3 अगस्त 2026
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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: 'विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य न खोएं'

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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: 'विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य न खोएं'

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने 3 अगस्त को एक्स पर संस्कृत सुभाषित साझा किया — संदेश है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और कर्म ही मनुष्य का सच्चा सहारा है। यह उनकी नियमित सुभाषित-श्रृंखला का हिस्सा है, जिसमें 28 और 29 जुलाई के श्लोक भी शामिल हैं।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 अगस्त 2026 को एक्स पर संस्कृत सुभाषित साझा किया।
श्लोक का संदेश: भाग्य के प्रतिकूल होने पर भी धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए; कर्म और धैर्य से खोई स्थिति पुनः प्राप्त होती है।
29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर गुरु के छह स्वरूपों पर आधारित श्लोक साझा किया गया था।
28 जुलाई को प्रकृति-संरक्षण और धर्म-सामंजस्य पर केंद्रित संस्कृत श्लोक पोस्ट किया गया था।
यह श्रृंखला भारतीय दर्शन और संस्कृत साहित्य को डिजिटल मंच पर प्रसारित करने की सुसंगत पहल है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 अगस्त 2026, सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने का संदेश दिया गया है। यह पोस्ट उनकी नियमित सुभाषित-श्रृंखला का हिस्सा है, जिसके माध्यम से वे भारतीय दर्शन और संस्कृत साहित्य के सूक्तियों को व्यापक जनमानस तक पहुँचाते हैं।

आज का सुभाषित और उसका अर्थ

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर निम्नलिखित श्लोक साझा किया:

'त्याज्यं न धैर्यं विधुरेऽपि दैवे धैर्यात्कदाचित्स्थितिमाप्नुयात्सः। याते समुद्रेऽपि च पोतभङ्गे सांयात्रिको वाञ्छति कर्म एव।।'

इस श्लोक का भाव यह है कि भाग्य के प्रतिकूल होने पर भी मनुष्य को धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि धैर्य के बल पर वह खोई हुई अनुकूल स्थिति पुनः प्राप्त कर सकता है। जिस प्रकार समुद्र के मध्य जहाज टूट जाने पर भी एक कुशल नाविक हिम्मत नहीं हारता और जीवित रहने के प्रयास में जुटा रहता है, उसी प्रकार संकट में कर्म और धैर्य ही मनुष्य का सच्चा सहारा है।

पिछले सुभाषितों की श्रृंखला

29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर देशवासियों को बधाई देते हुए लिखा था कि गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि शिष्यों में सकारात्मक ऊर्जा और सुसंस्कारों का संचार भी करते हैं। उन्होंने श्लोक साझा किया था:

'प्रेरकः सूचकश्चैव वाचको दर्शकस्तथा। शिक्षकः बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः॥'

इस श्लोक में गुरु के छह स्वरूपों का वर्णन है — जो प्रेरणा दे, सही दिशा का संकेत दे, ज्ञान का उपदेश करे, उचित मार्ग दिखाए, शिक्षा प्रदान करे और आत्मविकास का बोध कराए।

इससे एक दिन पूर्व, 28 जुलाई को, प्रकृति-संरक्षण पर केंद्रित सुभाषित साझा करते हुए उन्होंने लिखा था कि प्रकृति के सम्मान में ही मानवता का कल्याण निहित है। उन्होंने संस्कृत श्लोक साझा किया था:

'लोकपालाश्च ते सर्वे वासवप्रमुखास्तथा। ऋतवः षट् च ते सर्वे मासाः संवत्सराः क्षपाः॥ दिनानि च मुहूर्ताश्च स्वस्ति कुर्वन्तु ते सदा। श्रुतिः स्मृतिश्च धर्मश्च पातु त्वां पुत्र सर्वतः॥'

इस श्लोक का भाव है कि प्रकृति और धर्म के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन ही सुख और मंगल का आधार है — दिशाओं के देवता, ऋतुएं, मास, वर्ष, और शुभ मुहूर्त सदा कल्याणकारी रहें तथा वेद, स्मृतियां और धर्म सर्वत्र रक्षा करें।

