नेपाल बाढ़: रसुवा जिले में 57 तमिलनाडु तीर्थयात्री फंसे, 17 की मौत; 384 पर्यटक लापता
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के रसुवा जिले में आई विनाशकारी बाढ़ में 26 अगस्त 2026 तक कम से कम 17 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तमिलनाडु के 57 तीर्थयात्री बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के तिमुरे इलाके में फंसे हुए हैं। पानी का स्तर तेज़ी से बढ़ने और बुनियादी ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचने के कारण बचाव अभियान अत्यंत कठिन हो गया है।
फंसे हुए तीर्थयात्रियों की स्थिति
फंसे हुए 57 तीर्थयात्री चेन्नई, कुंबाकोणम और तमिलनाडु के अन्य हिस्सों से तीर्थयात्रा के लिए नेपाल गए थे। रिपोर्टों के अनुसार, उत्तरी प्रभावित क्षेत्रों में 400 से अधिक भारतीय नागरिक फंसे हैं। इनमें से कुंबाकोणम के 22 तीर्थयात्रियों को बचाकर नेपाल सेना के कैंप में पहुँचाया जा चुका है, जहाँ उन्हें अस्थायी आश्रय और सहायता प्रदान की गई है।
बचाव अभियान में बाधाएँ
प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं, लेकिन ऊँचा जलस्तर, टूटी हुई सड़कें और खराब मौसम राहत कार्यों में गंभीर बाधा बन रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, कई स्थानों पर हेलीकॉप्टर उतर पाने में असमर्थ हैं, जिसके चलते कई समूह अभी भी निकाले जाने की प्रतीक्षा में हैं। शुरुआती आकलन के अनुसार, बाढ़ में लगभग 19 पुल बह गए, करीब 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं और लगभग 200 वाहन बह गए।
लापता पर्यटकों का आँकड़ा
नेपाल टूरिज्म बोर्ड के शुरुआती आकलन के अनुसार, ट्रैवल एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर 384 पर्यटकों के लापता होने की सूचना है। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। अधिकारी इन आँकड़ों की पुष्टि कर रहे हैं और दूरदराज़ के क्षेत्रों में संचार बहाल होने पर यह संख्या बदल सकती है।
सरकारी प्रतिक्रिया और हेल्पलाइन
तमिलनाडु का नॉन-रेसिडेंट तमिल वेलफेयर डिपार्टमेंट फंसे हुए नागरिकों का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए भारतीय और नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय में काम कर रहा है। तमिलनाडु सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए टोल-फ्री नंबर 1800 309 3793 जारी किया है; मिस्ड कॉल के लिए 80690 09901 या 080690 09900 पर संपर्क किया जा सकता है। नेपाल टूरिज्म बोर्ड की इमरजेंसी हेल्पलाइन 1234 और हॉटलाइन 1144 है; टूरिस्ट पुलिस यूनिट से 9851289445 पर संपर्क किया जा सकता है।
आगे की स्थिति
भारतीय अधिकारी भी प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने में लगे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून सीज़न में नेपाल के पहाड़ी इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। संचार बहाल होने और मौसम में सुधार के साथ बचाव अभियान की गति तेज़ होने की उम्मीद है।