्जन व्यक्ति परस्पर सम्मान, सेवा और सद्भाव से जीवन में सुखपूर्वक उन्नति प्राप्त करते हैं।

सांस्कृतिक और सामाजिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल माध्यमों पर नकारात्मक सामग्री की बाढ़ को लेकर व्यापक सामाजिक चर्चा चल रही है। प्रधानमंत्री का यह संस्कृत-श्लोक अभियान भारत की शास्त्रीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक सोशल मीडिया से जोड़ने का एक सुसंगत प्रयास प्रतीत होता है। उनके एक्स अकाउंट पर इस श्रृंखला को व्यापक पाठक वर्ग मिल रहा है।

आगे की दिशा

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस श्रृंखला को जारी रखने के संकेत मिलते हैं। यह पहल भारतीय दर्शन और संस्कृत साहित्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब ये श्लोक एक वैकल्पिक, भारत-केंद्रित विमर्श प्रस्तुत करते हैं। हालाँकि, इस पहल का दीर्घकालिक नीतिगत या सामाजिक प्रभाव मापना कठिन है — यह प्रश्न बना रहता है कि क्या ये पोस्ट केवल प्रतीकात्मक हैं या इनके पीछे कोई ठोस सांस्कृतिक कार्यक्रम भी है।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 31 अगस्त को कौन-सा संस्कृत श्लोक साझा किया?
मोदी ने 'यद् यदेव प्रसक्तं हि वितर्कयति मानवः। अभ्यासात् तेन तेनास्य नतिर्भवति चेतसः॥' श्लोक एक्स पर पोस्ट किया। इसका अर्थ है कि मनुष्य जिस विषय पर बार-बार सोचता है, मन धीरे-धीरे उसी दिशा में झुकने लगता है, इसलिए शुभ विचारों का चिंतन करना चाहिए।
इस सप्ताह मोदी ने कितने सुभाषित साझा किए?
26 अगस्त से 31 अगस्त के बीच मोदी ने कुल चार संस्कृत सुभाषित एक्स पर साझा किए — 26, 27, 28 और 31 अगस्त को। प्रत्येक श्लोक एक अलग जीवन-मूल्य — सम्मान, श्रेष्ठ कर्म, रक्षा और शुभ चिंतन — पर केंद्रित था।
28 अगस्त को मोदी ने कौन-सा श्लोक साझा किया था?
28 अगस्त को मोदी ने 'एष प्रभावो रक्षायाः कथितस्ते युधिष्ठिर। जयदः सुखदश्चैव पुत्रारोग्यधनप्रदः॥' श्लोक साझा किया था। यह रक्षा सूत्र के महत्व पर आधारित था, जिसे जय, सुख, संतति, आरोग्य और ऐश्वर्य का प्रदाता बताया गया है।
मोदी की संस्कृत सुभाषित श्रृंखला का उद्देश्य क्या है?
यह श्रृंखला भारतीय शास्त्रीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत साहित्य को आधुनिक सोशल मीडिया मंच के माध्यम से व्यापक जनमानस तक पहुँचाने का प्रयास प्रतीत होती है। प्रत्येक श्लोक के साथ हिंदी में उसका अर्थ और जीवन-संदेश भी दिया जाता है।
26 अगस्त को साझा किए गए श्लोक का क्या अर्थ था?
26 अगस्त को 'ज्ञानवृद्धाः प्रशंसन्ति शुश्रूषन्तः परस्परम्…' श्लोक साझा किया गया था। इसका अर्थ था कि ज्ञानी और सज्जन व्यक्ति परस्पर सम्मान, सेवा और सद्भाव का व्यवहार करते हुए व्यक्तिगत लाभ से मुक्त होकर जीवन में सुखपूर्वक उन्नति प्राप्त करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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