17 अगस्त 2026
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हनूर एनकाउंटर: चामराजनगर में 3 शिकारियों की मौत पर BJP ने कर्नाटक सरकार से निष्पक्ष जांच की माँग की

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हनूर एनकाउंटर: चामराजनगर में 3 शिकारियों की मौत पर BJP ने कर्नाटक सरकार से निष्पक्ष जांच की माँग की

सारांश

चामराजनगर के हनूर जंगल में 14 अगस्त की रात हुई मुठभेड़ में तीन लोगों की मौत ने कर्नाटक विधानसभा में तूफान खड़ा कर दिया। BJP ने आत्मरक्षा के सरकारी दावे को चुनौती देते हुए निष्पक्ष जांच, मुआवजे और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की है।

मुख्य बातें

14 अगस्त 2026 की रात कावेरी वन्यजीव अभ्यारण्य के हनूर उपमंडल में वन विभाग की कार्रवाई में तीन शिकारियों की मौत हुई।
वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि शिकारियों ने पहले गोली चलाई; 10 वन कर्मी घायल हुए और 34.5 किलोग्राम संदिग्ध वन्यजीव मांस बरामद हुआ।
अशोक ने आरोप लगाया कि तीनों को छाती और गर्दन पर गोली मारी गई; मृतकों का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था।
एक चौथा घायल व्यक्ति मैसूरु अस्पताल से कथित तौर पर लापता हो गया — सरकारी बयान में इसका उल्लेख नहीं।
BJP प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई.
विजयेंद्र ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और मृतकों के परिजनों को मुआवजे की माँग की।
चलवाड़ी नारायणस्वामी ने आरोप लगाया कि तीनों मृतक एक ही अल्पसंख्यक समुदाय से थे।

कर्नाटक के चामराजनगर रिजर्व फॉरेस्ट में 14 अगस्त 2026 की रात वन विभाग के अधिकारियों के साथ हुई कथित मुठभेड़ में तीन शिकारियों की मौत के मामले ने विधानसभा में तीखी राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 17 अगस्त को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए घटना की विस्तृत और निष्पक्ष जांच की माँग की तथा मौतों की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े किए।

घटनाक्रम: क्या हुआ उस रात

वन और पारिस्थितिकी मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने विधानसभा में बताया कि 14 अगस्त की रात लगभग 8 बजे वन अधिकारियों को सूचना मिली कि सशस्त्र शिकारी कावेरी वन्यजीव अभ्यारण्य के हनूर उपमंडल के शाग्या क्षेत्र में घुस रहे हैं। इस पर दो तलाशी दल भेजे गए।

कराडिकल्लू इलाके में वन कर्मियों ने शिकारियों को बड़ी चट्टानों के पीछे छिपे और उन पर गोलीबारी करते हुए पाया। रेड्डी के अनुसार, शिकारी ऊँचे स्थान पर थे और लगातार गोलियाँ चला रहे थे, जिसके बाद वन कर्मियों ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की — जिसका उन्हें कानूनी अधिकार था। इस ऑपरेशन में करीब 10 वन कर्मियों को चोटें आईं और उनका उपचार किया गया। घटनास्थल से लगभग 34.5 किलोग्राम संदिग्ध वन्यजीव मांस बरामद किया गया।

BJP का विरोध और मुख्य आरोप

विपक्ष के नेता आर. अशोक ने विधानसभा में आरोप लगाया कि तीनों व्यक्तियों को बेहद करीब से — छाती और गर्दन पर — गोली मारी गई, जो आत्मरक्षा के सरकारी दावे पर सवाल उठाता है। उन्होंने कहा, 'अगर मारे गए तीनों लोग वीरप्पन जैसे जंगल के डाकू होते, तो इतने सारे किसान उनके समर्थन में विरोध प्रदर्शन नहीं करते।'

अशोक ने यह भी उजागर किया कि सरकार ने स्वयं स्वीकार किया कि मारे गए व्यक्तियों के खिलाफ वन अपराधों का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और उनके नाम 'राउडी शीट' में दर्ज नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना में घायल एक चौथा व्यक्ति मैसूरु के एक अस्पताल में भर्ती होने के बाद लापता हो गया, और पूछा कि सरकार के स्पष्टीकरण में उसके बयान का उल्लेख क्यों नहीं किया गया।

