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सूरत साइबर सेल ने जूनागढ़ से 2 आरोपी दबोचे, शेयर ट्रेडिंग ठगी में ₹4 करोड़ से अधिक का घोटाला उजागर

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सूरत साइबर सेल ने जूनागढ़ से 2 आरोपी दबोचे, शेयर ट्रेडिंग ठगी में ₹4 करोड़ से अधिक का घोटाला उजागर

सारांश

सूरत की साइबर सेल ने जूनागढ़ से दो आरोपियों को दबोचा — एक दिहाड़ी मजदूर, दूसरा रियल एस्टेट ब्रोकर। व्हाट्सएप ग्रुप से शुरू हुई ठगी में ₹42.98 लाख लूटे गए, लेकिन बैंक खातों की जाँच में ₹4 करोड़ से अधिक का राष्ट्रव्यापी साइबर नेटवर्क उजागर हुआ।

मुख्य बातें

सूरत साइबर क्राइम सेल ने 11 अगस्त को जूनागढ़ से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
पीड़ित से शेयर ट्रेडिंग के नाम पर ₹42,98,934 विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करवाए गए।
जाँच में सामने आया कि आरोपियों के खाते देशभर के 3 अन्य साइबर मामलों से जुड़े हैं; कुल धोखाधड़ी ₹4,03,00,157 ।
आरोपी गौतमकुमार लाठेगर (33) ने कमीशन के बदले अपना बैंक खाता सह-आरोपी को सौंपा था; उसके खाते से ₹18,49,552 का लेनदेन।
आरोपी सचिनकुमार टेटा (42) को खाता उपलब्ध कराने के एवज में ₹15,000 कमीशन मिला था।
एक फरार आरोपी की तलाश जारी; बीएनएस 2023 और आईटी अधिनियम 2008 की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज।

सूरत की साइबर क्राइम सेल ने मंगलवार, 11 अगस्त को ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग धोखाधड़ी के एक मामले में जूनागढ़ से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया, जिनके बैंक खातों की जाँच में ₹4 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी का व्यापक नेटवर्क सामने आया है। प्रारंभिक शिकायत में एक पीड़ित से ₹42,98,934 की धोखाधड़ी का मामला दर्ज था, जो अब देशभर के कई राज्यों तक फैले घोटाले से जुड़ गया है।

मुख्य घटनाक्रम

साइबर क्राइम सेल के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर पीड़ित को भारी मुनाफे का लालच दिया और शेयर ट्रेडिंग के नाम पर एक फर्जी आईडी बनवाई। इसके बाद पीड़ित से विभिन्न बैंक खातों में कुल ₹42,98,934 ट्रांसफर करवाए गए। जब रकम वापस नहीं मिली, तो पीड़ित ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस निरीक्षक ए.एम. मोरी ने एक विशेष टीम गठित की। तकनीकी जाँच के बाद टीम ने जूनागढ़ पहुँचकर दोनों संदिग्धों को हिरासत में लिया।

आरोपियों की पहचान

पहले आरोपी की पहचान गौतमकुमार लाठेगर (33 वर्ष) के रूप में हुई है। वह दिहाड़ी मजदूर है, नौवीं कक्षा तक शिक्षित है और जूनागढ़ के जवाहर रोड स्थित आरके अपार्टमेंट का निवासी है। पुलिस के अनुसार, इस मामले से जुड़े ₹2 लाख उसके खाते में ट्रांसफर हुए थे, जबकि उसके यूनियन बैंक ऑफ इंडिया खाते से कुल ₹18,49,552 का लेनदेन हुआ था। आरोप है कि उसने कमीशन के बदले अपना बैंक खाता सह-आरोपी को सौंपा था।

दूसरे आरोपी की पहचान सचिनकुमार टेटा (42 वर्ष) के रूप में हुई है। वह रियल एस्टेट ब्रोकर है, 12वीं पास है और जूनागढ़ के मेघानी नगर में रहता है। पुलिस के मुताबिक, सचिनकुमार ने गौतमकुमार का बैंक खाता एक फरार आरोपी को साइबर ठगी के लिए उपलब्ध कराया था और इसके एवज में उसे ₹15,000 कमीशन मिला था।

₹4 करोड़ से अधिक के घोटाले का खुलासा

जाँच के दौरान पुलिस ने कोऑर्डिनेशन पोर्टल के जरिए आरोपी के बैंक खाते की जाँच की। इसमें पता चला कि यह खाता देशभर के अलग-अलग राज्यों में दर्ज तीन अन्य साइबर अपराध शिकायतों से भी जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, इन तीनों मामलों में पीड़ितों से कुल ₹4,03,00,157 की साइबर ठगी की गई थी। यह मामला इस बात की पुष्टि करता है कि साइबर अपराधी अक्सर स्थानीय लोगों के बैंक खाते किराये पर लेकर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं।

मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 318(4), 336(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2) और 3(5) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2008 की धारा 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

साइबर सेल की चेतावनी और सलाह

सूरत साइबर क्राइम सेल ने आम जनता को सतर्क करते हुए कहा है कि फॉरेक्स ट्रेडिंग, शेयर ट्रेडिंग या क्रिप्टोकरेंसी में भारी मुनाफे का दावा करने वाले अनचाहे संदेशों पर कतई भरोसा न करें। किसी अनजान नंबर से व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप में जोड़े जाने पर तुरंत ग्रुप छोड़कर उस नंबर को ब्लॉक करें।

पुलिस ने यह भी आगाह किया कि साइबर ठग अक्सर शुरुआत में थोड़ा लाभ देकर भरोसा जीतते हैं और फिर बड़ी रकम निवेश करवाकर ठगी करते हैं। सोशल मीडिया या वैवाहिक वेबसाइटों पर अनजान व्यक्तियों को पैसे भेजने से भी बचने की सलाह दी गई है।

आगे की जाँच

फिलहाल एक आरोपी फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। जाँच एजेंसियाँ इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान के लिए बैंक खातों और डिजिटल ट्रेल की गहन जाँच कर रही हैं। यह मामला उस बढ़ती प्रवृत्ति को रेखांकित करता है जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को कमीशन का लालच देकर साइबर अपराध के नेटवर्क में शामिल किया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 के कमीशन के बदले वह ₹4 करोड़ के घोटाले का हिस्सा बन रहा है — और यही इस अपराध-मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है। असली सरगना अभी फरार है, जो यह सवाल उठाता है कि क्या ये गिरफ्तारियाँ नेटवर्क को तोड़ेंगी या केवल निचले पायदान के मोहरों को सजा दिलाएंगी। साइबर सेल की सार्वजनिक चेतावनियाँ जरूरी हैं, लेकिन जब तक फरार मास्टरमाइंड पकड़ा नहीं जाता, यह मामला अधूरा है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत साइबर क्राइम सेल ने किस मामले में गिरफ्तारी की?
सूरत साइबर क्राइम सेल ने ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग धोखाधड़ी के एक मामले में जूनागढ़ से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिसमें एक पीड़ित से ₹42,98,934 की ठगी की गई थी। जाँच में यह मामला ₹4 करोड़ से अधिक के राष्ट्रव्यापी साइबर घोटाले से जुड़ा पाया गया।
आरोपियों ने ठगी कैसे अंजाम दी?
आरोपियों ने कथित तौर पर एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर पीड़ित को भारी मुनाफे का लालच दिया और शेयर ट्रेडिंग के लिए फर्जी आईडी बनवाई। इसके बाद पीड़ित से विभिन्न बैंक खातों में चरणबद्ध तरीके से पैसे ट्रांसफर करवाए गए और रकम वापस नहीं की गई।
₹4 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी कैसे सामने आई?
पुलिस ने कोऑर्डिनेशन पोर्टल के जरिए आरोपी के बैंक खाते की जाँच की, जिसमें पता चला कि यह खाता देशभर के अलग-अलग राज्यों में दर्ज तीन अन्य साइबर अपराध शिकायतों से भी जुड़ा है। इन तीनों मामलों में पीड़ितों से कुल ₹4,03,00,157 की ठगी की गई थी।
क्या इस मामले में कोई आरोपी अभी भी फरार है?
हाँ, पुलिस के अनुसार एक मुख्य आरोपी अभी भी फरार है। सचिनकुमार टेटा ने गौतमकुमार का बैंक खाता इसी फरार आरोपी को साइबर ठगी के लिए उपलब्ध कराया था। फरार आरोपी की तलाश जारी है।
साइबर ठगी से बचने के लिए क्या सावधानियाँ बरतें?
साइबर क्राइम सेल ने सलाह दी है कि शेयर ट्रेडिंग, फॉरेक्स या क्रिप्टो में भारी मुनाफे का दावा करने वाले अनजान संदेशों पर भरोसा न करें। किसी अनजान नंबर से व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप में जोड़े जाने पर तुरंत ग्रुप छोड़ें और नंबर ब्लॉक करें। ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
राष्ट्र प्रेस
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