गुजरात पुलिस का 'ऑपरेशन म्यूल हंट': ₹10.65 लाख APK साइबर धोखाधड़ी में झारखंड से दो गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
सूरत शहर साइबर क्राइम सेल ने ₹10.65 लाख की APK-आधारित साइबर धोखाधड़ी के मामले में झारखंड के गिरिडीह जिले से दो कथित मनी म्यूल ऑपरेटरों को गिरफ्तार किया है। जाँचकर्ताओं के अनुसार, आरोपियों के बैंक खातों में ₹75 लाख से अधिक के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है, जो कथित तौर पर साइबर अपराध की रकम को आगे ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किए गए थे। यह कार्रवाई दिसंबर 2024 में शुरू किए गए 'ऑपरेशन म्यूल हंट' के तहत हुई है।
मुख्य घटनाक्रम
यह मामला 2 नवंबर 2025 को सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच दर्ज शिकायत से जुड़ा है, जब एक अज्ञात जालसाज ने शिकायतकर्ता के ICICI बैंक खाते में अनधिकृत पहुँच प्राप्त कर ली। पुलिस के अनुसार, पीड़ित ने अनजाने में व्हाट्सएप या SMS के माध्यम से प्राप्त एक दुर्भावनापूर्ण APK फाइल इंस्टॉल कर ली, जिससे जालसाजों को SMS संदेशों, OTP और बैंकिंग जानकारी तक पहुँच मिल गई। इसके बाद कई लेनदेन के ज़रिए ₹10,65,375.98 हस्तांतरित कर लिए गए।
गौरतलब है कि APK-आधारित धोखाधड़ी में पीड़ित का फोन पूरी तरह जालसाज के नियंत्रण में आ जाता है — बिना किसी बैंकिंग पिन के भी खाते से रकम उड़ाई जा सकती है। यह तकनीक तेज़ी से संगठित साइबर गिरोहों की पसंदीदा बनती जा रही है।
चार दिन, 1,800 किलोमीटर: कैसे हुई गिरफ्तारी
पुलिस उपायुक्त (साइबर सेल) बिशाखा जैन ने बताया कि तकनीकी विश्लेषण और वित्तीय जाँच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि दोनों आरोपी सूरत से लगभग 1,800 किलोमीटर दूर झारखंड में हैं। इसके बाद एक विशेष दल को गिरिडीह जिले भेजा गया, जहाँ टीम चार दिनों तक रही और स्थानीय पुलिस व दो पुलिस थानों के कर्मियों की सहायता से मानवीय खुफिया जानकारी के आधार पर दोनों आरोपियों को दबोचा गया।
जैन ने कहा, 'नवंबर 2025 में पीड़ित को व्हाट्सएप और SMS के ज़रिए एक APK फाइल मिली। APK इंस्टॉल करने के बाद फोन हैक हो गया और पीड़ित के खाते से 10.65 लाख रुपए निकाल लिए गए। ऑपरेशन म्यूल हंट के दौरान हमने राजेश्वर स्वैन और जियाउर रहमान को गिरफ्तार किया।'
गिरफ्तार आरोपी और उनकी भूमिका
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गिरिडीह जिले के निवासी 29 वर्षीय रूपलाल मंडल और 31 वर्षीय मुकेश मंडल के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, रूपलाल मंडल ने अपने नाम से दो बैंक खाते खोले थे और कथित तौर पर बैंक किट, ATM कार्ड और खाते की जानकारी फरार आरोपियों को सौंप दी थी। जाँच में उनके खातों में ₹75 लाख से अधिक के लेनदेन का पता चला है।
यह ऐसे समय में आया है जब मनी म्यूल नेटवर्क — जिसमें लोग कमीशन के बदले अपने बैंक खाते साइबर अपराधियों को सौंप देते हैं — पूरे देश में तेज़ी से फैल रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के साइबर पोर्टल पर ऐसे मामलों की संख्या पिछले दो वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है।
कानूनी कार्रवाई
सूरत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 61(2), और 3(5) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और जाँच जारी है।
आगे क्या
पुलिस के अनुसार, इस मामले में फरार आरोपियों की तलाश अभी जारी है। 'ऑपरेशन म्यूल हंट' के तहत अन्य राज्यों में भी इसी तरह की जाँच चल रही है। अधिकारियों ने आम लोगों को सलाह दी है कि वे अज्ञात स्रोतों से प्राप्त किसी भी APK फाइल को इंस्टॉल न करें और संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।