सांप्रदायिक और सामाजिक आयाम

विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाड़ी नारायणस्वामी ने आरोप लगाया कि मारे गए तीनों व्यक्ति एक ही अल्पसंख्यक समुदाय से थे और सरकार के अल्पसंख्यक सुरक्षा के दावों पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय निवासियों ने मृतकों को सम्मानित व्यक्ति बताया और आरोप लगाया कि उनके और वन अधिकारियों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था।

अशोक ने यह भी चेताया कि जंगल की सीमाओं पर रहने वाले समुदाय ऐतिहासिक रूप से जलाऊ लकड़ी और चराई के लिए वन क्षेत्रों पर निर्भर रहे हैं। उनके अनुसार, अत्यधिक बल प्रयोग से इन समुदायों में भय का माहौल बन सकता है।

BJP प्रदेश अध्यक्ष की माँगें

BJP प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने विस्तृत और निष्पक्ष जांच की माँग करते हुए कहा कि यह एनकाउंटर गंभीर संदेह पैदा करता है। उन्होंने बताया कि शिवमोग्गा, कारवार, मडिकेरी और तटीय क्षेत्रों से भी वन समुदायों और वन विभाग के बीच टकराव की खबरें आती रही हैं।

विजयेंद्र ने सरकार से तीन सीधे सवाल पूछे: एनकाउंटर के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, क्या उन्हें निलंबित किया जाएगा, और मृतकों के परिजनों को कितना मुआवजा दिया जाएगा।

आगे क्या होगा

घटना के संबंध में मामला दर्ज किया जा चुका है। सरकार ने अभी तक किसी स्वतंत्र जांच की घोषणा नहीं की है। विपक्ष के दबाव और सामाजिक संगठनों के विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए, यह मामला आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में केंद्रबिंदु बना रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह मामला न केवल न्यायिक विश्वसनीयता का, बल्कि राज्य की अल्पसंख्यक और वनवासी नीति का भी इम्तिहान बन जाता है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनूर एनकाउंटर क्या है और यह कब हुआ?
14 अगस्त 2026 की रात कर्नाटक के चामराजनगर जिले में कावेरी वन्यजीव अभ्यारण्य के हनूर उपमंडल में वन विभाग की कार्रवाई में तीन कथित शिकारियों की मौत हो गई। वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी के अनुसार, शिकारियों ने पहले वन कर्मियों पर गोली चलाई, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में यह मौतें हुईं।
BJP ने इस एनकाउंटर पर क्या आपत्तियाँ उठाई हैं?
BJP ने आरोप लगाया कि मृतकों को छाती और गर्दन पर बेहद करीब से गोली मारी गई, उनका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, और एक चौथा घायल व्यक्ति मैसूरु अस्पताल से लापता हो गया। पार्टी ने विस्तृत और निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और मृतकों के परिजनों को मुआवजे की माँग की है।
कर्नाटक सरकार ने एनकाउंटर को कैसे उचित ठहराया?
वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने विधानसभा में बताया कि शिकारी ऊँचे स्थान पर छिपे थे और वन कर्मियों पर लगातार गोलीबारी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वन कर्मियों ने आत्मरक्षा में जवाब दिया, जिसका उन्हें कानूनी अधिकार है। घटनास्थल से 34.5 किलोग्राम संदिग्ध वन्यजीव मांस भी बरामद हुआ।
क्या मृतकों का कोई आपराधिक इतिहास था?
सरकार ने स्वयं स्वीकार किया कि मारे गए तीनों व्यक्तियों के खिलाफ वन अपराधों का कोई पूर्व मामला दर्ज नहीं था और उनके नाम 'राउडी शीट' में भी नहीं थे। विपक्ष के नेता आर. अशोक ने इसी आधार पर एनकाउंटर की परिस्थितियों पर सवाल उठाए।
इस मामले में अब आगे क्या होने की संभावना है?
घटना के संबंध में मामला दर्ज किया जा चुका है, लेकिन सरकार ने अभी तक किसी स्वतंत्र जांच की घोषणा नहीं की है। विपक्ष के दबाव, सामाजिक संगठनों के विरोध और सांप्रदायिक आयाम को देखते हुए यह मामला कर्नाटक विधानसभा और न्यायिक मंचों पर आने वाले दिनों में और तीव्र होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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