PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: 'परंपराओं और ज्ञान को आगे बढ़ाते हुए श्रेष्ठ कर्म करें'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें मनुष्य को अपनी परंपराओं और ज्ञान को आगे बढ़ाते हुए श्रेष्ठ कर्म करने का संदेश दिया गया है। यह उनकी उस साप्ताहिक श्रृंखला का हिस्सा है जिसमें वे नियमित रूप से संस्कृत श्लोकों के माध्यम से नैतिक और दार्शनिक विचार साझा करते आ रहे हैं।
गुरुवार का सुभाषित
प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को एक्स पर श्लोक, 'तन्तुं तन्वन्रजसो भानुमन्विहि ज्योतिष्मतः पथो रक्ष धिया कृतान्। अनुल्बणं वयत जोगुवामपो मनुर्भव जनया दैव्यं जनम्॥' साझा किया। इस श्लोक का हिंदी भावार्थ है कि मनुष्य को अपनी परंपराओं और ज्ञान को आगे बढ़ाते हुए श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए, बुद्धि से निर्मित न्यायपूर्ण और प्रकाशमय मार्ग का अनुसरण करना चाहिए, तथा दिव्य गुणों से सम्पन्न जनों का निर्माण करना चाहिए।
पूरे सप्ताह की सुभाषित श्रृंखला
इससे एक दिन पहले बुधवार को प्रधानमंत्री की ओर से श्लोक, 'ज्ञानवृद्धाः प्रशंसन्ति शुश्रूषन्तः परस्परम्। विनिवृत्ताभिसन्धानाः सुखमेधन्ति सर्वशः॥' साझा किया गया था। इसका भावार्थ है कि ज्ञानी और सज्जन व्यक्ति परस्पर सम्मान, सेवा और सद्भाव का व्यवहार करते हैं और व्यक्तिगत लाभ की भावना से मुक्त होकर जीवन में सुखपूर्वक उन्नति प्राप्त करते हैं।
मंगलवार को साझा किए गए श्लोक, 'उत्तमैः सह साङ्गत्यं पण्डितैः सह सत्कथाम्। अलुब्धैः सह मित्रत्वं कुर्वाणो नावसीदति॥' में संदेश था कि उत्तम व्यक्तियों की संगति, विद्वानों के साथ सत्संवाद और निःस्वार्थ व्यक्तियों के साथ मित्रता करने वाला कभी दुःखी नहीं होता।
सोमवार को प्रधानमंत्री ने संस्कृत श्लोक, 'कारुण्येनात्मनो मानं तृष्णां च परितोषतः। उत्थानेन जयेत्तन्द्रीं वितर्कं निश्चयाज्जयेत्॥' साझा किया था, जिसका भावार्थ है कि करुणा से आत्म-सम्मान, संतोष से तृष्णा पर विजय और पुरुषार्थ से आलस्य पर विजय प्राप्त होती है।
सुभाषित श्रृंखला का महत्व
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी समय-समय पर संस्कृत सुभाषितों और भारतीय दार्शनिक परंपरा के श्लोकों को सोशल मीडिया पर साझा करते रहे हैं। यह पहल भारतीय शास्त्रीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक डिजिटल माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास मानी जाती है। इस सप्ताह की श्रृंखला में करुणा, संगति, ज्ञान और कर्तव्य — चार मूल्यों पर क्रमशः प्रकाश डाला गया है।
आगे की दिशा
प्रधानमंत्री की इस सुभाषित श्रृंखला को सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया मिल रही है। संस्कृत विद्वानों और सांस्कृतिक संगठनों ने इसे भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है।