PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत श्लोक: निर्लोभी मित्रता से कभी नहीं होता दुःख
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 25 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें उत्तम संगति और निःस्वार्थ मित्रता के महत्व को रेखांकित किया गया है। उन्होंने श्लोक 'उत्तमैः सह साङ्गत्यं पण्डितैः सह सत्कथाम्। अलुब्धैः सह मित्रत्वं कुर्वाणो नावसीदति॥' साझा करते हुए इसका हिंदी भावार्थ भी प्रस्तुत किया।
श्लोक का भावार्थ
इस श्लोक का अर्थ है कि जो व्यक्ति उत्तम लोगों की संगति, विद्वानों के साथ सार्थक संवाद और निःस्वार्थ एवं निर्लोभी व्यक्तियों के साथ मित्रता करता है, वह कभी दुःखी नहीं होता। यह श्लोक जीवन में सकारात्मक संबंधों और नैतिक मूल्यों की केंद्रीयता को दर्शाता है।
पिछले सुभाषितों की श्रृंखला
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी हाल के दिनों में नियमित रूप से संस्कृत सुभाषित साझा कर रहे हैं। सोमवार, 24 अगस्त को उन्होंने श्लोक 'कारुण्येनात्मनो मानं तृष्णां च परितोषतः। उत्थानेन जयेत्तन्द्रीं वितर्कं निश्चयाज्जयेत्॥' साझा किया था, जिसका भाव था — 'करुणा से आत्म-सम्मान और संतोष से सच्ची खुशी मिलती है। इसी भाव से समाज में सहयोग और सद्भाव की डोर और सशक्त होती है।'
इस श्लोक में यह संदेश निहित है कि दूसरों के प्रति करुणा रखने से व्यक्ति का आत्म-सम्मान बढ़ता है, संतोषी होने से लालसा पर विजय मिलती है, और पुरुषार्थ से आलस्य तथा आधारहीन आशंकाओं को परास्त किया जा सकता है।
21 अगस्त का सुभाषित: नदियों से प्रेरणा
21 अगस्त को प्रधानमंत्री ने श्लोक 'जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः। इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥' साझा किया था। इसके साथ उन्होंने लिखा था, 'नदियों का अविरल प्रवाह सिखाता है कि हम किस प्रकार अपने सामर्थ्य का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की यही भावना राष्ट्र को नई दिशा देती है।'
इस श्लोक का भाव है कि जिस प्रकार नदियाँ बिना किसी स्वार्थ के निरंतर बहते हुए असंख्य प्राणियों का जीवन पोषित करती हैं और अंततः समुद्र में विलीन हो जाती हैं, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपना जीवन और सामर्थ्य दूसरों के हित में समर्पित करना चाहिए।
सुभाषित श्रृंखला का व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री मोदी सोशल मीडिया के माध्यम से भारत की शास्त्रीय ज्ञान परंपरा को आम जनता तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। संस्कृत के इन सुभाषितों में नैतिकता, करुणा, परोपकार और सामाजिक सद्भाव के मूल्यों पर बल दिया जा रहा है। यह श्रृंखला भारतीय दर्शन और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक सतत प्रयास के रूप में देखी जा रही है।