सूरत साइबर क्राइम: ₹7 करोड़ की ठगी के दो मामलों में अश्विन गोहिल गिरफ्तार, 37 राज्यों में शिकायतें
सारांश
मुख्य बातें
सूरत साइबर क्राइम सेल ने 2 अक्टूबर 2026 को भावनगर जिले के वाव निवासी अश्विन गोहिल (28 वर्ष) को गिरफ्तार किया है। उन पर ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी के दो मामलों में इस्तेमाल किए गए बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस के अनुसार इस खाते से ₹2,72,97,899.50 के लेन-देन हुए और नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर अलग-अलग राज्यों से जुड़ी 37 शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें कुल ₹7,01,47,845 की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस ने बताया कि सूरत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज दो अलग-अलग मामलों की तकनीकी जाँच के बाद गोहिल को दबोचा गया। पहले मामले में ठगों ने शिकायतकर्ता के बेटे से 'बीआरपी फंड 104-डे वेल्थ लीप प्रोग्राम' नामक व्हाट्सएप ग्रुप के ज़रिए संपर्क किया और शेयर बाज़ार में 390 प्रतिशत तक रिटर्न का लालच देकर उसे एक फर्जी वेबसाइट पर भेजा।
उस फर्जी वेबसाइट पर झूठा मुनाफा दिखाया गया और पीड़ित को अलग-अलग बैंक खातों में ₹5.99 लाख ट्रांसफर कराए गए। दूसरे मामले में 'बीआरपी फंड-ग्रो टुगेदर-008' नामक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से विश्वास जीतकर एक और फर्जी वेबसाइट पर भेजा गया और ₹19.60 लाख की ठगी की गई।
बैंक खाते का जाल — कैसे हुई खरीद-फरोख्त
जाँच में एक चौंकाने वाली खाता-हस्तांतरण श्रृंखला सामने आई है। पुलिस के अनुसार गोहिल को कथित तौर पर पहले गिरफ्तार आरोपी सत्यजीत मंजारिया (28) से कमीशन के बदले आईसीआईसीआई बैंक का करंट अकाउंट मिला था। गोहिल ने यह खाता पंकजकुमार रमानी (39) को महज ₹3,000 में बेचा।
रमानी ने कथित तौर पर इसे विवेक बेल्डिया (30) को ₹5,000 में सौंपा, और बेल्डिया ने अंततः यह खाता एक फरार आरोपी को साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल के लिए ₹26,000 में दे दिया। इस प्रकार एक साधारण बैंक खाता ₹7 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी का माध्यम बन गया।
पहले से गिरफ्तार आरोपी
इस मामले में अब तक चार व्यक्तियों को हिरासत में लिया जा चुका है। पहले गिरफ्तार तीन आरोपियों में अहमदाबाद निवासी सत्यजीत मंजारिया (मूलतः अमरेली के), सूरत निवासी पंकजकुमार रमानी (मूलतः राजकोट जिले के), और सूरत निवासी विवेक बेल्डिया (मूलतः भावनगर जिले के) शामिल हैं। मामले का मुख्य सूत्रधार अभी भी फरार है।
पुलिस की चेतावनी और आगे की कार्रवाई
सूरत साइबर क्राइम सेल ने आम जनता से अपील की है कि वे कमीशन या किसी भी प्रलोभन के बदले अपने बैंक खाते किसी अन्य व्यक्ति को न सौंपें। पुलिस ने स्पष्ट किया कि ऐसे खातों का उपयोग साइबर अपराध में किए जाने पर खाताधारक को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
यह मामला उस व्यापक प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है जिसमें साइबर ठग बेरोज़गार या आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों को मामूली कमीशन देकर बैंक खाते हासिल करते हैं और उन्हें धोखाधड़ी के माध्यम के रूप में इस्तेमाल करते हैं। आने वाले समय में फरार मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस की प्राथमिकता है।