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ग्रेटर नोएडा में जीएसटी कंसल्टेंट से ₹29 लाख की लूट: फर्जी अधिकारी बने 5 आरोपी गिरफ्तार, पूरी रकम बरामद

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ग्रेटर नोएडा में जीएसटी कंसल्टेंट से ₹29 लाख की लूट: फर्जी अधिकारी बने 5 आरोपी गिरफ्तार, पूरी रकम बरामद

सारांश

फर्जी जीएसटी अधिकारी बनकर, पुलिस की वर्दी पहनकर और पुरानी जान-पहचान का फायदा उठाकर पाँच आरोपियों ने ग्रेटर नोएडा में एक जीएसटी कंसल्टेंट से ₹29 लाख लूट लिए। गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने पाँच टीमें बनाकर सभी आरोपियों को दबोचा और पूरी रकम बरामद कर ली।

मुख्य बातें

गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने ग्रेटर नोएडा के बिसरख थाना क्षेत्र में जीएसटी कंसल्टेंट से ₹29 लाख की लूट में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
वारदात 20 जुलाई 2026 को हुई; आरोपियों ने फर्जी जीएसटी अधिकारी बनकर पीड़ित संदीप को ब्लैकमेल किया।
मुख्य आरोपी कशिश चौहान उर्फ ईशू चौहान ने पुलिस सब इंस्पेक्टर की वर्दी पहनकर वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस ने ₹24 लाख 50 हजार नकद और ₹4 लाख 50 हजार के गहने बरामद कर ₹29 लाख की शत-प्रतिशत बरामदगी का दावा किया।
आरोपी और पीड़ित वर्ष 2021 से परिचित थे; आरोपी को पीड़ित के जीएसटी संबंधी कामकाज की पूर्व जानकारी थी।
7 मोबाइल फोन , 2 कारें , पुलिस और दिल्ली सिविल डिफेंस की वर्दियाँ भी जब्त।

गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने ग्रेटर नोएडा के बिसरख थाना क्षेत्र में जीएसटी कंसल्टेंट संदीप से ₹29 लाख की लूट के मामले का खुलासा करते हुए पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी जीएसटी अधिकारी बनकर पीड़ित को ब्लैकमेल किया और 20 जुलाई 2026 को सुनियोजित तरीके से यह वारदात अंजाम दी। पुलिस ने दावा किया है कि लूटी गई ₹29 लाख की शत-प्रतिशत बरामदगी कर ली गई है।

कैसे रची गई साजिश

पुलिस के अनुसार, 20 जुलाई 2026 को जीएसटी कंसल्टेंट संदीप अपनी आवासीय सोसायटी से पालतू कुत्ते और लैपटॉप के साथ कार से निकले थे। एस एस्पायर सोसायटी के पास आरोपियों ने अपनी कार पीड़ित की कार के आगे लगा दी। इसके बाद मुख्य आरोपी ने खुद को जीएसटी अधिकारी बताते हुए पीड़ित की कार में प्रवेश किया और दो फर्मों के ई-वे बिल में गड़बड़ी का आरोप लगाकर जेल भेजने की धमकी दी।

आरोपियों ने पीड़ित को उसकी ही कार में बैठाकर इधर-उधर घुमाया। इस दौरान पीड़ित के पालतू कुत्ते को एक्सप्रेसवे पर गिरोह के एक साथी के हवाले कर दिया गया। दबाव में आकर पीड़ित ने अपने भाई को फोन किया, जो ₹29 लाख नकद लेकर पहुँचा। आरोपियों ने रकम लेकर पीड़ित को उसकी कार समेत छोड़ दिया और फरार हो गए।

पुराने परिचय से बनी थी योजना

जाँच में सामने आया कि मुख्य आरोपी कशिश चौहान उर्फ ईशू चौहान और पीड़ित संदीप वर्ष 2021 से एक-दूसरे को जानते थे। पुलिस के मुताबिक, आरोपी को पहले से पता था कि पीड़ित जीएसटी से संबंधित काम करता है और कथित बिल हेरफेर के चलते नोटिस जैसी कार्रवाई का सामना कर चुका था। इसी जानकारी को आधार बनाकर गिरोह ने रेकी की और सुनियोजित ढंग से वारदात को अंजाम दिया।

गिरफ्तार आरोपी कौन हैं

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार पाँचों आरोपियों का विवरण इस प्रकार है:

कशिश चौहान उर्फ ईशू चौहान — मूल निवासी बिजनौर, हाल निवासी सलारपुर, नोएडा; यशोभूमि, द्वारका, दिल्ली में ड्राइवर-कम-पंप ऑपरेटर। राजेश पंवारदिल्ली नागरिक सुरक्षा बल से संबद्ध। विवेक शर्माएस्कोर्ट मजेसर, बल्लभगढ़ में ड्राइवर-कम-पंप ऑपरेटर। अंकित शाहीसलारपुर में लोहे की ग्रिल और गेट बनाने का काम; घटना में इस्तेमाल कार का मालिक। अंशुलदिल्ली में प्रॉपर्टी व्यवसाय।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इन पाँचों में से कोई भी पुलिसकर्मी नहीं है, हालाँकि कुछ आरोपियों का सरकारी विभागों से जुड़ी सेवाओं में काम करने का उल्लेख जाँच में सामने आया है।

