एफसीआरए बिल पर BJP नेता प्रतुल शाहदेव: 'कांग्रेस काल में विदेशी फंड से देशविरोधी शक्तियों को मदद'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता प्रतुल शाहदेव ने 18 सितंबर 2026 को रांची में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (एफसीआरए बिल), सेमीकॉन इंडिया, एमएमडीआर एक्ट और झारखंड में चल रहे कई विवादास्पद मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर सीधा हमला बोला। शाहदेव ने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में विदेशी फंड का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ और आदिवासी व दलित समुदायों को निशाना बनाया गया।
एफसीआरए बिल पर शाहदेव का बयान
एफसीआरए बिल पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रतुल शाहदेव ने कहा, 'मेरा मानना है कि विदेश से जो भी फंड आता है, उसको सरकार की जाँच के बिना नहीं जाना चाहिए।' उनके अनुसार, कांग्रेस के समय में इस फंड का जमकर दुरुपयोग किया गया और देशविरोधी शक्तियों को भी इससे वित्तपोषण किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फंड का सबसे अधिक दुरुपयोग आदिवासी इलाकों में धर्मांतरण के लिए हुआ।
शाहदेव ने यह भी कहा, 'एफसीआरए से किसी को क्यों डर लग रहा है? जो इसका दुरुपयोग करते थे, उन्हीं को डर लग रहा है।' उल्लेखनीय है कि कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों और नागरिक समाज संगठनों ने एफसीआरए संशोधनों को लेकर आपत्तियाँ जताई हैं।
कोऑपरेटिव बैंक घोटाले पर ईडी की कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में की गई छापेमारी पर शाहदेव ने कहा, 'यह काफी चर्चित घोटाला था और काफी लंबे समय से इसे दबाकर रखा गया था। आम लोगों के जमा किए गए पैसे की लूट की गई थी। यह नरेंद्र मोदी का न्यू इंडिया है — कोई गलत करके बच नहीं सकता।' इस बयान को BJP की उस व्यापक रणनीति के तहत देखा जा रहा है जिसमें राज्य की झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाते रहे हैं।
जेपीएससी-जेएसएससी सीजीएल विवाद और अदालती प्रक्रिया
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) सीजीएल मामले पर शाहदेव ने राज्य सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'सरकार दोनों ओर से बैटिंग कर रही है। आंदोलनकारी छात्रों को शांत करने के लिए सरकार ने एक साथ नौकरी कर रहे कर्मचारियों की सेवाएँ समाप्त कर दीं। सरकार को पता था कि कोई कोर्ट जाएगा तो तुरंत स्टे मिल जाएगा, क्योंकि यह नेचुरल जस्टिस के खिलाफ था।'
शाहदेव ने यह भी बताया कि न्यायालय ने सरकार को समयसीमा के भीतर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया था, किंतु राज्य सरकार तय समय में एफिडेविट दाखिल नहीं कर सकी। उन्होंने कहा, 'कोर्ट ने कहा कि हम बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं और 48 घंटे में एफिडेविट फाइल करना होगा। इस मामले में राज्य सरकार बेनकाब हो गई है।' इस पर JMM सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सेमीकॉन इंडिया और एमएमडीआर एक्ट पर केंद्र का बचाव
सेमीकंडक्टर नीति को लेकर शाहदेव ने केंद्र सरकार की उपलब्धियाँ गिनाते हुए कहा, 'सेमीकंडक्टर में कभी ताइवान का अधिपत्य था और आज भारत में 12 नए प्रोजेक्ट लगे हैं जो अब कमर्शियल प्रोडक्शन की कगार पर हैं।' उन्होंने खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम (एमएमडीआर एक्ट) का भी समर्थन करते हुए JMM की आलोचना पर पलटवार किया। उनके अनुसार यह अधिनियम झारखंड के खनन क्षेत्र के लिए फायदेमंद साबित होगा।
आगे क्या
JPSC-JSSC सीजीएल मामले में अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं, खासकर अदालत द्वारा तय 48 घंटे की समयसीमा में एफिडेविट न आने के बाद। एफसीआरए बिल पर संसद में बहस जारी है और विपक्षी दलों का विरोध बना हुआ है। BJP की ओर से झारखंड में यह सक्रियता आगामी राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।