गुजरात यूसीसी पर सलमान खुर्शीद का तंज: 'इसे यूनिफॉर्म नहीं, स्टेट सिविल कोड कहो'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा गुजरात समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने 2 अक्टूबर 2026 को गुवाहाटी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जब हर राज्य में अलग-अलग कोड लागू हो रहे हैं, तो इसे 'यूनिफॉर्म सिविल कोड' कहना भ्रामक है — सही नाम 'स्टेट सिविल कोड' होना चाहिए।
खुर्शीद का केंद्रीय तर्क
खुर्शीद ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यूनिफॉर्म सिविल कोड कहाँ है? हर राज्य का अलग यूसीसी है, तो इसे यूसीसी क्यों कहा जाए? इसे 'स्टेट सिविल कोड' कहा जाना चाहिए।' उनका इशारा इस तथ्य की ओर था कि उत्तराखंड, असम और अब गुजरात — तीनों BJP-शासित राज्यों ने अपने-अपने यूसीसी ढाँचे अलग-अलग बनाए हैं।
उन्होंने आगे कहा, 'असम में जो लागू किया जा रहा है, वह दूसरे राज्य में लागू नहीं है। वहाँ जो लागू है, वह गुजरात में लागू नहीं है। अलग-अलग कोड को एक ही नाम कैसे दिया जा सकता है?' यह बयान उस व्यापक बहस को फिर से केंद्र में ले आया है कि राज्यवार यूसीसी संविधान की 'एकरूपता' की अवधारणा के अनुरूप है या नहीं।
गुजरात यूसीसी विधेयक: मुख्य प्रावधान
गुजरात विधानसभा ने मार्च 2026 में यूसीसी विधेयक पारित किया था। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य धर्म की परवाह किए बिना विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत नागरिक मामलों के लिए एक समान कानूनी ढाँचा स्थापित करना है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह विधेयक अब कानून बनने की दिशा में है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य था जिसने यूसीसी लागू किया। उसके बाद असम और अब गुजरात ने इस राह पर कदम रखा है — लेकिन तीनों के प्रावधानों में उल्लेखनीय अंतर बताए जा रहे हैं।
नैनीताल हाईकोर्ट में याचिकाएँ
कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने उत्तराखंड के यूसीसी के विरुद्ध नैनीताल हाईकोर्ट में दाखिल कई रिट याचिकाओं और जनहित याचिकाओं (PIL) का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण होगा और उस पर सभी की नजरें टिकी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब यूसीसी की संवैधानिक वैधता को लेकर कानूनी विशेषज्ञों में मतभेद बना हुआ है।
आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार का पक्ष
वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेता इंद्रेश कुमार ने यूसीसी को धार्मिक सौहार्द स्थापित करने वाला कानून बताया। उन्होंने कहा, 'समान नागरिक संहिता ऐसा कानून है जो हर धर्म की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करता है।'
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, 'मान लीजिए दो धर्मों या उनके संप्रदायों के बीच किसी तरह का तनाव है, जैसे मुस्लिमों में शिया और सुन्नी के बीच — कानून यह सुनिश्चित करता है कि दोनों संप्रदाय एक-दूसरे पर अत्याचार न करें, बल्कि मिल-जुलकर रहें।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यही संरक्षण सनातन धर्म सहित सभी धर्मों पर लागू होता है।
आगे की राह
यूसीसी का राज्यवार क्रियान्वयन और उस पर चल रही कानूनी लड़ाई आने वाले महीनों में और गहरी होने की संभावना है। नैनीताल हाईकोर्ट का फैसला एक मिसाल बन सकता है जो अन्य राज्यों के यूसीसी की वैधता को भी प्रभावित करे। विपक्षी दलों की माँग है कि यदि सरकार वाकई 'एकरूपता' चाहती है, तो केंद्रीय स्तर पर एक समान कानून लाया जाए।