18 सितंबर 2026
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एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026: जेपीसी अध्यक्ष संजय जायसवाल का शीतकालीन सत्र से पहले रिपोर्ट सौंपने का भरोसा

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एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026: जेपीसी अध्यक्ष संजय जायसवाल का शीतकालीन सत्र से पहले रिपोर्ट सौंपने का भरोसा

सारांश

एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 पर गठित 31 सदस्यीय जेपीसी की पहली बैठक नई दिल्ली में हुई। अध्यक्ष संजय जायसवाल ने शीतकालीन सत्र से पहले रिपोर्ट सौंपने का भरोसा दिलाया। विपक्ष NGO और अल्पसंख्यकों पर असर को लेकर चिंतित है, सरकार आरोपों को नकारती है।

मुख्य बातें

जेपीसी अध्यक्ष संजय जायसवाल ने 18 सितंबर 2026 को भरोसा दिलाया कि समिति शीतकालीन सत्र से पहले रिपोर्ट सौंपेगी।
31 सदस्यीय संयुक्त समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य हैं; अध्यक्ष ओम बिरला ने इसका गठन किया।
पहली बैठक में गृह सचिव ने सदस्यों को विधेयक के प्रावधानों की जानकारी दी।
विधेयक को 12 अगस्त 2026 को विपक्षी विरोध के बीच समिति को भेजा गया था; विपक्ष का आरोप था कि इससे अल्पसंख्यकों और NGO पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
सरकार ने भेदभाव के आरोपों को खारिज किया और विपक्ष को विधेयक में ऐसा प्रावधान बताने की चुनौती दी।

संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष और बिहार के बेतिया से भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद संजय जायसवाल ने 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में पत्रकारों को बताया कि समिति संसद के शीतकालीन सत्र से पहले प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 पर अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। समिति की पहली बैठक के बाद दिए गए इस बयान को सरकार की ओर से विधेयक की समयबद्ध समीक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

पहली बैठक का घटनाक्रम

जायसवाल ने बताया कि समिति की पहली बैठक 'बहुत सुचारू और बेहतर तालमेल' के साथ संपन्न हुई और सभी सदस्यों ने अपने-अपने सवाल रखे। परंपरा के अनुसार, संबंधित मूल विभाग के अधिकारी समिति के समक्ष अपना पक्ष और जानकारी प्रस्तुत करते हैं। इसी क्रम में इस बैठक में गृह सचिव ने भी समिति के सदस्यों को विधेयक के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी।

समिति की संरचना और जनादेश

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा इस महीने की शुरुआत में गठित इस 31 सदस्यीय संयुक्त समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल हैं। समिति को प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक के प्रावधानों की जांच करने और विधेयक को संसद में आगे बढ़ाए जाने से पहले संभावित बदलावों पर विचार करने का जिम्मा सौंपा गया है।

दलीय संरचना की दृष्टि से समिति में BJP के 14, कांग्रेस के 5, तथा जनता दल (यूनाइटेड), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के 2-2 सदस्य हैं। समाजवादी पार्टी, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और तेलुगु देशम पार्टी के एक-एक सदस्य भी समिति में हैं।

लोकसभा से BJP के प्रमुख सदस्यों में भर्तृहरि महताब, तेजस्वी सूर्या, निशिकांत दुबे और अरविंद धर्मपुरी शामिल हैं। कांग्रेस की ओर से एंटो एंटनी, कैप्टन विरियाटो फर्नांडिस, मुहम्मद हमदुल्ला सईद और काली चरण मुंडा समिति में हैं।

विपक्ष की आपत्तियाँ और सरकार का रुख

गौरतलब है कि 12 अगस्त 2026 को विपक्षी दलों के तीखे विरोध के बीच विधेयक को संयुक्त समिति के पास भेजा गया था। विपक्ष का आरोप था कि प्रस्तावित बदलावों का अल्पसंख्यकों और गैर-सरकारी संगठनों (NGO) पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, और उन्होंने विधेयक को वापस लेने की माँग की थी।

सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि प्रस्तावित संशोधन किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं करते। सरकार ने विपक्षी दलों को यह भी चुनौती दी कि वे विधेयक में कोई ऐसा प्रावधान बताएँ जो भेदभाव करता हो।

एफसीआरए संशोधन का पृष्ठभूमि और महत्त्व

यह ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ वर्षों में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के तहत कई NGO के लाइसेंस रद्द किए गए हैं, जिससे नागरिक समाज संगठनों में चिंता का माहौल है। प्रस्तावित संशोधन के आलोचकों का कहना है कि नए प्रावधान विदेशी फंडिंग पर निर्भर संगठनों की गतिविधियों को और अधिक प्रतिबंधित कर सकते हैं।

जायसवाल ने कहा, 'हमें पूरा विश्वास है कि हम इस लक्ष्य को हासिल कर लेंगे' — जो संकेत देता है कि समिति शीतकालीन सत्र की संभावित तारीखों से पहले अपना काम पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। समिति की अगली बैठकों में विभिन्न हितधारकों के विचार सुने जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 31 सदस्यीय समिति — जिसमें विपक्ष के प्रतिनिधि भी हैं — विधेयक की वास्तविक जांच करेगी या यह महज एक औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह जाएगी। पिछले कुछ वर्षों में FCRA के तहत सैकड़ों NGO के लाइसेंस रद्द हो चुके हैं, और नागरिक समाज में इस विधेयक को लेकर गहरी बेचैनी है। बिना पारदर्शी हितधारक परामर्श के शीघ्र रिपोर्ट देने की जल्दबाजी, समिति की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा सकती है।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 मौजूदा FCRA कानून में बदलाव का प्रस्ताव रखता है, जो भारत में विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले संगठनों को नियंत्रित करता है। विपक्ष का आरोप है कि प्रस्तावित बदलाव अल्पसंख्यकों और NGO को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकते हैं, जिसे सरकार नकारती है।
जेपीसी रिपोर्ट कब तक आने की उम्मीद है?
जेपीसी अध्यक्ष संजय जायसवाल ने 18 सितंबर 2026 को भरोसा दिलाया कि समिति संसद के शीतकालीन सत्र से पहले अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। शीतकालीन सत्र आमतौर पर नवंबर-दिसंबर में आयोजित होता है।
विपक्ष एफसीआरए संशोधन विधेयक का विरोध क्यों कर रहा है?
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि प्रस्तावित बदलावों से अल्पसंख्यकों और गैर-सरकारी संगठनों (NGO) पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने विधेयक को वापस लेने की माँग की थी, जिसके बाद 12 अगस्त 2026 को इसे संयुक्त समिति के पास भेजा गया।
जेपीसी में कौन-कौन से दल शामिल हैं?
31 सदस्यीय समिति में BJP के 14, कांग्रेस के 5, जनता दल (यूनाइटेड), TMC और DMK के 2-2 तथा समाजवादी पार्टी, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और तेलुगु देशम पार्टी के एक-एक सदस्य शामिल हैं।
पहली जेपीसी बैठक में क्या हुआ?
18 सितंबर 2026 को हुई पहली बैठक में गृह सचिव ने समिति के सदस्यों को विधेयक के प्रावधानों की जानकारी दी। जायसवाल के अनुसार, बैठक 'सुचारू और बेहतर तालमेल' के साथ हुई और सभी सदस्यों ने अपने सवाल रखे।
राष्ट्र प्रेस
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