जामताड़ा गैंग का साथी गिरफ्तार: सूरत साइबर सेल ने फर्जी RTO ई-चालान APK फ्रॉड में ₹5 लाख की ठगी का पर्दाफाश किया
सारांश
मुख्य बातें
सूरत की साइबर क्राइम सेल ने 13 अगस्त 2026 को झारखंड के जामताड़ा गैंग के एक कथित साथी को गिरफ्तार किया, जो पीड़ितों से ठगी गई रकम को 'म्यूल' बैंक खातों के ज़रिए संचालित करता था और उसे नकद में बदलकर गैंग के फरार सदस्यों तक पहुँचाता था। यह गिरफ्तारी एक फर्जी RTO ई-चालान APK फ्रॉड की जाँच के दौरान हुई, जिसमें पीड़ित के बैंक खाते से ₹5,02,562 की अवैध निकासी की गई थी।
मुख्य आरोपी कौन है
गिरफ्तार आरोपी की पहचान सीताराम मंडल (आयु 26 वर्ष), निवासी बिसनपुर गाँव, गिरिडीह ज़िला, झारखंड, के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, मंडल पहले से ही साबरमती जेल में बंद था, जहाँ से तकनीकी जाँच के आधार पर उसे हिरासत में लेकर न्यायालय में पेश किया गया और रिमांड पर लिया गया।
फ्रॉड का तरीका: APK फाइल से बैंक खाता खाली
20 नवंबर 2025 को एक अज्ञात व्हाट्सएप नंबर से पीड़ित के मित्र राकेश शर्मा के फोन पर एक खतरनाक APK फाइल भेजी गई। इस हैक किए गए खाते से पीड़ित के बेटे के व्हाट्सएप ग्रुप में फाइल वायरल की गई। जैसे ही पीड़ित ने फाइल डाउनलोड की, उसका फोन हैक हो गया और बैंक खाते से ₹5,02,562 तत्काल ट्रांसफर कर लिए गए।
पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन से संपर्क के बाद 14 दिसंबर 2025 को सूरत साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद औपचारिक जाँच शुरू हुई।
पैसे का नेटवर्क: कमीशन से कैश तक
जाँच में सामने आया कि पहले से गिरफ्तार आरोपी निशित नाथवानी ने ठगी की रकम में से ₹1,47,954 एक क्रेडिट बिल के भुगतान में उपयोग किए। नाथवानी ने कथित तौर पर 15 से 20 प्रतिशत कमीशन अपने पास रखा और शेष राशि कैश डिपॉज़िट मशीन के ज़रिए सीताराम मंडल के बैंक खाते में जमा कर दी।
आरोप है कि मंडल ने इसमें से 5 से 10 प्रतिशत कमीशन काटकर बाकी नकद जामताड़ा गैंग के फरार सदस्यों को सौंप दिया। यह 'लेयर्ड मनी ट्रेल' साइबर ठगी नेटवर्क की जटिल संरचना को दर्शाता है, जिसमें हर स्तर पर कमीशन-आधारित भागीदारी होती है।
साइबर सेल की चेतावनी
सूरत साइबर क्राइम सेल ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात स्रोत से प्राप्त APK फाइल डाउनलोड न करें — चाहे वह RTO चालान, बैंक, KYC अपडेट, ग्राहक सहायता, सरकारी योजना या अपॉइंटमेंट बुकिंग से जुड़ी क्यों न लगे। इसके अलावा, SMS या ईमेल के ज़रिए आए किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने की सलाह दी गई है।
गौरतलब है कि जामताड़ा, झारखंड का यह ज़िला देशभर में साइबर फ्रॉड का केंद्र बन चुका है और इससे जुड़े गैंग अब गुजरात समेत कई राज्यों में सक्रिय हैं। यह मामला बताता है कि अब साइबर ठगी का नेटवर्क राज्य की सीमाओं से परे फैल चुका है और जेल में बंद आरोपी भी इस नेटवर्क का हिस्सा बने रहते हैं।