नेपाल बाढ़: तमिलनाडु ने IAS टीम काठमांडू भेजी, 103 में से 21 कुंभकोणम निवासी सुरक्षित
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 27 अगस्त 2026 को नेपाल में भीषण बाढ़ में फंसे राज्य के नागरिकों के बचाव के लिए गृह आयुक्त आशीष कुमार के नेतृत्व में एक वरिष्ठ IAS प्रतिनिधिमंडल काठमांडू भेजने का आदेश दिया। यह निर्णय चेन्नई में एक आपातकालीन समीक्षा बैठक के बाद लिया गया, जिसमें नेपाल के उत्तरी क्षेत्र में फंसे तमिलनाडु निवासियों की स्थिति का आकलन किया गया।
आपदा का स्वरूप
हिमस्खलन के कारण कोसी और त्रिशुली नदियों में अचानक उफान आया, जिसने नेपाल के उत्तरी सीमावर्ती जिले रसुवा सहित बड़े क्षेत्रों को जलमग्न कर दिया। इस आपदा में अब तक कम से कम 175 लोगों की मौत की खबर है, जबकि लगभग 300 भारतीयों सहित करीब 1,000 लोग लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ ने परिवहन और संचार व्यवस्था को बुरी तरह बाधित कर दिया है, जिससे तीर्थयात्रियों और पर्यटकों का पता लगाना और भी कठिन हो गया है।
तमिलनाडु के फंसे नागरिकों की स्थिति
स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन अरुमुगम ने तमिलनाडु विधानसभा को बताया कि राज्य से कुल 103 लोग नेपाल गए थे। इनमें कुंभकोणम के 57 लोगों का एक समूह भी शामिल था। मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि 'कुंभकोणम के इन 57 लोगों में से 21 को बचा लिया गया है और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुँचा दिया गया है।' शेष लोगों से संपर्क स्थापित करने के प्रयास जारी हैं।
IAS प्रतिनिधिमंडल की भूमिका
गृह आयुक्त आशीष कुमार के नेतृत्व में यह दल नई दिल्ली से काठमांडू के लिए रवाना होगा। प्रतिनिधिमंडल का कार्य लापता या फंसे हुए लोगों के बारे में सत्यापित जानकारी एकत्र करना, उनकी आवश्यकताओं की पहचान करना और नेपाल सरकार तथा भारतीय राजनयिक अधिकारियों के साथ मिलकर बचाव कार्यों का समन्वय करना है। अधिकारियों से यह भी अपेक्षा है कि वे प्रभावित परिवारों को नियमित अपडेट प्रदान करते रहें।
सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री विजय ने गुरुवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपातकालीन बैठक की अध्यक्षता की और संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि फंसे हुए यात्रियों को हर संभव सहायता दी जाए और बचाए गए निवासियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए। यह ऐसे समय में आया है जब क्षतिग्रस्त सड़कों और बाधित संचार नेटवर्क के बीच बचाव दल दुर्गम पहाड़ी इलाकों में काम कर रहे हैं।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएँ आम हैं, लेकिन इस बार की तबाही का पैमाना असाधारण बताया जा रहा है। बचाव दल क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचे के बीच अभियान जारी रखे हुए हैं। IAS प्रतिनिधिमंडल के काठमांडू पहुँचने के बाद बचाव कार्यों में तेज़ी आने की उम्मीद है।