चामराजनगर मुठभेड़: विजयेंद्र का सवाल — क्या तमिलनाडु CM विजय 'सिर्फ ईसाई मुख्यमंत्री' हैं?
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष एवं विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने मंगलवार, 18 अगस्त को चामराजनगर के हनूर में हुई मुठभेड़ में तीन लोगों की मौत के मामले में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की कथित दखलंदाजी पर तीखा सवाल दागा — 'क्या वह सिर्फ ईसाई मुख्यमंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं, या पूरे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं?' यह विवाद 15 अगस्त को कावेरी वन्यजीव अभयारण्य में कर्नाटक के वन कर्मियों द्वारा तीन तमिल नागरिकों की मौत के बाद दोनों राज्यों के बीच उभरे तनाव की पृष्ठभूमि में सामने आया है।
मुठभेड़ की पृष्ठभूमि
15 अगस्त को कावेरी वन्यजीव अभयारण्य के चामराजनगर रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में वन विभाग के कर्मचारियों और कथित शिकारियों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें एंथनी सामी, जॉन रोज पीटर और कुमार — तीन तमिल नागरिकों की मौत हो गई। कर्नाटक सरकार ने विधानसभा में बयान देते हुए कहा कि वन कर्मियों ने आत्मरक्षा में गोली चलाई, क्योंकि कथित शिकारियों ने पहले उन पर फायरिंग की थी। वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने इस घटना को 'नरसंहार' करार देते हुए कर्नाटक सरकार के दावे को सिरे से खारिज किया था।
विजयेंद्र की प्रमुख आपत्तियाँ
बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत में विजयेंद्र ने कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने इस मामले में कर्नाटक के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है, और एक आर्कबिशप ने भी पत्र लिखकर मृतकों के परिवारों के लिए सरकारी नौकरी और उचित मुआवजे की माँग की है। उन्होंने सवाल किया, 'क्या मृतकों को जाति या धर्म का रंग देना उचित है?'
भाजपा नेता ने मुठभेड़ की परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि वन अधिकारी टॉर्च लेकर जंगल में गए थे, तो गोली चलाने की नौबत क्यों आई। उनके शब्दों में — 'आपने कहा कि वे टॉर्च लेकर गए थे। फिर मुठभेड़ क्यों हुई? क्या वे शेर या बाघ थे?'
मुआवजे और जाँच की माँग
विजयेंद्र ने बताया कि भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) (JDS) ने विधानसभा में मानवीय आधार पर तीनों मृतकों के परिवारों को ₹1-1 करोड़ का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की माँग रखी थी। उन्होंने राज्य सरकार से अभियान में हुई किसी भी चूक को स्वीकार करने और मामले में न्यायिक जाँच कराने का आग्रह किया।
व्यापक संदर्भ: वन-सीमा संघर्ष
विजयेंद्र ने इस घटना को कर्नाटक में वन-सीमावर्ती समुदायों और वन विभाग के बीच जारी टकराव की व्यापक समस्या से जोड़ा। उन्होंने कहा कि मदिकेरी, शिवमोग्गा, उत्तर कन्नड़ और तटीय क्षेत्रों में भी इसी तरह की समस्याएँ हैं और हाल ही में मदिकेरी में बड़ा विरोध प्रदर्शन हो चुका है। मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने राज्य सरकार और मंत्रियों से वन-सीमावर्ती क्षेत्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेने की अपील की।
आगे क्या
दोनों राज्यों के बीच यह विवाद अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। न्यायिक जाँच की माँग और मुआवजे का मसला विधानसभा के अगले सत्र तक खिंचने की संभावना है। कर्नाटक सरकार का अगला कदम — जाँच का स्वरूप और मुआवजे पर निर्णय — इस मामले की दिशा तय करेगा।