एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026: जेपीसी अध्यक्ष संजय जायसवाल का शीतकालीन सत्र से पहले रिपोर्ट सौंपने का भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष और बिहार के बेतिया से भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद संजय जायसवाल ने 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में पत्रकारों को बताया कि समिति संसद के शीतकालीन सत्र से पहले प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 पर अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। समिति की पहली बैठक के बाद दिए गए इस बयान को सरकार की ओर से विधेयक की समयबद्ध समीक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पहली बैठक का घटनाक्रम
जायसवाल ने बताया कि समिति की पहली बैठक 'बहुत सुचारू और बेहतर तालमेल' के साथ संपन्न हुई और सभी सदस्यों ने अपने-अपने सवाल रखे। परंपरा के अनुसार, संबंधित मूल विभाग के अधिकारी समिति के समक्ष अपना पक्ष और जानकारी प्रस्तुत करते हैं। इसी क्रम में इस बैठक में गृह सचिव ने भी समिति के सदस्यों को विधेयक के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी।
समिति की संरचना और जनादेश
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा इस महीने की शुरुआत में गठित इस 31 सदस्यीय संयुक्त समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल हैं। समिति को प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक के प्रावधानों की जांच करने और विधेयक को संसद में आगे बढ़ाए जाने से पहले संभावित बदलावों पर विचार करने का जिम्मा सौंपा गया है।
दलीय संरचना की दृष्टि से समिति में BJP के 14, कांग्रेस के 5, तथा जनता दल (यूनाइटेड), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के 2-2 सदस्य हैं। समाजवादी पार्टी, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और तेलुगु देशम पार्टी के एक-एक सदस्य भी समिति में हैं।
लोकसभा से BJP के प्रमुख सदस्यों में भर्तृहरि महताब, तेजस्वी सूर्या, निशिकांत दुबे और अरविंद धर्मपुरी शामिल हैं। कांग्रेस की ओर से एंटो एंटनी, कैप्टन विरियाटो फर्नांडिस, मुहम्मद हमदुल्ला सईद और काली चरण मुंडा समिति में हैं।
विपक्ष की आपत्तियाँ और सरकार का रुख
गौरतलब है कि 12 अगस्त 2026 को विपक्षी दलों के तीखे विरोध के बीच विधेयक को संयुक्त समिति के पास भेजा गया था। विपक्ष का आरोप था कि प्रस्तावित बदलावों का अल्पसंख्यकों और गैर-सरकारी संगठनों (NGO) पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, और उन्होंने विधेयक को वापस लेने की माँग की थी।
सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि प्रस्तावित संशोधन किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं करते। सरकार ने विपक्षी दलों को यह भी चुनौती दी कि वे विधेयक में कोई ऐसा प्रावधान बताएँ जो भेदभाव करता हो।
एफसीआरए संशोधन का पृष्ठभूमि और महत्त्व
यह ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ वर्षों में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के तहत कई NGO के लाइसेंस रद्द किए गए हैं, जिससे नागरिक समाज संगठनों में चिंता का माहौल है। प्रस्तावित संशोधन के आलोचकों का कहना है कि नए प्रावधान विदेशी फंडिंग पर निर्भर संगठनों की गतिविधियों को और अधिक प्रतिबंधित कर सकते हैं।
जायसवाल ने कहा, 'हमें पूरा विश्वास है कि हम इस लक्ष्य को हासिल कर लेंगे' — जो संकेत देता है कि समिति शीतकालीन सत्र की संभावित तारीखों से पहले अपना काम पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। समिति की अगली बैठकों में विभिन्न हितधारकों के विचार सुने जाने की उम्मीद है।