सुभाषित-साझाकरण की परंपरा और इसका महत्व

प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल संस्कृत के प्राचीन ज्ञान को आधुनिक डिजिटल मंच के माध्यम से करोड़ों नागरिकों तक पहुँचाने का प्रयास है। गौरतलब है कि वे नियमित अंतराल पर धर्म, प्रकृति, गुरु-शिष्य परंपरा और जीवन-दर्शन से जुड़े श्लोक साझा करते रहे हैं, जो भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सोशल मीडिया पर जीवंत रखने का एक सुसंगत प्रयास दर्शाता है।

आगे की दिशा

प्रधानमंत्री की यह सुभाषित-श्रृंखला भारतीय दर्शन के प्रति उनकी सार्वजनिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। आने वाले सप्ताहों में भी इस श्रृंखला के जारी रहने की संभावना है, जो भारतीय संस्कृति और संस्कृत साहित्य को डिजिटल युग में प्रासंगिक बनाए रखने की दिशा में एक सतत कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि प्रेरणात्मक और सार्वजनिक जीवन के लिए प्रासंगिक भाषा के रूप में स्थापित करने का प्रयास। यह ऐसे समय में आया है जब संस्कृत शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा को नई शिक्षा नीति में केंद्रीय स्थान दिया जा रहा है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि डिजिटल प्रेरणा और नीतिगत क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने के लिए ठोस कदमों की ज़रूरत है। फिर भी, करोड़ों अनुयायियों तक प्राचीन ज्ञान की पहुँच सुनिश्चित करना अपने आप में एक उल्लेखनीय सांस्कृतिक पहल है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 3 अगस्त को एक्स पर कौन सा सुभाषित साझा किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने 3 अगस्त 2026 को 'त्याज्यं न धैर्यं विधुरेऽपि दैवे...' श्लोक साझा किया, जिसका अर्थ है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए। श्लोक में एक कुशल नाविक के उदाहरण से धैर्य और कर्म की महत्ता समझाई गई है।
PM मोदी की सुभाषित-श्रृंखला क्या है?
प्रधानमंत्री मोदी नियमित रूप से एक्स पर संस्कृत श्लोक और सुभाषित साझा करते हैं, जिनमें हिंदी अर्थ भी दिया जाता है। यह श्रृंखला भारतीय दर्शन, प्रकृति-संरक्षण, गुरु-शिष्य परंपरा और जीवन-मूल्यों पर केंद्रित रहती है।
गुरु पूर्णिमा पर PM मोदी ने क्या संदेश दिया था?
29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर प्रधानमंत्री मोदी ने 'प्रेरकः सूचकश्चैव...' श्लोक साझा किया, जिसमें गुरु के छह स्वरूपों का वर्णन है। उन्होंने देशवासियों से गुरु के आदर्शों को जीवन का संबल बनाने का आह्वान किया।
28 जुलाई को PM मोदी का प्रकृति-संरक्षण पर क्या संदेश था?
28 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने प्रकृति और धर्म के सामंजस्य पर केंद्रित श्लोक साझा करते हुए कहा था कि प्रकृति के संरक्षण और सम्मान में ही मानवता का कल्याण निहित है। उन्होंने 'लोकपालाश्च ते सर्वे...' श्लोक के माध्यम से वेद, स्मृतियों और धर्म की रक्षात्मक भूमिका को रेखांकित किया।
PM मोदी के सुभाषित पोस्ट का महत्व क्या है?
यह पहल संस्कृत के प्राचीन ज्ञान को डिजिटल मंच के माध्यम से करोड़ों नागरिकों तक पहुँचाने का प्रयास है। यह भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सोशल मीडिया पर जीवंत रखने और संस्कृत को आधुनिक जीवन में प्रासंगिक बनाने की दिशा में एक सुसंगत कदम माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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