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आजमगढ़ में फर्जी सीओ बनकर ₹90,000 की ठगी, पुलिस वर्दी समेत आरोपी संजय गिरफ्तार

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आजमगढ़ में फर्जी सीओ बनकर ₹90,000 की ठगी, पुलिस वर्दी समेत आरोपी संजय गिरफ्तार

सारांश

आजमगढ़ में एक आरोपी ने पुलिस की वर्दी पहनकर वीडियो कॉल के जरिए खुद को सीओ बताया और शराब ठेका दिलाने के नाम पर ₹90,000 ठग लिए। साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में आरोपी संजय को दबोचा गया — और जाँच में कई और पीड़ितों की आशंका सामने आई है।

मुख्य बातें

आजमगढ़ के गंभीरपुर थाना क्षेत्र में फर्जी सीओ बनकर ठगी करने वाले आरोपी संजय को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
आरोपी ने पीड़ित से शराब ठेका दिलाने के नाम पर ₹3.20 लाख की माँग की और ₹90,000 नगद वसूले।
1 सितंबर 2026 को आरोपी ने पुलिस वर्दी पहनकर पीड़ित को वीडियो कॉल की थी।
गिरफ्तारी में दो कूटरचित पहचान पत्र , फर्जी आवंटन पत्र और डिप्टी एसपी की वर्दी बरामद।
पुलिस को अन्य पीड़ितों की भी आशंका; विशेष जाँच टीम गठित।

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसने कथित तौर पर सर्कल ऑफिसर (सीओ) का भेष धारण कर शराब का ठेका दिलाने के नाम पर एक पीड़ित से ₹90,000 नगद की ठगी की। 18 सितंबर 2026 को हुई इस गिरफ्तारी में आरोपी के पास से नकली पुलिस पहचान पत्र, फर्जी आवंटन पत्र और डिप्टी एसपी की वर्दी का पूरा सेट भी बरामद किया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

गंभीरपुर थाना क्षेत्र के निवासी एक पीड़ित को आरोपी ने शराब का ठेका दिलाने का झाँसा देकर कुल ₹3.20 लाख की माँग की थी, जिसमें से उसने ₹90,000 नगद पहले ही वसूल लिए थे। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने 1 सितंबर 2026 को पुलिस की वर्दी पहनकर पीड़ित को वीडियो कॉल भी की, ताकि उसे विश्वास दिलाया जा सके कि वह वास्तव में एक सक्रिय अधिकारी है। शक होने पर पीड़ित ने जाँच की और आरोपी का असली चेहरा सामने आया।

इसके बाद पीड़ित ने गुरुवार को गंभीरपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया, जिसके आधार पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।

गिरफ्तारी और बरामदगी

आजमगढ़ के अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) चिराग जैन ने बताया कि शुक्रवार को गंभीरपुर पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सूचना और लोकेशन के आधार पर रानीपुर रजमों मोड़ के पास से आरोपी को दबोच लिया। आरोपी की पहचान संजय (निवासी मगरावा, थाना गंभीरपुर, उम्र लगभग 40 वर्ष) के रूप में हुई है।

उसके कब्जे से दो कूटरचित पुलिस अधिकारी पहचान पत्र, शराब ठेके का फर्जी आवंटन पत्र, डिप्टी एसपी की पुलिस वर्दी का सेट और एक मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।

ठगी का तरीका

अपर पुलिस अधीक्षक चिराग जैन के अनुसार, आरोपी संजय वर्दी और फर्जी पहचान पत्र पहनकर वीडियो कॉल के माध्यम से लोगों को यह विश्वास दिलाता था कि वह पुलिस में तैनात अधिकारी है और शराब ठेका दिलाने जैसे सरकारी काम कराने में सक्षम है। इसके एवज में वह पीड़ितों से मोटी रकम वसूलता था।

गौरतलब है कि यह मामला सिर्फ एक पीड़ित तक सीमित नहीं हो सकता — पुलिस के अनुसार बरामद मोबाइल और पूछताछ से संकेत मिलते हैं कि कई अन्य लोगों से भी ठगी की जा सकती है।

आगे की जाँच

पुलिस ने मामले की गहन जाँच के लिए एक विशेष टीम गठित कर दी है। अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान और उनसे जुड़ी जानकारी जुटाने का काम जारी है। आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में विधिक कार्रवाई की जा रही है। यह मामला उत्तर प्रदेश में फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर साइबर ठगी की बढ़ती घटनाओं की ओर ध्यान दिलाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो डिजिटल युग में और आसान हो गया है। वीडियो कॉल पर वर्दी दिखाकर विश्वास बनाना साइबर ठगी का नया और खतरनाक तरीका है, जिसमें पीड़ित सामने से 'अधिकारी' को देखकर भी ठगे जाते हैं। उत्तर प्रदेश में ऐसी घटनाओं की बढ़ती संख्या यह सवाल उठाती है कि क्या पुलिस पहचान-पत्रों और वर्दी की नकल रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं। जब तक डिजिटल सत्यापन तंत्र आम नागरिकों की पहुँच में नहीं आता, ऐसे अपराध बेरोकटोक जारी रह सकते हैं।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आजमगढ़ फर्जी सीओ ठगी मामले में क्या हुआ?
आजमगढ़ के गंभीरपुर थाना क्षेत्र में आरोपी संजय ने खुद को सर्कल ऑफिसर बताकर एक पीड़ित से शराब ठेका दिलाने के नाम पर ₹90,000 नगद ठग लिए। पुलिस ने साइबर सेल के सहयोग से उसे 18 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया।
आरोपी ने ठगी के लिए क्या तरीका अपनाया?
आरोपी ने पुलिस की वर्दी और नकली पहचान पत्र पहनकर पीड़ित को वीडियो कॉल की, जिससे वह असली अधिकारी लगे। इसके बाद उसने शराब ठेके का फर्जी आवंटन पत्र भी दिखाया और ₹3.20 लाख की माँग रखकर ₹90,000 वसूले।
आरोपी के पास से क्या बरामद हुआ?
गिरफ्तारी के बाद आरोपी संजय के पास से दो कूटरचित पुलिस पहचान पत्र, शराब ठेके का फर्जी आवंटन पत्र, डिप्टी एसपी की वर्दी का पूरा सेट और एक मोबाइल फोन बरामद किए गए।
क्या इस मामले में और पीड़ित हो सकते हैं?
पुलिस के अनुसार बरामद मोबाइल फोन की जाँच और पूछताछ से अन्य लोगों के साथ भी ठगी की संभावना सामने आई है। इसके लिए एक विशेष जाँच टीम गठित की गई है।
इस मामले में किस थाने में मुकदमा दर्ज हुआ और कार्रवाई किसने की?
पीड़ित ने गंभीरपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया। इसके बाद गंभीरपुर पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने रानीपुर रजमों मोड़ के पास से आरोपी को गिरफ्तार किया।
राष्ट्र प्रेस
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