गुडलूर में बाघ हमले: 27-28 अगस्त को दो दिवसीय बंद का आह्वान, वन विभाग पर निष्क्रियता का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के नीलगिरी जिले के गुडलूर विधानसभा क्षेत्र में संदिग्ध बाघ के हमलों में दो लोगों की मौत के बाद राजनीतिक दलों, व्यापारियों और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों ने 27 और 28 अगस्त को दो दिवसीय आम हड़ताल का आह्वान किया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग ने पहले हमले के बाद समय पर कार्रवाई नहीं की, जिससे दूसरी मौत को रोका जा सकता था।
हड़ताल का निर्णय कैसे हुआ
रविवार को गुडलूर में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के विधायक कार्यालय में हुई बैठक में भारतीय जनता पार्टी (BJP), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस), वीसीके, सीपीआई, सीपीआई (एम), एनटीके, DMK और एसडीपीआई के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से शटडाउन का फैसला किया। बैठक में व्यापारियों, ऑटो-रिक्शा एवं टैक्सी ऑपरेटरों और बागान श्रमिकों से भी समर्थन की अपील की गई। साथ ही एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें 21 अगस्त के विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए वीसीके और डीवाईएफआई पदाधिकारियों की रिहाई की मांग की गई।
मुख्य घटनाक्रम: दो मौतें और देरी का आरोप
ओ-वैली टाउन पंचायत के लॉरिस्टन इलाके में संदिग्ध बाघ के हमले में पहली मौत 9 अगस्त को हुई थी। इसके बाद दूसरी मौत के. रवि कुमार की हुई, जिससे स्थानीय लोगों का आक्रोश चरम पर पहुँच गया। DMK के गुडलूर टाउन सेक्रेटरी एस. इलांचेझियन ने आरोप लगाया कि पहले हमले के तुरंत बाद वन विभाग बाघ को पकड़ने के लिए जाल बिछाने में नाकाम रहा। उन्होंने कहा कि समय पर कार्रवाई होती तो रवि कुमार की जान बचाई जा सकती थी।
इलांचेझियन ने माँग की कि चूँकि ये हमले रिहायशी इलाकों के निकट हुए हैं, इसलिए उस जानवर को समाप्त किया जाए।
हड़ताल का असर: क्या-क्या बंद रहेगा
व्यापारियों ने घोषणा की है कि हड़ताल के दौरान किराने की दुकानें बंद रहेंगी। ऑटो-रिक्शा और टैक्सियाँ सड़कों पर नहीं चलेंगी। नीलगिरी के प्रमुख पर्यटन केंद्र मासिनागुडी में रिसॉर्ट और कॉटेज के भी बंद रहने की संभावना है। गुडलूर व्यापारी संगम ने बताया कि एस्टेट कर्मचारी भी इस विरोध में शामिल होंगे और अभिभावकों ने तय किया है कि वे दोनों दिन बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।
गिरफ्तारी विवाद और पुलिस पर आरोप
21 अगस्त के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर बोतलें फेंके जाने से दो पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिसके बाद सात लोगों को गिरफ्तार किया गया। राजनीतिक प्रतिनिधियों का आरोप है कि पुलिस ने सीधे तौर पर घटना में शामिल लोगों की पहचान करने के बजाय जन-प्रतिनिधियों को हिरासत में लिया — जिसे वे राजनीतिक दमन बता रहे हैं।
प्रशासन और वन विभाग की प्रतिक्रिया
रेवेन्यू अधिकारियों ने अभी तक संबंधित पक्षों और व्यापारी संगठनों के साथ कोई बातचीत नहीं की है। गुडलूर के रेवेन्यू डिविजनल ऑफिसर एस.के. गुनासेकरन ने बताया कि नीलगिरी कलेक्टर लक्ष्मी भव्य तनेरू की मंजूरी मिलने के बाद ही वार्ता शुरू होगी। इस बीच रविवार को वन विभाग ने पिंजरों की संख्या 6 से बढ़ाकर 8 और कैमरा ट्रैप की संख्या 60 कर दी। जिला वन अधिकारी पी. देवराज ने बताया कि टीमों को बाघ के पैरों के निशान और मल मिले हैं, जिनसे उसकी मौजूदगी की पुष्टि होती है — हालाँकि अभी तक बाघ को प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा गया है।
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और वन विभाग की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता पर सवाल उठते रहे हैं। 27 अगस्त को शुरू होने वाली यह हड़ताल प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।