हनूर जंगल मुठभेड़ पर BJP का CBI जांच का आग्रह, वन मंत्री के इस्तीफे की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक भाजपा (BJP) के अध्यक्ष एवं विधायक बीवाई विजयेंद्र ने सोमवार, 24 अगस्त को बेंगलुरु के विधान सौधा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चामराजनगर जिले के हनूर जंगल में हुई कथित मुठभेड़ को लेकर गंभीर सवाल उठाए, जिसमें तीन कथित शिकारियों की मौत हुई थी। विजयेंद्र ने राज्य सरकार पर सच छिपाने का आरोप लगाते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच और वन एवं पर्यावरण मंत्री रामलिंगा रेड्डी के तत्काल इस्तीफे की मांग की।
भाजपा की फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी के निष्कर्ष
विजयेंद्र ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने घटना के तुरंत बाद एक तथ्यान्वेषण समिति गठित की थी, जिसने घटनास्थल का दौरा किया और स्थानीय साक्ष्य एकत्र किए। समिति के निष्कर्षों के आधार पर उन्होंने कई गंभीर संदेह सार्वजनिक किए। उन्होंने कहा कि मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट शवों को जल्दबाजी में परीक्षण के लिए भेजे जाने के बावजूद अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है, और सरकार को इसका कारण स्पष्ट करना चाहिए।
करीबी गोलीबारी के आरोप और फोटोग्राफिक साक्ष्य
घटना की तस्वीरें प्रस्तुत करते हुए विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि मृतकों को बेहद करीब से गोली मारी गई थी और कथित तौर पर बंदूक कंधे के निकट रखी गई थी। उन्होंने गर्दन के पिछले हिस्से पर मौजूद निशानों का भी हवाला दिया, जिन्हें उन्होंने नज़दीकी रेंज से गोलीबारी का संकेत बताया। उनका दावा था कि पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों ने भी अपनी रिपोर्ट में इस पहलू का उल्लेख किया है — हालांकि यह रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
प्रमुख गवाह और बदले गए बयान
विजयेंद्र ने महिमा दास नामक व्यक्ति के ठिकाने को लेकर भी सवाल उठाए, जो कथित तौर पर उस दिन जंगल में मौजूद था और एक महत्वपूर्ण प्रत्यक्षदर्शी हो सकता है। उन्होंने संदेह जताया कि वन विभाग और पुलिस उसे जनता की नज़रों से दूर रख रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने स्थानीय सांसद सुनील बोस के शुरुआती बयानों का हवाला दिया, जिनमें उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को दोषी ठहराया था। विजयेंद्र ने यह भी आरोप लगाया कि जिला प्रभारी मंत्री पुत्तरंगशेट्टी ने पहले गलती स्वीकार करने के संकेत दिए, लेकिन बाद में विधानसभा में अपना बयान बदल दिया।
सरकार पर गंभीर आरोप
विजयेंद्र ने कहा कि सार्वजनिक चर्चा में इस घटना को 'राज्य प्रायोजित हत्या' तक कहा जा रहा है और सरकार को इन आरोपों का जवाब देना होगा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या मृतक आदतन अपराधी थे, और क्या वन विभाग में किसी अनियमितता की जानकारी के कारण उन्हें निशाना बनाया गया। ये सभी पहलू, उनके अनुसार, स्वतंत्र जांच की माँग करते हैं।
CBI जांच की माँग क्यों
विजयेंद्र ने तर्क दिया कि जब तक जांच राज्य-नियंत्रित विभागों के दायरे में रहेगी, निष्पक्ष परिणाम संभव नहीं है। इसीलिए उन्होंने मांग की कि मामले को CBI को सौंपा जाए। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार और भाजपा के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर तीखी राजनीतिक नोकझोंक चल रही है। आने वाले दिनों में सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के सार्वजनिक होने की स्थिति इस विवाद की दिशा तय करेगी।