बरामदगी का विवरण

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹24 लाख 50 हजार नकद बरामद किए। इसके अलावा लूटी गई रकम से खरीदी गई ₹4 लाख 50 हजार कीमत की सोने की चेन, चाँदी का कड़ा और अंगूठी भी जब्त की गई। घटना में इस्तेमाल एक कार और बिना नंबर प्लेट की एक वेन्यू कार, सात मोबाइल फोन, पुलिस सब इंस्पेक्टर की वर्दी तथा दिल्ली सिविल डिफेंस के लोगो वाली वर्दी, डोरी और बेल्ट भी बरामद हुए।

जाँच और आगे की कार्रवाई

मामले के खुलासे के लिए पुलिस की पाँच टीमें गठित की गई थीं। सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय खुफिया तंत्र की मदद से पुलिस ने जलपुरा रोड स्थित स्कॉन मंदिर के पास से सभी पाँचों आरोपियों को गिरफ्तार किया। बिसरख थाने में एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू की गई थी। पुलिस अब आरोपियों के आपराधिक इतिहास और अन्य पहलुओं की जाँच कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जीएसटी अनुपालन की जटिलताओं का फायदा उठाने की सोची-समझी रणनीति है — जहाँ आरोपियों ने पीड़ित की कानूनी कमजोरियों की पूर्व जानकारी को हथियार बनाया। गौरतलब है कि आरोपियों में दिल्ली नागरिक सुरक्षा बल से जुड़ा व्यक्ति भी शामिल है, जो सरकारी वर्दी और पहचान के दुरुपयोग की गंभीर प्रवृत्ति को उजागर करता है। ऐसे मामलों में जहाँ अपराधी पीड़ित की नियामकीय कमजोरियों को निशाना बनाते हैं, वहाँ जीएसटी जागरूकता और अनुपालन की सरलता दोनों ज़रूरी हैं — अन्यथा इस तरह के 'टैक्स-ब्लैकमेल' के मामले बढ़ते रहेंगे।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेटर नोएडा जीएसटी कंसल्टेंट लूट मामले में क्या हुआ?
ग्रेटर नोएडा के बिसरख थाना क्षेत्र में 20 जुलाई 2026 को पाँच आरोपियों ने फर्जी जीएसटी अधिकारी बनकर जीएसटी कंसल्टेंट संदीप को ब्लैकमेल किया और ₹29 लाख लूट लिए। गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने सभी पाँचों आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरी रकम बरामद कर ली है।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं और उनका पेशा क्या है?
मुख्य आरोपी कशिश चौहान उर्फ ईशू चौहान बिजनौर का निवासी है और दिल्ली के यशोभूमि में ड्राइवर-कम-पंप ऑपरेटर है। अन्य आरोपियों में राजेश पंवार (दिल्ली नागरिक सुरक्षा बल), विवेक शर्मा (बल्लभगढ़ में ड्राइवर), अंकित शाही (लोहे का काम, घटना की कार का मालिक) और अंशुल (दिल्ली में प्रॉपर्टी व्यवसाय) शामिल हैं।
पुलिस ने लूटी गई रकम कैसे बरामद की?
पुलिस ने ₹24 लाख 50 हजार नकद और लूटी रकम से खरीदे गए ₹4 लाख 50 हजार के गहने (सोने की चेन, चाँदी का कड़ा और अंगूठी) बरामद किए। पाँच पुलिस टीमों ने सीसीटीवी फुटेज, सर्विलांस और स्थानीय खुफिया तंत्र की मदद से आरोपियों को जलपुरा रोड स्थित स्कॉन मंदिर के पास से गिरफ्तार किया।
आरोपियों ने पीड़ित को कैसे निशाना बनाया?
मुख्य आरोपी कशिश चौहान वर्ष 2021 से पीड़ित संदीप को जानता था और उसे पता था कि संदीप जीएसटी कार्य करता है और कथित बिल हेरफेर के कारण नोटिस का सामना कर चुका था। इसी जानकारी को आधार बनाकर आरोपियों ने रेकी की और 20 जुलाई को सुनियोजित ढंग से वारदात अंजाम दी।
क्या गिरफ्तार आरोपियों में कोई असली पुलिसकर्मी है?
नहीं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि पाँचों आरोपियों में से कोई भी पुलिसकर्मी नहीं है। मुख्य आरोपी ने पुलिस सब इंस्पेक्टर की वर्दी पहनकर पीड़ित को धोखा दिया, जबकि एक अन्य आरोपी दिल्ली नागरिक सुरक्षा बल से जुड़ा बताया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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