कर्नाटक वन गोलीबारी: तमिलनाडु सरकार तीनों मृतक परिवारों को ₹10-10 लाख मुआवजे पर विचार कर रही है
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार कर्नाटक की सीमा से लगे वन क्षेत्र में वन विभाग के जवानों की गोलीबारी में मारे गए तीन तमिल मूल के नागरिकों के परिवारों को ₹10-10 लाख की आर्थिक सहायता देने पर गंभीरता से विचार कर रही है। राज्य के वन मंत्री आर.वी. रंजीतकुमार ने मंगलवार, 18 अगस्त को विधानसभा में एक विशेष ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्देश पर वन विभाग में इस संबंध में विचार-विमर्श जारी है।
घटना का विवरण और पीड़ितों की पहचान
कानून मंत्री आर. निर्मलकुमार ने विधानसभा को बताया कि तीनों मृतकों की पहचान पी. एंथनीसामी, जॉन रोज पीटर और कुमार के रूप में हुई है। गोलीबारी में मारियादॉस और बेंजामिन घायल हुए हैं, जिनका एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है। मृतकों और घायलों के परिवार करीब 75 वर्ष पहले कर्नाटक में आकर बस गए थे। घटना के बाद करीब 300 लोगों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया था।
विपक्ष की माँगें और आरोप
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने घटना के पीछे बड़ी साजिश की आशंका जताई। उन्होंने कर्नाटक के उस दावे पर सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि मृतक हिरणों का शिकार कर रहे थे। पलानीस्वामी ने कहा कि मृतकों के परिवारों के अनुसार वे मवेशियों की तलाश में जंगल गए थे। उन्होंने अंतरराज्यीय सीमा पर हुई इस घटना की सीबीआई जाँच की माँग की और कर्नाटक सरकार की ओर से घोषित ₹5-5 लाख के मुआवजे को अपर्याप्त बताया।
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के विधायक मनोज पांडियन ने इस गोलीबारी को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन करार देते हुए इसे 'फर्जी मुठभेड़' तक कहा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन किया गया और क्या राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को घटना की जानकारी दी गई। पांडियन ने वन विभाग के संबंधित कर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने, न्यायिक जाँच, पर्याप्त मुआवजा और प्रत्येक मृतक परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की माँग की।
कांग्रेस विधायक दल की नेता थाराहाई कथबर्ट ने भी सीबीआई जाँच का समर्थन करते हुए मृतक परिवारों के लिए अधिक मुआवजे, सरकारी नौकरी और घायलों के लिए पूर्ण चिकित्सा सहायता की माँग की। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक एम. भोजराजन ने मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए सभी दलों से मतभेद भुलाकर संयुक्त विरोध करने और दोषी पाए जाने पर अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील की।
कर्नाटक सरकार का रुख
कर्नाटक सरकार ने यह पता लगाने के लिए मजिस्ट्रेट जाँच के आदेश दिए हैं कि पहले गोली किसने चलाई और हिंसा के लिए कौन जिम्मेदार था। पुलिस ने वन विभाग के कर्मियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। कर्नाटक ने प्रत्येक मृतक परिवार को ₹5 लाख मुआवजे की घोषणा की है, जिसे तमिलनाडु के अधिकांश दलों ने नाकाफी बताया है।
तमिलनाडु का आधिकारिक पक्ष
वन मंत्री रंजीतकुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री विजय ने कर्नाटक की ओर से दी गई घटना की व्याख्या को स्वीकार नहीं किया है और निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जाँच की माँग की है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों राज्यों के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पहले से ही संवेदनशीलता बनी हुई है। गौरतलब है कि यह घटना अंतरराज्यीय सीमा पर हुई, जिससे न्यायिक अधिकार क्षेत्र और जवाबदेही का सवाल और जटिल हो गया है।
आगे क्या होगा
विधानसभा में सर्वदलीय माँगों के बाद अब तमिलनाडु सरकार पर ₹10 लाख मुआवजे को औपचारिक रूप देने का दबाव है। सीबीआई जाँच, न्यायिक आयोग और NHRC को सूचना — ये तीनों मुद्दे अभी लंबित हैं। मृतक परिवारों के लिए सरकारी नौकरी की माँग भी अभी अनुत्तरित है। आने वाले दिनों में दोनों राज्य सरकारों के बीच समन्वय और केंद्र की भूमिका निर्णायक होगी।